राजस्थान का पांचना जल संकट गहराया, 74 गांवों के बीच फंसी सरकार; बैठक में हंगामे के बाद नहीं निकला हल

जयपुर। राजस्थान के करौली जिले में स्थित पांचना बांध के पानी को लेकर चला आ रहा दो दशक पुराना विवाद सुलझने के बजाय और उलझ गया है। मंगलवार को जयपुर के शिक्षा संकुल स्थित माधव सभागार में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। बैठक में सरकार की ओर से कैबिनेट मंत्री किरोड़ीलाल मीणा, जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम शामिल हुए थे, लेकिन दोनों पक्षों के किसानों के बीच बनी गतिरोध की स्थिति ने बैठक को बेनतीजा खत्म कर दिया।

क्या है 74 गांवों का पूरा विवाद?

पांचना बांध का यह विवाद मुख्य रूप से दो गुटों में बंटा है:

  • कमांड एरिया के 35 गांव: यहाँ के किसान राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेशों का हवाला देते हुए नहरों में तत्काल पानी छोड़ने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि फसलों की सिंचाई के लिए उन्हें पानी की सख्त जरूरत है।
  • डूब क्षेत्र के 39 गांव: इन गांवों के ग्रामीण बांध के पानी को नहरों में छोड़े जाने का कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि बांध के निर्माण के लिए उनकी उपजाऊ जमीनें ली गई थीं, लेकिन उन्हें सिंचाई का लाभ नहीं मिला। वे अपनी मांगों के पूरा होने तक पानी छोड़ने के खिलाफ हैं।

बैठक में क्यों बनी तनातनी?

बैठक के दौरान पानी की टेस्टिंग और अन्य तकनीकी बिंदुओं पर चर्चा सकारात्मक रही, लेकिन जैसे ही लिखित समझौते के ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने की बारी आई, दोनों पक्ष आमने-सामने हो गए। कमांड एरिया के किसान इस बात से नाराज दिखे कि मुख्यमंत्री स्तर पर मिले आश्वासनों के बावजूद पानी की समस्या का हल नहीं निकल रहा है। स्थिति तब बिगड़ गई जब कमांड एरिया के किसान बीच बैठक से उठकर बाहर चले गए। इसके तुरंत बाद कैबिनेट मंत्री किरोड़ीलाल मीणा भी बैठक से नाराज होकर बाहर निकल आए।

मंत्रियों ने क्या कहा?

जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने इसे ‘विवाद’ के बजाय ‘आपसी संवाद’ बताया। उन्होंने कहा कि 20 साल पुराने मसले को एक ही बार में सुलझाना चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि करीब 8-10 बिंदुओं पर चर्चा हुई है और अधिकतर पर सहमति बन गई है। जो तकनीकी मतभेद बचे हैं, उन्हें अगले 7 दिनों में होने वाली बैठक में सुलझा लिया जाएगा।

फिलहाल, इस बैठक के बेनतीजा रहने से पूर्वी राजस्थान के इन 74 गांवों के किसानों में मायूसी है और जल संकट का समाधान अभी भी भविष्य के गर्भ में है।


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