-पूर्व मंत्री महेश जोशी के राज में OSD संजय अग्रवाल की सिंडिकेट का पर्दाफाश, पहले IEC में फर्जी तरीके से अपने चेचेरे भाईयों की फर्मों को करोड़ों रूपए के दिलाए काम, अब फर्जी भुगतान कराने के लिए ”इमोशनल ड्रामा”!
-डिजीटल वॉल पेंटिंग की जगह घटिया कागज और सनबोर्ड की जगह लकड़ी की तख्तियां लगाकर बनाए करोड़ों के फर्जी बिल!
-PMO, ED, CBI और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय (NJJM) में शिकायत के बाद रोका गया था भुगतान, अब भजनलाल सरकार पर डोरे डालने की कोशिश!
जयपुर। जल जीवन मिशन (JJM) में राजस्थान का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार और लूट का मामला सामने आया है। पेयजल आपूर्ति और जागरूकता के नाम पर मिलने वाले 3% सपोर्ट फंड (IEC गतिविधियों) में नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए करोड़ों रुपये का गबन किया गया। पूर्व PHED मंत्री महेश जोशी के कार्यकाल में उनके OSD संजय अग्रवाल और संजय बड़ाया की मिलीभगत से आउटडोर मीडिया फर्मों का एक ऐसा नेटवर्क खड़ा किया गया, जिसने फील्ड में बिना गुणवत्तापूर्ण काम किए फर्जी बिलों के जरिए जनता के करोड़ों रुपये साफ कर दिए।



- फर्जीवाड़े का खेल, बिना एप्रूवल अरबों का बजट स्वीकृत:-
जल जीवन मिशन के अंतर्गत वाटर क्वालिटी एवं जागरूकता (IEC) के लिए 3%सपोर्ट फंड में करोड़ों रूपए के कार्यादेश जारी किए गए थे। इन कार्यों में आउटडोर मीडिया फर्मों द्वारा जमकर फर्जीवाड़ा किया गया था।
JJM गाइडलाइन के क्लॉज 7.10 (इन-एडमिसिबल एक्सपेंसेज) के अनुसार, स्वीकृत लागत से अधिक का कोई भी व्यय अमान्य माना जाता है। इसके बावजूद, सक्षम स्तर से न तो एक्शन प्लान एप्रूव कराया गया और न ही नियमानुसार टेंडरों की एप्रूवल ली गई।
- आउटडोर मीडिया फर्मों का फील्ड में ‘घटिया’ काम और फर्जी बिल:-
आउटडोर मीडिया फर्मों ने फील्ड में जो फर्जीवाड़ा किया, उसने सरकारी मशीनरी की पोल खोल कर रख दी है:
-डिजीटल वॉल पेंटिंग में घोटाला: डिजीटल वॉल पेंटिंग के स्वीकृत 2.10 करोड़ के मूल बजट के बदले 20.83 करोड़ के वर्क ऑर्डर जारी किए गए। दीवारों पर गुणवत्तापूर्ण डिजीटल पेंटिंग की जगह घटिया क्वालिटी का पेपर चिपकाकर फर्जी बिल तैयार किए गए, जो पहली ही बारिश में उखड़ गए।
-सनबोर्ड व होर्डिंग्स घोटाला: 3mm मोटाई और नियत डेंसिटी वाले पक्के सनबोर्ड लगाने के बजाय बेहद घटिया लकड़ी की तख्तियां और निम्न स्तर के फ्लैक्स लगा दिए गए।
-बिना प्रावधान फ्लैक्स प्रिंटिंग: मूल बजट में फ्लैक्स प्रिंटिंग का कोई प्रावधान नहीं होने के बावजूद 3.16 करोड़ रुपये के गैर-स्वीकृत कार्यादेश जारी कर अपनी मनपसंद फर्मों को उपकृत किया गया।



- पूर्व PHED मंत्री महेश जोशी के OSD संजय अग्रवाल का दबाव और ‘फर्जी वेरिफिकेशन’:-
पूर्व PHED मंत्री महेश जोशी के कार्यकाल में OSD संजय अग्रवाल ही विभाग के अनधिकृत ‘सर्वेसर्वा’ बने हुए थे। आरोप है कि संजय अग्रवाल और उनके करीबियों ने मिलकर पूरा सिंडिकेट चलाया। संजय अग्रवाल ने फील्ड अधिकारियों (XEN/JEN) पर अनुचित दबाव बनाकर इन घटिया और फर्जी कार्यों का कागजों में “ओके” वेरिफिकेशन करवाया, ताकि बिल पास कराए जा सकें। टेंडर की शर्तों के अनुसार सामग्री की गारंटी 1 वर्ष की थी, लेकिन सप्लाई किया गया सामान कुछ ही दिनों में खराब हो गया।
- आधिकारिक शिकायतों का हवाला (Complaint References):-
इस पूरे मामले में PMO (प्रधानमंत्री कार्यालय), ED (प्रवर्तन निदेशालय), CBI (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो), CVC (केंद्रीय सतर्कता आयोग) और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (NJJM), नई दिल्ली में साक्ष्यों के साथ विस्तृत शिकायत दर्ज कराई गई थी।
शिकायत का मुख्य हवाला:
“जलदाय विभाग राजस्थान में भारत सरकार के वित्तीय सहयोग से चल रहे जल जीवन मिशन के सपोर्ट कार्यक्रम (IEC) में WSSO-SWSM निदेशक एवं उच्चाधिकारियों द्वारा मिलीभगत कर जल शक्ति मंत्रालय के सपोर्ट फंड (वाटर क्वालिटी बजट) को खुर्दबुर्द कर करोड़ों रुपये का गबन किया गया है। लैब अपग्रेडेशन और फील्ड टेस्ट किट (FTK) जैसे जनहित के कार्यों के फंड को डायवर्ट कर चहेती आउटडोर मीडिया फर्मों (जैसे मैसर्स एल्फेड ग्राफिक्स, मैसर्स रैनबो ऑफसेट, मैसर्स प्रीमियर प्रिंटिंग प्रेस, मैसर्स हाय-टेक डिजिटल आदि) को अनुचित लाभ पहुंचाया गया है। अतः इसकी उच्च स्तरीय विशेष जांच कराकर वसूली की जाए।”
शिकायतों और साक्ष्यों के सार्वजनिक होने के बाद PHED के आला अधिकारियों में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में इन फर्जी बिलों के भुगतानों पर रोक लगा दी गई।
- अब CM भजनलाल शर्मा के दरबार में ‘मार्मिक गुहार’:-
अब जब प्रदेश में सरकार बदल चुकी है, तो फर्जीवाड़ा करने वाली यही आउटडोर मीडिया फर्में और उनके आका षड़यंत्रपूर्वक मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दरबार में ‘मार्मिक गुहार’ लगाकर रुके हुए करोड़ों रुपये के फर्जी भुगतानों को जारी कराने का खेल रच रहे हैं।

‘Expose Now’ के तीखे सवाल:-
-क्या मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) इस पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच (CBI/SIT) कराएगा?
-क्या फर्जी वेरिफिकेशन करने वाले अधिकारियों और घटिया काम करने वाली फर्मों को ब्लैकलिस्ट कर रिकवरी की जाएगी?
-या फिर एक बार फिर ‘मार्मिक गुहार’ की आड़ में JJM के इस करोड़ों के फर्जीवाड़े का भुगतान कर दिया जाएगा?
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now
