करौली में पांचना बांध विवाद बना जातीय संघर्ष का अखाड़ा, जिलेभर में चक्का जाम

करौली। राजस्थान के करौली जिले में पांचना बांध का जल विवाद अब दो समुदायों के बीच जातीय संघर्ष में तब्दील होता नजर आ रहा है। पिछले 24 घंटों से अधिक समय से जिलेभर में चक्का जाम की स्थिति बनी हुई है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। प्रदर्शनकारियों ने जगह-जगह रास्तों को अवरुद्ध कर रखा है, जिसके कारण दूध, गैस सिलेंडर और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित हो गई है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रशासनिक अधिकारियों और मंत्रियों की समझाइश के बावजूद प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।

विवाद की जड़: क्या है दोनों पक्षों का आरोप?

विवाद तब शुरू हुआ जब पांचना बांध से नहरों में टेस्टिंग के लिए पानी छोड़ा गया, लेकिन नहरों में तकनीकी खराबी के कारण पानी की गति बहुत धीमी रही।

  • कमांड एरिया के किसानों का आरोप: कमांड क्षेत्र के किसानों का आरोप है कि जानबूझकर नहर के गेटों में खराबी पैदा की गई ताकि पानी उनके खेतों तक न पहुँचे। उन्होंने अपनी मांगों में नहर में पूर्ण क्षमता से पानी देने, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने, गंगापुर सिटी में दर्ज केस वापस लेने और प्रभारी मंत्री जवाहर सिंह बेढम को हटाने की मांग रखी है।
  • पांचना संघर्ष समिति का पक्ष: दूसरी ओर, पांचना संघर्ष समिति का कहना है कि प्रशासन ने रातभर जागकर तकनीकी खामियों को दूर कर दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरा पक्ष राजनीति के चलते जानबूझकर प्रदर्शन कर रहा है और सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा का प्रयोग कर महिलाओं को निशाना बना रहा है।

प्रशासन और नेताओं की कोशिशें बेअसर

हालात को काबू करने के लिए कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा मौके पर पहुंचे थे, लेकिन प्रदर्शनकारियों से उनकी बातचीत विफल रही। मंत्री को वापस जयपुर लौटना पड़ा। वहीं, जिले में रोडवेज के पहिए पूरी तरह थम चुके हैं और बाहर से आने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एसपी लोकेश सोनवाल का कहना है कि दोनों पक्षों से वार्ता की जा रही है और शांति व्यवस्था बनाए रखने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर ‘जहर’

इस पूरे विवाद में सोशल मीडिया एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ की जा रही अभद्र टिप्पणियों और जातिसूचक कटाक्षों ने तनाव को और अधिक उग्र कर दिया है। जिला प्रशासन अब सोशल मीडिया पर की जा रही पोस्ट्स और भड़काऊ बयानों पर सख्त कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है।


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