मई महीने की रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और चिलचिलाती धूप ने न सिर्फ हमारे डेली रूटीन को प्रभावित किया है, बल्कि हमारी सेहत पर भी दोहरा प्रहार करना शुरू कर दिया है। इस भीषण गर्मी के बीच अस्पतालों में मौसमी बीमारियों और वायरल संक्रमण (Viral Infection) के मामले अप्रत्याशित रूप से बढ़ गए हैं। स्थिति यह है कि जिला अस्पतालों के मेडिसिन और बाल रोग विभाग (Pediatrics Department) में हर रोज 700 से अधिक मरीज केवल धूप, लू और डिहाइड्रेशन से पैदा हुई बीमारियों के कारण पहुंच रहे हैं।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, यह मौसम अपने साथ कई तरह के ‘समर इन्फेक्शन’ लेकर आ रहा है। तेज धूप और पसीने के कारण जहाँ वयस्कों में स्किन एलर्जी और दाने निकलने की समस्याएं बढ़ी हैं, वहीं बच्चों में उल्टी-दस्त, वायरल डायरिया और तेज बुखार के लक्षण तेजी से फैल रहे हैं।
गर्मी में बच्चों को अपनी चपेट में ले रहे हैं ये 4 मुख्य लक्षण
इस मौसम में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कमजोर हो जाती है, जिससे वे बहुत जल्दी इंफेक्शन का शिकार हो रहे हैं। अस्पताल पहुंचने वाले बच्चों में ये लक्षण सबसे आम हैं:
- उल्टी-दस्त (वायरल डायरिया): यह इस मौसम की सबसे आम और खतरनाक समस्या है। अक्सर बाहर के खुले या दूषित भोजन और अनहेल्दी पानी के सेवन से बैक्टीरिया पेट में चले जाते हैं, जिससे बच्चों का पेट खराब हो जाता है।
- अचानक तेज बुखार आना: धूप में खेलने या शरीर का तापमान अचानक बढ़ने से बच्चों को तेज बुखार आ रहा है, जो शरीर में छिपे किसी वायरल इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है।
- सर्दी, खांसी और निमोनिया: देखने में यह सामान्य सर्दी-जुकाम लगता है, लेकिन इस मौसम में यह गंभीर श्वसन तंत्र संक्रमण (Respiratory Infection) या निमोनिया का रूप ले लेता है।
- त्वचा पर दाने और एलर्जी (Skin Rashes): तेज धूप, उमस और अत्यधिक पसीने के कारण शरीर पर बारीक लाल दाने और खुजली की समस्या वयस्कों और बच्चों दोनों में समान रूप से देखी जा रही है।
गर्मी की बीमारियों से बचने के लिए एक्सपर्ट्स के बेहतरीन ‘लाइफस्टाइल टिप्स’
बस्ती जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. खालिद रिजवान अहमद और डॉ. पंकज शुक्ल ने बदलते मौसम में स्वस्थ रहने के लिए कुछ बेहद जरूरी लाइफस्टाइल टिप्स साझा किए हैं:
1. ‘हाइड्रेशन’ को बनाएं अपनी प्राथमिकता दिनभर शरीर में पानी की कमी न होने दें। बच्चों को हर थोड़ी-थोड़ी देर में पानी, नींबू-पानी, ओआरएस (ORS) का घोल, छाछ या नारियल पानी देते रहें।
2. खान-पान में बरतें सख्त सावधानी गर्मी के दिनों में खाना बहुत जल्दी खराब होता है। इसलिए हमेशा ताजा बना हुआ भोजन ही करें। बासी खाना, कटे हुए खुले फल और बाहर के बर्फ वाले जूस या गंदे पानी के सेवन से पूरी तरह बचें।
3. पीक ऑवर्स में बाहर निकलने से बचें सुबह 11 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक जब धूप सबसे तेज होती है, बच्चों को घर के अंदर ही रखने का प्रयास करें। यदि बाहर जाना बहुत जरूरी हो, तो सूती और ढीले कपड़े पहनें, सिर को टोपी या सूती कपड़े से ढकें और सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें।
4. तापमान के अचानक बदलाव से बचें (A.C. से सीधे धूप में न जाएं) अक्सर लोग एकदम ठंडे एसी (Air Conditioner) वाले कमरे से निकलकर सीधे कड़कड़ाती धूप में चले जाते हैं। तापमान का यह अचानक उतार-चढ़ाव (Thermal Shock) शरीर की इम्युनिटी को गिरा देता है और व्यक्ति तुरंत वायरल की चपेट में आ जाता है।
प्रशासनिक सतर्कता: अस्पतालों में बढ़ाई गईं सुविधाएं
मरीजों और खासकर गंभीर स्थिति में आने वाले बच्चों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने पूरी मुस्तैदी दिखाई है। जिला अस्पतालों के चिल्ड्रेन वार्ड और पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (PICU) में बेड और जीवन रक्षक दवाओं की सुविधाएं बढ़ा दी गई हैं। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को समय पर ओपीडी में बैठने और मरीजों की जांचें तुरंत सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।