शाहपुरा (भीलवाड़ा): ‘Expose Now’ द्वारा प्रमुखता से उठाए गए ‘देव गौशाला सेवा संस्थान’ के अतिक्रमण और सरकारी चारागाह भूमि पर अवैध कब्जे के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। भीलवाड़ा के शाहपुरा से भाजपा विधायक लालाराम बैरवा से जुड़े इस संस्थान पर प्रशासन ने शुक्रवार को बुलडोजर चला दिया। प्रशासन ने न केवल अवैध रूप से तानी गई छत और तारबंदी को ध्वस्त किया, बल्कि विभाग ने गौशाला का बिजली कनेक्शन भी काट दिया है।

क्या था मामला?
शाहपुरा-केकड़ी मेगा हाईवे के समीप लगभग 20 बीघा सरकारी चारागाह भूमि पर ‘देव गौशाला’ के नाम से अवैध कब्जा कर लिया गया था। चौंकाने वाली बात यह थी कि जब प्रशासन ने मौके पर जाकर जांच की, तो वहां एक भी गाय नहीं मिली, लेकिन तारबंदी, बोरिंग और बिजली कनेक्शन जैसे तमाम ‘व्यावसायिक’ इंतजाम पूरे कर लिए गए थे।
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कलेक्टर का कड़ा रुख और प्रशासनिक कार्रवाई
जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए गुरुवार शाम ही प्रशासनिक अधिकारियों की एक टीम गठित कर दी थी। शुक्रवार को तहसीलदार भींवराज परिहार के नेतृत्व में प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर अतिक्रमण को ध्वस्त किया। कलेक्टर ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
दस्तावेजों में खुलासा: कैसे नियमों को किया गया दरकिनार
राजस्व रिकॉर्ड (आराजी नंबर 2543) के अनुसार, चारागाह भूमि से गौशाला के लिए 5 हैक्टेयर भूमि आवंटन का प्रस्ताव भेजा गया था। लेकिन, जिला कलेक्टर ने राजस्थान गौशाला अधिनियम एवं नियमों का हवाला देते हुए इसे खारिज कर दिया था। नियमों के अनुसार:
- गौशाला का पंजीकरण विधिवत होना चाहिए।
- गौशाला कम से कम 3 वर्ष से संचालित होनी चाहिए। चूंकि देव गौशाला का रजिस्ट्रेशन ही 21 अगस्त 2025 को हुआ था, इसलिए यह आवंटन के पात्र नहीं थी। बावजूद इसके, सत्ता के रसूख का इस्तेमाल कर नियमों को ताक पर रखा गया।





विधायक की सफाई: ‘इस्तीफा दे चुका हूं’
विवाद बढ़ने के बाद विधायक लालाराम बैरवा ने सफाई देते हुए कहा, “मैं और मेरे परिवार के सदस्य संस्था से इस्तीफा दे चुके हैं। अब मेरा या मेरे परिवार का इससे कोई संबंध नहीं है। नई समिति का गठन किया गया है।” वहीं, दूसरी ओर सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, संस्था के गठन के समय विधायक स्वयं सचिव थे, उनके पुत्र चिनार अध्यक्ष, दूसरे पुत्र जतिन कोषाध्यक्ष और भतीजे कुंदन सह-सचिव थे।

एक और खुलासा: श्मशान भूमि पर भी नजर!
मीडिया रिपोर्टों और दस्तावेजों के अनुसार, विधायक से जुड़े ‘चिनार ग्रुप’ ने केवल चारागाह ही नहीं, बल्कि इसी क्षेत्र (आराजी नंबर 3131/2506) में श्मशान भूमि की जमीन पर भी पेट्रोल पंप और होटल खोलने का प्रस्ताव दिया था, जबकि ग्रामीण वहां श्मशान की मांग कर रहे थे। हालांकि, भारी विरोध के बाद इस प्रस्ताव पर कार्रवाई रुकी हुई है।





भजनलाल सरकार की छवि पर सवाल
भाजपा के ही स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ता इस मामले को लेकर दबे स्वर में विरोध जता रहे हैं। कार्यकर्ताओं का मानना है कि सत्ता का ऐसा दुरुपयोग मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ‘जीरो टॉलरेंस’ और साफ-सुथरी छवि को धूमिल कर रहा है।

अब आगे क्या?
प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने और बिजली कनेक्शन काटने के बाद, अब जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस पूरे ‘भूमि-कब्जा कांड’ में विधायक और उनके परिवार की संलिप्तता की जांच होगी या मामला केवल अतिक्रमण हटाने तक ही सीमित रहेगा?
