जयपुर। राजस्थान सहित पूरे देश के करोड़ों प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PM Ujjwala Yojana) गैस उपभोक्ताओं के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश की सभी प्रमुख तेल कंपनियों को निर्देश जारी किए हैं कि अब उज्ज्वला गैस कनेक्शन धारकों को हर साल कम से कम एक बार अपना आधार आधारित बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन (E-KYC) करवाना अनिवार्य होगा।
यदि कोई उपभोक्ता निर्धारित समय सीमा के भीतर यह प्रक्रिया पूरी नहीं करता है, तो उसे गैस सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी से हाथ धोना पड़ेगा। सरकार के इस सख्त फैसले का असर अकेले राजस्थान के करीब 73 लाख उज्ज्वला उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, जिसके चलते अब गैस एजेंसियों पर भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।
8वीं रिफिल से पहले जरूरी होगा वेरिफिकेशन (नया नियम)
मंत्रालय द्वारा जारी नई गाइडलाइंस (LPG Subsidy New Rules 2026) के अनुसार, यदि कोई उज्ज्वला उपभोक्ता साल में 7 गैस रिफिल ले चुका है और वह 8वीं रिफिल बुक करता है, तो उससे पहले उसका बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन होना अनिवार्य होगा।
ध्यान दें: यदि उपभोक्ता वेरिफिकेशन नहीं करवाता है, तो उसकी गैस बुकिंग तो हो जाएगी और उसे सिलेंडर भी मिल जाएगा, लेकिन उस सिलेंडर पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी की राशि उसके बैंक खाते में ट्रांसफर नहीं की जाएगी।
वर्तमान में केंद्र सरकार उज्ज्वला योजना के तहत लाभार्थियों को एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 9 सिलेंडरों तक सब्सिडी का फायदा देती है।
राजस्थान में 73 लाख उपभोक्ता होंगे प्रभावित
इस नए फैसले का सीधा असर ग्रामीण भारत पर पड़ेगा। अकेले राजस्थान की बात करें तो इंडियन ऑयल (Indane), भारत पेट्रोलियम (Bharat Gas) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HP Gas) कंपनियों के करीब 73 लाख उज्ज्वला गैस कनेक्शन धारी हैं। इन सभी को केंद्र सरकार की ओर से प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के जरिए गैस सिलेंडर पर सब्सिडी दी जाती है। केवाईसी अधूरी रहने पर इन लाखों परिवारों का पारिवारिक बजट सीधे तौर पर प्रभावित होगा।
डेडलाइन: 30 जून तक का दिया गया अल्टीमेटम
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन उज्ज्वला उपभोक्ताओं ने गैस कनेक्शन लेने के बाद से अब तक एक बार भी अपना आधार आधारित बायोमेट्रिक केवाईसी नहीं करवाया है, उन्हें 30 जून 2026 तक हर हाल में यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी। यदि 30 जून तक ई-केवाईसी नहीं कराई गई, तो जुलाई महीने से मिलने वाली सब्सिडी तुरंत प्रभाव से रोक दी जाएगी।
क्यों पड़ी इस नए नियम की जरूरत? (सरकार का तर्क)
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य लीकेज को रोकना और वास्तविक लाभार्थियों तक फायदा पहुंचाना है।
- फर्जी कनेक्शन की पहचान: लंबे समय से केवाईसी अपडेट न होने के कारण सिस्टम में कई ऐसे कनेक्शन चल रहे हैं जिनके उपभोक्ता या तो दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं, या उनकी मृत्यु हो चुकी है।
- कालाबाजारी पर रोक: कई मामलों में बिचौलिए मृतक या पलायन कर चुके लोगों के नाम पर सब्सिडी वाला सिलेंडर उठाकर उसे कमर्शियल मार्केट में बेच रहे हैं।
- सटीक डेटाबेस: वार्षिक बायोमेट्रिक से सरकार के पास लाभार्थियों का एकदम नया और 100% सटीक डेटाबेस तैयार होगा।
महिलाओं और बुजुर्गों की बढ़ सकती है परेशानी
उज्ज्वला योजना का मूल उद्देश्य ग्रामीण और गरीब परिवारों की महिलाओं को धुएं से मुक्ति दिलाना था। लेकिन इस नई शर्त से उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में गैस एजेंसियां गांवों से कई किलोमीटर दूर होती हैं। ऐसे में बुजुर्गों और महिलाओं को हर साल बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठा लगाने के लिए अपना समय और पैसा खर्च कर शहर आना पड़ेगा।
क्या करें उपभोक्ता?
तेल कंपनियों ने सभी उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि अंतिम समय की भीड़ और सर्वर डाउन जैसी परेशानियों से बचने के लिए वे जल्द से जल्द अपनी पासबुक और आधार कार्ड लेकर नजदीकी गैस एजेंसी पर जाएं और अपना बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन पूरा कर लें।