जोधपुर में खाकी पर बड़ा दाग: महिलाओं को रातभर अवैध हिरासत में रखने और सबूत मिटाने के आरोप में पूर्व एसएचओ और महिला एसआई पर सीबीआई का केस दर्ज

जोधपुर। राजस्थान के जोधपुर में पुलिस जवाबदेही और मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने जोधपुर के एक पुलिस थाने के पूर्व थानाधिकारी (SHO), एक महिला उप-निरीक्षक (SI) और कई अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया है। इन पुलिस अधिकारियों पर युवा महिलाओं को रातभर अवैध रूप से थाने में बंधक बनाने, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और सीसीटीवी फुटेज सहित संवेदनशील वीडियो डिलीट कर सबूत मिटाने के बेहद गंभीर आरोप हैं।

यह बड़ी कार्रवाई राजस्थान हाईकोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद की गई है। हाईकोर्ट ने साल 2025 में हुई इस पुलिस छापेमारी के दौरान पुलिसकर्मियों के आचरण पर उठे गंभीर सवालों को देखते हुए जांच राज्य पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया था। सूत्रों के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल मामले की कमान सीबीआई के पुलिस उपाधीक्षक (DSP) गौरव सिंह को सौंपी गई है, और केंद्रीय एजेंसी ने मामले की विस्तृत तफ्तीश भी शुरू कर दी है।

क्या है पूरा विवाद और पुलिस अधिकारियों पर लगे आरोप?

यह पूरा विवाद जनवरी 2025 में जोधपुर के कुड़ी भगतासनी थाना पुलिस द्वारा सेक्टर-9 स्थित एक मकान पर की गई छापेमारी (Raid) से जुड़ा हुआ है। उस समय पुलिस ने दावा किया था कि इस परिसर से एक अवैध फर्जी कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था, जो वाहन सेवाओं के नाम पर लोगों से ऑनलाइन ठगी करता था।

इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दो युवकों और दस युवतियों सहित कुल 12 लोगों को हिरासत में लिया था। हालांकि, बाद में इस मामले में बेहद चौंकाने वाले आरोप सामने आए:

  • अवैध हिरासत: शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बिना किसी औपचारिक एफआईआर (FIR) के कई युवतियों को रातभर जबरन पुलिस थाने के अंदर बंद रखा गया।
  • फर्जी दस्तावेज और साक्ष्य मिटाना: यह भी आरोप लगाया गया कि इस अवैध हिरासत को कानूनी रूप से सही ठहराने के लिए पुलिसकर्मियों ने बाद में फर्जी और मनगढ़ंत दस्तावेज तैयार किए। इतना ही नहीं, अपनी पोल खुलने के डर से पुलिस अधिकारियों ने थाने के सीसीटीवी फुटेज और अन्य संवेदनशील डिजिटल सबूतों को जानबूझकर डिलीट कर दिया ताकि तथ्यों को दबाया जा सके।

हाईकोर्ट का कड़ा रुख और सीबीआई को जांच के आदेश

हिरासत में ली गई कुछ महिलाओं द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ लगे आरोपों को बेहद गंभीरता से लिया। पुलिसिया तंत्र द्वारा शक्तियों के दुरुपयोग और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की संवेदनशीलता को देखते हुए, हाईकोर्ट ने 8 मई 2026 को इस पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच केंद्रीय एजेंसी (CBI) से कराने का ऐतिहासिक आदेश सुनाया।

हाईकोर्ट के इसी रुख के आधार पर, सीबीआई ने अब तत्कालीन एसएचओ, महिला सब-इंस्पेक्टर और अन्य अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस डायरी दर्ज कर ली है।

इन गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानून की कई सख्त धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • आपराधिक साजिश रचना (Criminal Conspiracy)
  • जालसाजी और फर्जी दस्तावेज तैयार करना (Fraud and Fabrication of Documents)
  • महत्वपूर्ण सबूतों को नष्ट करना (Destruction of Evidence)
  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के तहत डिजिटल साक्ष्यों से छेड़छाड़ की धाराएं

आगामी दिनों में सीबीआई की टीम कुड़ी भगतासनी थाने के पुराने पुलिस रिकॉर्ड्स, डिलीट किए गए सीसीटीवी फुटेज को रिकवर करने की तकनीकी संभावनाओं, डिजिटल साक्ष्यों और इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े पीड़ितों व आरोपी अधिकारियों के बयान दर्ज करेगी।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में मचा हड़कंप

जोधपुर पुलिस के खिलाफ सीबीआई की इस बड़ी एंट्री से राजस्थान के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला राज्य में पुलिस सुधारों, पारदर्शिता और कस्टोडियल आचरण (हिरासत के दौरान पुलिस के व्यवहार) के लिए एक बड़ा लिटमस टेस्ट साबित होगा। दूसरी ओर, विपक्षी दल भी पुलिस शक्तियों के दुरुपयोग और सबूतों को मिटाने के इस गंभीर मुद्दे पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में हैं।

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