-25 सूत्री मांगों को लेकर 20 मई से गूंजेगा महासंघ (एकीकृत) का ऐतिहासिक शंखनाद
जयपुर। राज्य सरकार द्वारा कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों पर अपनाए जा रहे उपेक्षापूर्ण रवैये के खिलाफ अब कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा है। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) ने सरकार के खिलाफ आर-पार की जंग का एलान कर दिया है। सोमवार को राजधानी जयपुर के गवर्नमेंट प्रेस कार्यालय में आयोजित एक आपातकालीन प्रदेश स्तरीय महाबैठक में सरकार की “कर्मचारी विरोधी” नीतियों के खिलाफ व्यापक आंदोलन की रणनीति तैयार की गई।
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अब कर्मचारियों के सब्र का बांध टूट चुका है, और सरकार को केवल आश्वासनों से काम नहीं चलाने दिया जाएगा।

चिकित्सा मंत्री के बयान से भड़का आक्रोश:-
बैठक में विशेष रूप से राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) को निजी बीमा कंपनी को सौंपने के चिकित्सा मंत्री के बयान पर कर्मचारियों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। महासंघ की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
-आरजीएचएस (RGHS) की बहाली: स्कीम को किसी निजी बीमा कंपनी को न सौंपकर पूर्व की भांति सभी अनुमोदित अस्पतालों में ओपीडी (OPD), आईपीडी (IPD) और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

-समर्पित अवकाश (Surrender Leave): रोके गए समर्पित अवकाश का भुगतान तुरंत जारी किया जाए।
-पदोन्नति में छूट: बजट घोषणा के अनुरूप पदोन्नति में अनुभव एवं सेवा अवधि में 2 वर्ष की शिथिलता दी जाए।
-नियमितीकरण: संविदा और ठेका कर्मचारियों को अविलंब नियमित किया जाए।
-25 सूत्री मांगपत्र: लंबे समय से लंबित संवेदनशील वित्तीय लाभों और अन्य 25 सूत्री मांगों को तुरंत लागू किया जाए।
आंदोलन का पूरा शेड्यूल: कल से शुरुआत, 25 मई से महा-बहिष्कार
महासंघ (एकीकृत) ने सरकार को जगाने के लिए चरणबद्ध आंदोलन का पूरा खाका तैयार कर लिया है:
-19 मई को महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में मुख्यमंत्री के नाम मुख्य सचिव को अंतिम चेतावनी ज्ञापन सौंपा जाएगा।
-20 मई से प्रदेश के सभी जिलों में मोर्चा खोलते हुए जिला अध्यक्षों द्वारा कलेक्टर, विभागाध्यक्षों (HOD) और कार्यालय अध्यक्षों के माध्यम से मुख्यमंत्री को चेतावनी ज्ञापन भेजे जाएंगे।
-25 से 30 मई पूरे राजस्थान के कर्मचारी हर दिन दोपहर 12:30 बजे से 1:30 बजे तक पूर्ण रूप से कार्य का बहिष्कार करेंगे।
बड़ी चेतावनी: महासंघ ने स्पष्ट किया है कि यदि इस ऐतिहासिक कार्य बहिष्कार के बाद भी सरकार की दमनकारी नीतियां नहीं बदलीं, तो पूरे प्रदेश में प्रचंड ‘कर्मचारी जागृति यात्रा’ निकालकर एक बड़ा और बेमियादी आंदोलन शुरू किया जाएगा।

दिग्गजों ने भरी हुंकार, एकजुटता का कराया अहसास
इस आक्रोश बैठक को प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ सहित कुलदीप यादव, विनोद सिद्धा, शेर सिंह यादव, देवेंद्र सिंह नरूका, राजेन्द्र शर्मा, अजयवीर सिंह, ओमप्रकाश चौधरी, सुरेश चंद शर्मा और प्रदेशभर से आए सभी जिला अध्यक्षों व वरिष्ठ कर्मचारी नेताओं ने संबोधित किया। सभी नेताओं ने एक सुर में संगठन की एकजुटता का अहसास कराते हुए साफ कर दिया कि इस बार कर्मचारी अपने हक के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

अब गेंद सरकार के पाले में है, देखना यह है कि 20 मई से शुरू होने वाले इस चक्रव्यूह से सरकार कैसे निपटती है या फिर कर्मचारियों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
Expose Now ब्यूरो रिपोर्ट, जयपुर।