Expose Now Exclusive: भूमाफिया के आगे नतमस्तक हुआ सिस्टम? कार्रवाई करने वाले पुलिस अफसरों पर गिरी गाज, मामला पहुंचा DGP की दहलीज पर

CorruptionExposed

जयपुर। राजधानी के पॉश इलाके टोंक रोड स्थित वसुंधरा कॉलोनी में करीब 100 करोड़ रुपये की बेशकीमती जमीन पर कब्जे का खेल अब पुलिस महकमे के भीतर एक बड़े ‘शीतयुद्ध’ में बदल गया है। हैरानी की बात यह है कि जहां एक ओर खाकी को भूमाफिया पर लगाम कसनी थी, वहीं इस मामले में कार्रवाई करने वाले जांबाज पुलिस अधिकारियों को ही विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। मामला अब राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (DGP) तक पहुंच चुका है।

राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार शर्मा

क्या है पूरा विवाद?


मामला 30 मार्च 2026 का है, जब वसुंधरा कॉलोनी निवासी सत्यनारायण मीणा की करीब एक बीघा जमीन पर बने मकानों और दुकानों पर कब्जे की नीयत से हमला हुआ। आरोप है कि भूमाफिया आशीष अग्रवाल ने अशोक नगर थाने के हिस्ट्रीशीटर कपिल शर्मा और उसके गुर्गों के साथ मिलकर दुकानों के ताले तोड़े और जबरन घुसने की कोशिश की। पीड़ित पक्ष का कहना है कि यह उनकी पुश्तैनी जमीन है जिस पर माफिया की गिद्ध दृष्टि टिकी है।

पुलिस की कार्रवाई और अचानक ‘यू-टर्न’


घटना की सूचना पर बजाजनगर थाना पुलिस और मालवीय नगर एसीपी की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हिस्ट्रीशीटर कपिल शर्मा सहित तीन लोगों को हिरासत में लिया। कानून के जानकारों का मानना है कि यह पुलिस की एक सफल रेड थी, लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने सबको चौंका दिया।

बजाजनगर थाना पुलिस

एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के हस्तक्षेप के बाद इस पूरी कार्रवाई पर ही सवालिया निशान खड़े कर दिए गए। प्रक्रियात्मक खामियों का हवाला देते हुए एसीपी मालवीय नगर विनोद कुमार शर्मा, एसीपी सदर धर्मवीर सिंह और बजाजनगर थाना प्रभारी पूनम चौधरी से स्पष्टीकरण मांग लिया गया। हद तो तब हो गई जब थाना प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया गया।

पुलिस महकमे में आक्रोश और DGP से गुहार


विभाग के भीतर ही इस कार्रवाई को लेकर सुगबुगाहट तेज है। दबी जुबान में अधिकारी कह रहे हैं कि अगर अपराधियों को पकड़ने पर ही इनाम की जगह ‘सजा’ मिलेगी, तो पुलिस का मनोबल कैसे बचेगा?

बड़ा सवाल: क्या किसी ‘प्रभावशाली’ व्यक्ति के दबाव में यह कार्रवाई की गई?

जांच का दायरा: डीजीपी स्तर पर पहुंची शिकायत में निष्पक्ष जांच की मांग की गई है ताकि यह साफ हो सके कि गलती प्रक्रिया में थी या मंशा में।

संवेदनशील पहलू: पीड़ित पक्ष और सामाजिक न्याय


चूंकि पीड़ित पक्ष जनजातीय समुदाय से ताल्लुक रखता है, इसलिए मामले ने अब सामाजिक और राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। ‘Expose Now’ की पड़ताल में यह सामने आया है कि इस 100 करोड़ की भूमि के पीछे कई सफेदपोश चेहरों का भी हाथ हो सकता है।

अब देखना यह है कि डीजीपी इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं। क्या उन पुलिस अधिकारियों को न्याय मिलेगा जिन्होंने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कदम उठाया, या फिर भूमाफिया का रसूख सिस्टम पर भारी पड़ेगा?

बने रहें ‘Expose Now’ के साथ, हम उजागर करेंगे इस जमीन विवाद के पीछे के असली चेहरे।

Share This Article
Leave a Comment