Expose Now Mega Exclusive Investigation: सचिवालय फैन घोटाला, फर्जी टेस्ट रिपोर्ट पर टांगे गए 650 घटिया पंखे, घूसखोर नेक्सस ने दागी ठेकेदार को किया ‘फर्स्ट क्लास’ अपग्रेड

-MSME मुंबई की जाली रिपोर्ट लगाकर PWD ने सचिवालय में कराई घटिया माल की सप्लाई, श्रीराम लैब की जांच में आधे पंखे फेल, चीफ इंजीनियर अमित कक्कड़ 13 महीने तक दबाए रहे फाइल

-ब्लैकलिस्ट करने के बजाय दागी फर्म को IIIrd से सीधे Ist कैटेगरी में किया प्रमोट, PWD जो लाइसेंस जारी ही नहीं करता, उसे ‘प्राप्त’ बताकर सरकारी रिकॉर्ड में की हेराफेरी

जयपुर। राजस्थान के सबसे हाई-प्रोफाइल और VIP जोन ‘शासन सचिवालय’ की सुरक्षा को ताक पर रखकर सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले एक बहुत बड़े नेक्सस का ‘Expose Now’ ने पर्दाफाश किया है। सार्वजनिक निर्माण विभाग के इलेक्ट्रिकल विंग और एक चहेते ठेकेदार के बीच चल रहे इस खेल के वो सनसनीखेज दस्तावेज हमारे हाथ लगे हैं, जो सीधे तौर पर बड़े भ्रष्टाचार और जालसाजी की गवाही दे रहे हैं।

हमारी खोजी टीम को मिले आधिकारिक सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, सचिवालय में पूर्व में हुई आग की घटनाओं के बाद भारी-भरकम ‘हैवी ड्यूटी एयर सर्कुलेशन फैन’ लगाने का जिम्मा मैसर्स राधा गोविन्द इलेक्ट्रिकल्स को दिया गया था। इस फर्म ने सचिवालय में करीब 650 सर्कुलेटर वॉल माउंटेड पंखे सप्लाई किए, लेकिन मुनाफे के चक्कर में जो कागजी खेल खेला गया, उसने पूरे सिस्टम को हिलाकर रख दिया है।

राजस्थान सचिवालय

MSME के नाम पर लगाई गई फर्जी टेस्ट रिपोर्ट:_

ठेकेदार ने पंखों की गुणवत्ता साबित करने के लिए MSME टेस्टिंग सेंटर (WR), मुंबई के नाम से जारी टेस्ट रिपोर्ट्स विभाग में जमा कराई थीं। ‘Expose Now’ की पड़ताल के अनुसार, जब अधिशासी अभियंता ने इन रिपोर्ट्स की सत्यता जांचने के लिए मुंबई पत्राचार किया, तो 27 सितंबर 2024 को MSME सेंटर ने लिखित में जो खुलासा किया वह चौंकाने वाला था। MSME ने साफ तौर पर कहा कि “ये टेस्ट रिपोर्ट्स पूरी तरह जाली (Forged) हैं और हमारी प्रयोगशाला द्वारा कभी जारी ही नहीं की गई हैं।”

श्रीराम इंस्टीट्यूट की जांच में 50% पंखे फेल, फिर भी क्यों मेहरबान रहे चीफ इंजीनियर:-

नियमों के तहत फर्जीवाड़ा पकड़े जाते ही फर्म पर कानूनी कार्रवाई और FIR होनी चाहिए थी, लेकिन PWD के मुख्य अभियंता (विद्युत) अमित कक्कड़ ने पूरे मामले को रफा-दफा करने का खेल शुरू कर दिया। उन्होंने कुल सप्लाई का महज 1% न्यूनतम सैंपल जांच के लिए देश की प्रतिष्ठित ‘श्रीराम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल रिसर्च, नई दिल्ली’ भेजा। ‘Expose Now’ के हाथ लगी उस जांच रिपोर्ट के मुताबिक, 50 प्रतिशत पंखे टेस्ट में पूरी तरह फेल पाए गए। घटिया माल की बात साबित होने के बावजूद चीफ इंजीनियर ने आज तक न तो इन पंखों को जब्त होने दिया और न ही बदलने दिया।

मेहरबानी ऐसी की सजा की जगह सीधे ‘फर्स्ट क्लास’ में प्रमोशन:-

हमारी इन्वेस्टिगेशन में जो सबसे शर्मनाक और हैरान करने वाला तथ्य सामने आया है, वो यह कि 25 अगस्त 2025 को अतिरिक्त मुख्य अभियंता (इलेक्ट्रिकल) ने ई-फाइल पर ठेकेदार के खिलाफ FIR दर्ज करने और ब्लैकलिस्ट करने की कड़ी सिफारिश मुख्य अभियंता अमित कक्कड़ को भेजी थी। लेकिन कक्कड़ ने पिछले 13 महीनों से बार-बार फाइल पर अप्रासंगिक और औपचारिक आपत्तियां लगाकर दंडात्मक निर्णय को जानबूझकर टाले रखा। हद तो तब हो गई जब धोखाधड़ी करने वाले इस ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने के बजाय उसे पुरस्कृत कर दिया गया। मुख्य अभियंता ने विभाग के उच्चाधिकारियों को गुमराह कर इस IIIrd कैटेगरी की फर्म को सीधे Ist कैटेगरी (फर्स्ट क्लास) में अपग्रेड करवा दिया। इसके लिए फाइल पर बकायदा झूठ लिखा गया कि ‘फर्म से PWD का इलेक्ट्रिकल लाइसेंस प्राप्त हो गया है’, जबकि हकीकत यह है कि PWD ऐसा कोई लाइसेंस कभी जारी ही नहीं करता है! नियमानुसार यह अपग्रेडेशन सिर्फ 2nd कैटेगरी तक ही हो सकता था।

सचिवालय खंड कांट्रैक्ट निरस्त करने पर अड़ा, तो बचाने के लिए रची गई नई ‘कमेटी’ की साजिश:-

मामला जब तूल पकड़ने लगा तो अधिशासी अभियंता (सचिवालय खंड) ने अनुबंध संख्या 80/2023-24 के तहत सत्यनिष्ठा संहिता और RTPP Act 2012 के उल्लंघन में इस फर्म का अनुबंध निरस्त कर दिया। लेकिन अपने चहेते ठेकेदार को बचाने के लिए मुख्य अभियंता कक्कड़ ने एक 6 सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया ताकि अपने मनमाफिक क्लीनचिट रिपोर्ट तैयार कराई जा सके। हालांकि, कमेटी के सभी सदस्यों ने एकमत होकर इस दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया और लिखित में दिया कि वे इस विषय पर निर्णय लेने में सक्षम नहीं हैं।

इन्वेस्टिगेशन में सामने आई चीफ इंजीनियर की ‘फिक्स स्ट्रेटेजी’:-

‘Expose Now’ की इन-डेप्थ पड़ताल में मुख्य अभियंता की एक खास कार्यप्रणाली (Strategy) सामने आई है। सूत्रों और विभागीय कार्यशैली के मुताबिक, जब अमित कक्कड़ के सारे प्रशासनिक हथकंडे फेल हो जाते हैं, तो वे ठेकेदार के जरिए कोर्ट में स्टे एप्लीकेशन डलवाते हैं। कोर्ट से स्टे नहीं मिलने पर बड़ी होशियारी से वकील के माध्यम से मुख्य अभियंता के समक्ष ‘रिप्रेजेंटेशन’ (प्रस्तुतीकरण) देने का ऑर्डर करवा लिया जाता है। इसके बाद चीफ इंजीनियर की हैसियत से सारे कायदे-कानूनों को ताक पर रखकर अपने चहेते ठेकेदारों के पक्ष में फैसला सुना दिया जाता है, क्योंकि इन ठेकेदारों के साथ इनकी कथित तौर पर ‘Unofficial पार्टनरशिप’ काम कर रही होती है।

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now


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