तबादला एक्सप्रेस: PHED मंत्री कन्हैयालाल बोले- ‘लापरवाह जाएंगे दूरदराज’,शिक्षक संघ सियाराम ने ‘सिफारिशी’ व्यवस्था पर उठाए सवाल

जयपुर। राजस्थान में सरकारी महकमों के भीतर तबादलों (Transfers) से बैन हटने के बाद प्रशासनिक और सियासी पारा चरम पर पहुंच चुका है। राज्य सरकार द्वारा तय की गई 5 जुलाई की अंतिम समय-सीमा (Deadline) जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, राजधानी जयपुर से लेकर हाड़ौती के केंद्र कोटा तक हलचल अभूतपूर्व रूप से बढ़ गई है। प्रदेश के दूर-दराज के जिलों से आए हजारों अधिकारी और कर्मचारी सचिवालय, मंत्रालय भवन और मंत्रियों के सरकारी आवासों के बाहर डेरा डाले हुए हैं। कर्मचारियों को डर है कि अंतिम सूचियां जारी होने के दौरान एक छोटी सी चूक भी उनकी मनचाही पोस्टिंग का गणित बिगाड़ सकती है।

कोटा में मदन दिलावर की जनसुनवाई में उमड़े कर्मचारी, बीमारी और बच्चों का दिया हवाला

तबादलों की यह जंग सिर्फ राजधानी तक सीमित नहीं है। कोटा में शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने रामचरण सर्कल स्थित जनसंवाद कार्यालय पर एक वृहद जनसुनवाई की। इस दौरान कार्यालय के बाहर कर्मचारियों और उनके परिजनों की कई मीटर लंबी कतारें देखने को मिलीं। ज्यादातर लोग कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ (हाड़ौती क्षेत्र) से अपनी अर्जियां लेकर पहुंचे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए मंत्री मदन दिलावर ने स्वयं सभी से मिलकर अर्जियां लीं। उन्होंने मीडिया को बताया:

“बड़ी संख्या में कर्मचारी तबादला चाहते हैं। इनमें से कुछ खुद को गंभीर रूप से बीमार बता रहे हैं, तो कुछ अपने माता-पिता की बीमारी का हवाला दे रहे हैं। कई महिला कर्मचारियों ने छोटे बच्चे होने की व्यावहारिक समस्या सामने रखी है। हमारा प्रयास रहेगा कि जो कर्मचारी लंबे समय से अपने गृह जिले से दूर हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर राहत दी जाए।”

स्थानांतरण नीति: इन्हें मिलेगी प्राथमिकता, लेकिन थर्ड ग्रेड शिक्षक और चिकित्सा विभाग अब भी ‘लॉक्ड’

राज्य सरकार के कार्मिक विभाग के निर्देशों के अनुसार, इस बार तबादलों में मानवीय दृष्टिकोण को सर्वोपरि रखा गया है। यह आदेश सरकारी कर्मचारियों के अलावा निगमों, बोर्डों और स्वायत्तशासी संस्थाओं पर भी समान रूप से लागू है।

प्राथमिकता श्रेणी की सूची:

  • एकल महिला, विधवा एवं तलाकशुदा कर्मचारी।
  • गंभीर बीमारियों (जैसे- कैंसर, ब्रेन ट्यूमर, हार्ट डिजीज, फेफड़े और किडनी की गंभीर बीमारी) से ग्रसित कर्मचारी।
  • नवनियुक्त और आकांक्षी जिलों में लंबे समय से कार्यरत कार्मिक।

विवाद की मुख्य वजह: सरकार ने जहां एक तरफ आम विभागों से बैन हटाया है, वहीं दूसरी तरफ थर्ड ग्रेड शिक्षकों (Third Grade Teachers) और चिकित्सा विभाग में तबादलों पर प्रतिबंध बरकरार रखा है, जिससे इस कैडर के कर्मचारियों में भारी मायूसी और आक्रोश है।

जयपुर में पावर सेंटर्स पर भारी दबाव: मंत्रियों ने तय किए कड़े मापदंड

राजधानी जयपुर के गांधीनगर और सिविल लाइंस स्थित मंत्रियों के आवासों पर सुबह से ही पैर रखने की जगह नहीं मिल रही है। अलग-अलग मंत्रियों ने अपने विभागों के लिए अलग लाइन तय की है:

  • डिप्टी सीएम प्रेम चंद बैरवा: उच्च शिक्षा और परिवहन विभाग के हजारों कर्मचारी अपनी अर्जियां लेकर उनके कार्यालय पहुंच रहे हैं। डिप्टी सीएम सभी को सकारात्मक आश्वासन देकर फाइलों की स्क्रूटनी करवा रहे हैं।
  • PHED मंत्री कन्हैयालाल चौधरी का कड़ा रुख: ‘काम करने वालों को इनाम, लापरवाहों को दूरदराज’
    जल जीवन मिशन (JJM) और राज्य की पेयजल व्यवस्था को संभाल रहे जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) में मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने ट्रांसफर को लेकर बेहद स्पष्ट और कड़ा संदेश दे दिया है।
  • गांधीनगर स्थित उनके आवास पर उमड़ रही भीड़ के बीच मंत्री ने साफ कहा:
    “विभाग के कंधों पर समय पर पेयजल प्रोजेक्ट्स पूरे करने की बड़ी जिम्मेदारी है। जिन कर्मचारियों ने पूरी निष्ठा और ईमानदारी से काम किया है, उन्हें उनकी पसंद की जगह पोस्टिंग देकर मनोबल बढ़ाया जाएगा। लेकिन, जिन कर्मचारियों ने काम में लापरवाही बरती है, वे दूरदराज के जिलों में जाने के लिए अपना बोरिया-बिस्तर तैयार रखें।”
  • खाद्य मंत्री सुमित गोदारा: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (NFSA) के “गिव अप अभियान” में राजस्थान को देश में नंबर वन (55.40 लाख लोगों ने राशन छोड़ा) बनाने वाले इस विभाग के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कर्मचारी अब मलाईदार सीटों पर ट्रांसफर की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
  • UDH मंत्री झाबर सिंह खर्रा: नगरपालिकाओं, नगर निगमों और यूआईटी (UIT) के स्थानांतरणों को लेकर सबसे ज्यादा राजनीतिक और विधायकों का दबाव मंत्री खर्रा पर है, हालांकि वे पूरी फाइलों को खुद परख रहे हैं और किसी जल्दबाजी में नहीं हैं।

विधायकों की ‘सिफारिशी पर्ची’ के खिलाफ शिक्षक संघ सियाराम की हुंकार

तबादला सत्र के अंतिम दौर में प्रदेश के शिक्षक संगठनों ने भी मोर्चा खोल दिया है। शिक्षक संघ सियाराम ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को एक महत्वपूर्ण और कड़ा ज्ञापन भेजा है। संघ ने प्रमुख रूप से मांग उठाई है कि तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण पर लगे प्रतिबंध को तत्काल हटाया जाए और प्रदेश में एक साफ-सुथरी, पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू हो। इसके साथ ही संघ ने राजनीतिक हस्तक्षेप पर कड़ा ऐतराज जताते हुए विधायकों और जनप्रतिनिधियों की सिफारिश पर हो रहे ‘पर्ची वाले तबादलों’ को तुरंत बंद करने की मांग की है, ताकि बिना पहुंच वाले साधारण और जरूरतमंद कर्मचारियों के साथ न्याय हो सके।

5 जुलाई की अंतिम तिथि बेहद नजदीक है। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ‘जीरो टॉलरेंस’ और सुशासन की नीति इन सूचियों में कितनी पारदर्शिता ला पाती है, या फिर हर बार की तरह इस बार भी प्रशासनिक गलियारों में ‘रसूख’ और ‘सिफारिश’ का बोलबाला रहेगा। पूरी ब्यूरोक्रेसी की नजरें अब आगामी 72 घंटों में आने वाली जंबो सूचियों पर टिकी हैं।


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