EXPOSE NOW स्पेशल: राजस्थान ब्यूरोक्रेसी में बड़ा बदलाव, युवाओं के हाथ में कमान; 15 सीनियर IAS होंगे रिटायर

जयपुर। राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था (ब्यूरोक्रेसी) में आने वाले दिनों में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलने वाला है। सूबे की सत्ता को परदे के पीछे से चलाने वाले प्रशासनिक तंत्र की पूरी तस्वीर अब बदलने जा रही है। Expose Now की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान में सीधी भर्ती से आए 57 फीसदी यूपीएससी (UPSC) ब्यूरोक्रेट्स युवा हैं, जिनकी उम्र 40 वर्ष से कम है। यही युवा अधिकारी अगले 20 सालों तक राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी की मुख्य धुरी बनने वाले हैं। दूसरी तरफ, पदोन्नत (प्रमोटी) होकर आईएएस बनने वाले अधिकारियों में 82 फीसदी की उम्र 55 वर्ष के पार हो चुकी है, जिनमें से महज 13 अधिकारी ही ऐसे हैं जो अगले 5 साल से ज्यादा सेवा में रहेंगे।

एक साल में 15 बड़े अधिकारी होंगे रिटायर, जूनियर्स को मिलेगी कमान:-

राजस्थान प्रशासनिक गलियारे से सबसे बड़ी खबर यह है कि आगामी एक साल के भीतर प्रदेश के 15 वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं।

वर्तमान मुख्य सचिव (CS) वी. श्रीनिवास

केंद्र में कार्यरत तन्मय कुमार

पूर्व मुख्य सचिव सुधांश पंत

ACS आनंद कुमार

ये तमाम बड़े नाम अगले एक साल में रिटायर हो जाएंगे। इसके अलावा विकास सीतारामजी भाले, नलिनी कठोतिया, महावीर प्रसाद, अनिल कुमार अग्रवाल, पुखराज सैन, श्रुति भारद्वाज, जगजीत सिंह मोंगा, रामनिवास मेहता, कमल राम मीणा, सीताराम जाट और हेमपुष्पा शर्मा भी इसी साल रिटायर होने वाले अधिकारियों की लिस्ट में शामिल हैं। इन दिग्गजों के हटने के बाद सचिवालय से लेकर जिलों तक में जूनियर और युवा अधिकारियों को कमान मिलना तय है।

केंद्र से लेकर राज्य तक… इन युवाओं पर टिकी है सरकार की साख:-

यूपीएससी से सीधे चयनित इन युवा आईएएस अधिकारियों पर न सिर्फ राज्य सरकार, बल्कि केंद्र सरकार का भी भरोसा लगातार बढ़ रहा है।

अभिमन्यु कुमार: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पीएस (PS) के रूप में तैनात हैं।

जितेन्द्र कुमार सोनी: मुख्यमंत्री के सचिव के रूप में अहम जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

सिद्धार्थ सिहाग: मुख्यमंत्री के विशेष सचिव के पद पर तैनात हैं।

रुक्मणी रियार: पर्यटन आयुक्त

डॉ. भारती दीक्षित: स्कूल शिक्षा निदेशक

शिवांगी स्वर्णकार: एनटीए के संयुक्त निदेशक

आशीष गुप्ता: केंद्र में तैनात

इसके अलावा, जयपुर निगम आयुक्त ओमप्रकाश कसेरा, आईटी आयुक्त हिमांशु गुप्ता और आबकारी आयुक्त नमित मेहता जैसे युवा चेहरों के पास प्रदेश के वित्त प्रबंधन और प्रमुख विभागों का अहम जिम्मा है। चौंकाने वाली बात यह है कि 41 में से लगभग सभी जिला कलेक्टरों का जिम्मा भी वर्तमान में युवा आईएएस ही संभाल रहे हैं।

आंकड़ों की जुबानी, राजस्थान ब्यूरोक्रेसी का पूरा सच:-

कुल IAS अधिकारी- 208

40 साल से कम उम्र के युवा IAS- 118 (57% – सीधी भर्ती)

90 IAS- 40 वर्ष से अधिक उम्र के

प्रमोटी IAS- कुल 72 (इनमें से 59 यानी 82% अधिकारी 55 साल से पार हैं)

5 साल से ज्यादा सेवा वाले प्रमोटी IAS- सिर्फ 13 अधिकारी

किस राज्य के कितने IAS राजस्थान में जमा रहे हैं धाक:-

राजस्थान कैडर में सबसे ज्यादा दबदबा खुद राजस्थान के मूल निवासियों का है:-

राजस्थान- 52

उत्तर प्रदेश- 28

बिहार- 15

दिल्ली- 13

हरियाणा- 11

महाराष्ट्र- 11

पंजाब- 7

मध्य प्रदेश- 6

कर्नाटक- 6

“युवा आईएएस को जिला कलेक्टर बनाने से पहले सचिवालय स्तर पर उपसचिव (Deputy Secretary) बनाकर फाइलों पर काम करने का अनुभव (फाइल वर्किंग) दिया जाना चाहिए। सीधे फील्ड पोस्टिंग जैसे कलेक्टर या डायरेक्टर बनाने से बाद में सचिवालय में काम करने में प्रशासनिक चुनौतियां आ सकती हैं।” राजस्थान में एक तरफ जहां तजुर्बेकार अधिकारियों की फौज एक साल में विदा होने वाली है, वहीं दूसरी तरफ युवा और जोश से लबरेज आईएएस अधिकारियों की नई पौध राजकाज संभालने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह बदलाव राजस्थान के विकास को कितनी रफ्तार देता है, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now


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