EXPOSE NOW खुलासा: PHED ठेकेदारों को मिला ‘झुनझुना’, रसूखदार कंपनियों ने खुद का ‘फर्जीवाड़ा’ छुपाने को फूके संघर्ष समिति के 1.20 करोड़, पहले सरकार को कोसा… फिर ‘दबाव’ बना तो घुटने टेककर छपवाए ‘धन्यवाद’ के विज्ञापन!

-छोटे ठेकेदारों से गद्दारी, समझौते की आड़ में सिर्फ ‘मेजर प्रोजेक्ट्स’ वाली बड़ी कंपनियों की चांदी, छोटे ठेकेदारों को मिला ठेंगा।

-चमचागिरी या डर? पहले सरकार का विरोध… फिर ‘थैंक यू’ के विज्ञापन, संघर्ष समिति की आड में चमकाई खुद की साख, ठेकेदारों को मोहरा बनाकर कुछ बड़ी ठेका कंपनियों ने हासिल कर लिया बजट

-आज फिर जलभवन में संघर्ष समिति के नेतृत्व में ठेकेदार होंगे इकट्ठे, OTMP भुगतान की मांग के साथ ही LD कटौती का करेंगे विरोध

जयपुर। राजस्थान जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के ठेकेदारों के साथ एक बार फिर बड़ा ‘खेला’ हो गया है। सरकार से लेकर मीडिया तक को खुश करने के चक्कर में ठेकेदारों की जेब तो ढीली हो गई, लेकिन हाथ में आया तो सिर्फ एक ‘झुनझुना’! सरकार ने करीब 9.50 करोड़ का बजट वादे की मियाद 25 जून निकल जाने के बाद जारी तो कर दिया, लेकिन यह भुगतान को मेजर प्रोजेक्ट वाली बड़ी कंपनियों के लिए जारी किया गया था और उन्हें मिल भी गया। दूसरी ओर संघर्ष समिति के नेतृत्व में प्रदेशभर में आंदोलन को आगे बढ़ाने में पूरी भूमिका निभाने वाले ओटीएमपी योजनाओं से जुड़े छोटे ठेकेदारों को इस भुगतान में से फूटी कौड़ी भी नहीं मिली। बेचारे छोटे ठेकेदार खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं और केन्द्र सरकार के राइडरों को पूरा करने के चक्कर में अभी निकट भविष्य में उन्हें भुगतान मिलने की कोई उम्मीद भी नजर नहीं आ रही है। बड़े ठेकेदारों के चक्कर में घुमराह होकर छोटे ठेकेदार भुगतान की आस लगाए बैठे हैं, लेकिन अभी उन्हें कोई भुगतान मिलता नजर नहीं आ रहा है। आज एक बार फिर संघर्ष समिति के नेतृत्व में छोटे ठेकेदार जलभवन में इकट्ठा होकर भुगतान की मांग करेंगे।

विज्ञापन के पीछे ‘फर्जीवाड़े’ को दबाने का खेल!

90% छोटे ठेकेदारों से ‘विश्वासघात’, सिर्फ ‘मेजर प्रोजेक्ट्स’ की चांदी:-

समझौते के नाम पर OTMP के 90 फीसदी छोटे और मध्यम ठेकेदारों को ठेंगा दिखा दिया गया है। जमीनी हकीकत यह है कि इस तथाकथित समझौते और भुगतान की शर्तों का पूरा फायदा सिर्फ ‘मेजर प्रोजेक्ट्स’ (बड़े प्रोजेक्ट्स) से जुड़ी चुनिंदा रसूखदार कंपनियों और फर्मों को ही मिलने वाला है। आम ठेकेदार आज भी खाली हाथ खड़ा है। दिसम्बर, 2023 से पहले के कार्यादेशों को समझौते का कोई लाभ नहीं मिलने वाला है। OTMP के 90 फीसदी कार्य दिसम्बर, 2023 से पहले ही शुरू हो गए थे और उनको समझौते में शामिल ही नहीं किया गया।

15 पाइंट्स की पालना में फंसे ओटीएमपी ठेकेदार:-

एनजेजेएम ने PHED को प्रोजेक्ट्स व ओटीएमपी के जेजेएम कार्यों में 15 पाइंटों की पालना कराने के बाद भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। जलदाय विभाग अधिकारियों ने इसके तहत बड़े कार्यों की मैपिंग तो फटाफट कर करवाकर भुगतान भी कर दिया, लेकिन अभी तक ओटीएमपी के कार्यों की मैपिंग की कोई सुध ही नहीं ली गई। छोटे ठेकेदारों का भुगतान तो एसएनए पोर्टल, वाम पोर्टल और एसएनए स्पर्श के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें केन्द्र से शायद ही फिलहाल कोई मदद मिल पाएगी। फिलहाल इसमें 100 फीसदी पैसा राज्य सरकार को ही देना पड़ेगा, जिसकी अभी तक दूर-दूर तक कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। दूसरी ओर क्वालिटी जांच के नाम पर भी छोटे ठेकेदारों का भुगतान पूरी तरह से अटकता नजर आ रहा है।

‘Expose Now’ के तीखे सवाल:-

सवाल नंबर 1: संघर्ष समिति के 1.20 करोड़ से ज्यादा के फंड को कुछ चुनिंदा कंपनियों के फर्जीवाड़े छुपाने और मीडिया को मैनेज करने में क्यों उड़ाया गया? इसका हिसाब कौन देगा?

सवाल नंबर 2: जब 90% छोटे ठेकेदारों (OTMP) को इस समझौते से कुछ मिलना ही नहीं है, तो उन्हें आंदोलन की भट्टी में क्यों झोंका जा रहा है?

सवाल नंबर 3: सरकार और PHED प्रशासन ने 25 जून की डेडलाइन तय की थी, तो बजट खातों तक क्यों नहीं पहुंचा? क्या यह सिर्फ हड़ताल टालने का एक सरकारी पैंतरा था?

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now


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