बाड़मेर: राजस्थान के बाड़मेर जिले के गिरल गांव में राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (RSMML) की लिग्नाइट खदानों के खिलाफ श्रमिकों और किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले 25 दिनों से चल रहे इस धरने को अब शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी का खुला समर्थन मिल गया है। मंगलवार शाम धरना स्थल पर पहुंचे विधायक भाटी ने रात वहीं गुजारी और कंपनी तथा प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है।
स्थानीय लोगों और श्रमिकों का आरोप है कि RSMML और ठेकेदारों द्वारा नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
रोजगार की कमी: स्थानीय युवाओं और श्रमिकों, जो पिछले 20 साल से काम कर रहे हैं, उन्हें बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक नौकरी से निकाला जा रहा है।
असुरक्षित कार्यस्थल: खदान के चारों ओर उचित तारबंदी न होने के कारण जान-माल का खतरा बना हुआ है। दिन-रात माइनिंग कर रहे हैं और मलबे को सीधे खेतों में डंप कर रहे हैं, जिससे कृषि भूमि बर्बाद हो रही है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य पर असर: माइनिंग के कारण होने वाले प्रदूषण से स्थानीय लोगों की स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं और उनका जीवनकाल प्रभावित हो रहा है।
विधायक रविंद्र सिंह भाटी का बयान:“जब मैं टेबल पर बात करने आया तो नीचे 440 वॉट का वायर होगा, फिर धूजणी छूट जाएगी। आप लोगों ने मेरे लिए पसीना बहाया था, तब मैंने कहा था कि जरूरत पड़ेगी तो मैं मेरा खून भी बहा दूंगा।”
विधानसभा में झूठे आंकड़े पेश करने का आरोप
विधायक भाटी ने कंपनी और अधिकारियों पर विधानसभा में गलत तथ्य पेश करने का गंभीर आरोप लगाया है।
उन्होंने बताया कि विधानसभा में एक सवाल के जवाब में बताया गया था कि प्रभावित क्षेत्र में 52 हजार से 65 हजार पेड़-पौधे लगाए गए हैं।
जब अधिकारियों को मौके पर ले जाकर निरीक्षण किया गया, तो वहां एक भी नया पौधा नहीं मिला और अधिकारी सिर्फ बबूल के पेड़ों को दिखाकर इतिश्री करते नजर आए।
प्रशासन और कंपनी को अल्टीमेटम
भाटी ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि वे समय रहते इन तमाम चीजों को ठीक कर लें, अन्यथा स्थिति और अधिक बिगड़ने पर वे तैयार रहें। उन्होंने कहा कि 25-30 दिन पहले निकाले गए युवाओं को वापस काम पर लिया जाना चाहिए। RSMML जो कि राजस्थान सरकार का एक सार्वजनिक उपक्रम (PSU) है, को श्रमिकों की 8 घंटे की ड्यूटी, उचित वेतन, बोनस और स्थानीय युवाओं को रोजगार की मांगों का समाधान करना होगा।