गुलाबी नगरी जयपुर की पॉश कॉलोनियों और बाहरी सीमाओं (Fringe Area) में जब आम शहर सो जाता है, तब कुछ खास जगहों पर एक अलग ही दुनिया आबाद होती है। ऊंची दीवारों के पीछे से आती संगीत की तेज आवाजें और रसूखदारों की चमकती गाड़ियां… बाहर से ‘फार्म हाउस’ का बोर्ड लगाकर सुख-शांति का दिखावा करने वाली इन जगहों के अंदर क्या चल रहा है, यह अब तक एक ‘खुला राज’ था। लेकिन अब इस ग्लैमर की आड़ में चल रहे करोड़ों रुपये के काले कारोबार और सरकारी खजाने को लगाई जा रही चपत का एक ऐसा दस्तावेज सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जयपुर के इन ‘सफेदपोश’ ठिकानों का सच इतना गहरा है जिनके तार ब्यूरोक्रेसी से लेकर सत्ता के गलियारों तक फैले हुए हैं।
खेती की जमीन पर ‘अय्याशी के महल’ और राजस्व की चोरी

इस ‘सिंडिकेट’ का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सच यह है कि ये आलीशान फार्म हाउस दरअसल खेती की जमीन (Agriculture Land) पर खड़े हैं । जांच के दायरे में आए इन फार्म हाउसों में मालिकों ने कृषि भूमि का ‘भू-उपयोग परिवर्तन’ (Land Use Change) कराए बिना ही उसे पूर्णतः व्यावसायिक (Commercial) उपयोग में ले लिया है । इससे सरकार को भू-रूपांतरण शुल्क और अन्य मदों में मिलने वाले करोड़ों रुपये के राजस्व का सीधा नुकसान हो रहा है । हैरानी की बात यह है कि कई फार्म हाउस तो बिना जमीन की रजिस्ट्री के ही संचालित हो रहे हैं, जो सीधे तौर पर राजकोष में सेंधमारी है । वहां किए गए पक्के निर्माण की भी विभाग से कोई स्वीकृति नहीं ली गई है, जो भू-विनियम नियमों के सरासर खिलाफ है ।
नियम ताक पर: इन 5 अनिवार्य अनुमतियों का है ‘टोटा’
अवैध रूप से चल रहे इन फार्म हाउसों ने ‘Farm House Residential Building Norms-Jaipur by Laws 2020’ के नियमों की धज्जियां उड़ा रखी हैं । एक वैध संचालन के लिए जरूरी ये 5 प्रशासनिक स्वीकृतियां इन जगहों से नदारद हैं:
- JDA की 90-A और निर्माण स्वीकृति: जेडीए से न तो जमीन का रूपांतरण कराया गया और न ही बिल्डिंग प्लान पास कराया गया ।
- फायर NOC गायब: नगर निगम से अनिवार्य फायर एनओसी (Fire N.O.C) नहीं ली गई है, जो वहां आने वालों की सुरक्षा के साथ बड़ा खिलवाड़ है ।
- प्रदूषण बोर्ड की अनदेखी: प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से न तो कोई लाइसेंस लिया गया और न ही पर्यावरण स्वीकृति ।
- CTE/CTO नहीं: संचालन के लिए जरूरी ‘कंसेंट टू एस्टेब्लिश’ और ‘कंसेंट टू ऑपरेट’ सर्टिफिकेट भी नहीं हैं ।
- आबकारी की अनुमति नहीं: शराब परोसने के लिए आबकारी विभाग से कोई स्थाई या अस्थाई स्वीकृति नहीं ली गई है ।
रात के अंधेरे में ‘लॉ एंड ऑर्डर’ का मखौल
कानून व्यवस्था (Law and Order) को ठेंगा दिखाते हुए इन फार्म हाउसों में देर रात तक शराब पार्टियां (Liquor Parties) आयोजित की जाती हैं । बिना प्रशासन की अनुमति के तेज आवाज में स्पीकर और डीजे बजते हैं । यह सब पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है, जो गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है ।
गोपनीय चिट्ठी से हुआ धमाका: एडवोकेट ने मुख्य सचिव को भेजा ‘सबूतों का पुलिंदा’


इस पूरे काले कारोबार का पर्दाफाश तब हुआ, जब दिनांक 20.01.2026 को एडवोकेट चन्द्रशेखर कच्छावा ने राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव को एक विस्तृत और तथ्यात्मक शिकायती पत्र भेजा ।एडवोकेट कच्छावा ने मुख्य सचिव से जयपुर संभाग और जेडीए क्षेत्राधिकार में चल रहे ऐसे सभी अवैध फार्म हाउसों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की अपील की है:
- सील और ध्वस्तीकरण: नियमों की अवहेलना करने वाले फार्म हाउसों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें सील किया जाए या ध्वस्त (Demolition) किया जाए ।
- विभागीय निर्देश: जेडीए, पुलिस, आबकारी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देशित किया जाए कि वे अपने स्तर पर इन संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करें ।
- पाबंद करें: अवैध रूप से पनप रहे समस्त फार्म हाउसों को चिन्हित कर नियमों की पालना सुनिश्चित करवाई जाए ।
अब देखना यह होगा कि क्या मुख्य सचिव के स्तर से इस “अवैध फार्म हाउस सिंडिकेट” पर बुलडोजर चलता है, या फिर रसूखदार मालिक अपनी ऊंची पहुंच से इस फाइल को भी ठंडे बस्ते में डलवा देंगे?
