जोधपुर, जोधपुर के एक निजी अस्पताल में चिकित्सा लापरवाही का एक झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे चिकित्सा महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फलोदी जिले के कलाऊ गांव निवासी संतोष पुरी की अस्पताल में इलाज के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। कृषि कार्य के दौरान उंगली में लगी मामूली चोट का इलाज कराने आए एक स्वस्थ व्यक्ति की अचानक मौत ने अस्पताल प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

घटना का विवरण:
मृतक संतोष पुरी खेती-किसानी से जुड़े थे और अपने कृषि कार्य के दौरान उनकी उंगली में हल्की चोट लगी थी। वे इलाज के लिए जोधपुर के निजी अस्पताल पहुंचे थे। उनके भतीजे राहुल ने बताया कि संतोष पुरी पूरी तरह स्वस्थ थे और फलोदी से जोधपुर तक का लगभग 120 किलोमीटर का सफर तय करके आए थे। यहां तक कि अस्पताल पहुंचने के बाद उन्होंने खुद पंजीकरण कराया और बिना किसी सहारे के एक्स-रे व ब्लड टेस्ट भी करवाया।

इंजेक्शन के बाद बिगड़ी तबीयत:
अस्पताल के डॉक्टरों ने इसे एक ‘नॉर्मल’ केस बताकर छोटे ऑपरेशन की सलाह दी और करीब 10,000 से 12,000 रुपये का खर्चा बताया। सहमति के बाद उन्हें ऑपरेशन थिएटर (OT) में शिफ्ट कर दिया गया। इसी बीच, परिजनों को दवाइयां लेने बाहर भेजा गया। आरोप है कि ओटी में मरीज को इंजेक्शन लगाए जाने के महज 15 से 20 मिनट के भीतर उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और कुछ ही समय बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
सीसीटीवी फुटेज मिटाने का आरोप:
मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही और सबूत मिटाने का आरोप लगाया है। जब परिजनों ने घटनाक्रम को समझने के लिए सीसीटीवी फुटेज की मांग की, तो प्रबंधन ने यह कहते हुए मना कर दिया कि कैमरे केवल लाइव दिख रहे थे, उनकी रिकॉर्डिंग नहीं हो रही थी। परिजनों को अंदेशा है कि अस्पताल प्रबंधन ने अपनी गलती छिपाने के लिए सीसीटीवी डीवीआर (DVR) से छेड़छाड़ की है।
परिजनों की मांग:
घटना के बाद से अस्पताल परिसर में भारी आक्रोश है। कलाऊ गांव और गोस्वामी समाज के सैकड़ों लोग अस्पताल के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। पीड़ित परिवार ने मांग की है कि:
- दोषी डॉक्टरों और स्टाफ के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी हो।
- सीसीटीवी डीवीआर की निष्पक्ष तकनीकी और फॉरेंसिक जांच की जाए।
- शव का पोस्टमार्टम मेडिकल बोर्ड द्वारा वीडियोग्राफी के साथ कराया जाए।
