प्रदेश के एक महकमे के ‘मुखियाजी’ को जमीनों से बहुत प्रेम हो गया है। यूं कहिए कि ‘मूल्य राजनीति’ और जमीन से जुड़ी पार्टी के ये ‘नेताजी’ पूरी तरह से पार्टी के पद्चिन्हों पर चलते हुए जमीन से जुड़ गए हैं! तभी तो 2 साल में ही ‘मुखियाजी’ ने महकमे से जो भी बटोरा उसे जमीनों से जोड़ दिया! जमीन की राजनीति ‘मुखियाजी’ को इतनी रास आ रही है कि अपने क्षेत्र में तो ‘मुखियाजी’ का पूरा फोकस ही जमीनों पर है।
सुनने में तो यहां तक आ रहा है कि ‘मुखियाजी’ के क्षेत्र में जमीनों का खरीद-बेचान भी ‘मुखियाजी’ की अनुमति के बिना नहीं हो रहा है। इसलिए तो ‘मुखियाजी’ ने अपने क्षेत्र में अपने कृपा पात्रों को ही लगा रखा है। ‘मुखियाजी’ का जमीनों का प्रेम इतना बढ़ गया कि अपने महकमे की शहर के बीचोंबीच की एक बेशकीमती जमीन को हड़पने की भी तैयारी चल रही है।
इस बेशकीमती जमीन के बदले ‘मुखियाजी’ ने पहले दूर गांव में महकमे के लिए गांव की सरकार से जमीन अलॉट करवाई और अब महकमे का ऑफिस वहां भेजकर इस जमीन को खाली करने की तैयारी चल रही है। इस जमीन को शहरी सरकार को सौंपने की फाइल महकमें में तेजी से आगे बढ़ रही है, जो कि ‘मुखियाजी’ की ही मेहरबानी का खेल है। करोड़ों की इस बेशकीमती जमीन पर ‘मुखियाजी’ अपने भविष्य की प्लानिंग भी तैयार कर चुके हैं।
सुनने में ये भी आ रहा है कि लोकतंत्र के एक स्तम्भ ने ‘मुखियाजी’ के इन कारनामों की एक फाइल भी तैयार कर ली थी। और फाइल तैयार भी क्यों नहीं करते! ‘मुखियाजी’ ने कानूनी दावपेंच लगाकर इनकी जमीन को भी छीनने का प्रयास किया था, लेकिन जब ‘मुखियाजी’ को इसकी भनक लगी तो उनको अपने खेल की पोल खुलती नजर आई। आनन-फानन में ‘मुखियाजी’ ने चौथे स्तम्भ को सेट किया और कारनामों की फाइल को नष्ट करवा दिया।
अब सवाल उठता है कि ‘मुखियाजी’ का यह जमीनों का प्रेम उन्हें आगे ले जाता है या फिर आने वाले समय में उनके ये कारनामें उनके गले की मुसीबत बनेंगे?
एक्सपोज बाबू
