15,600 करोड़ की राजस्थान रॉयल्स डील पर विवाद: मित्तल-पूनवल्ला के अधिग्रहण पर सोमानी ग्रुप ने उठाए सवाल

जयपुर: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की फ्रेंचाइजी राजस्थान रॉयल्स (Rajasthan Royals) को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में दिग्गज उद्योगपति लक्ष्मी निवास मित्तल और उनके परिवार तथा अदार पूनावाला द्वारा राजस्थान रॉयल्स की 93% हिस्सेदारी खरीदने की घोषणा के बाद, अमेरिकी कारोबारी काल सोमानी के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम ने इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सोमानी ग्रुप का आरोप है कि उन्हें नीलामी प्रक्रिया से बाहर करने का निर्णय निष्पक्ष नहीं था और उन्हें समान अवसर (Level playing field) नहीं दिया गया।

क्या है पूरा मामला?

मार्च में, काल सोमानी के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम ने राजस्थान रॉयल्स में 1.63 बिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 15,600 करोड़ रुपये) में हिस्सेदारी खरीदने पर सहमति व्यक्त की थी। यह डील आईपीएल 2026 के बाद पूरी होने की उम्मीद थी। लेकिन, रविवार को लक्ष्मी एन. मित्तल और आदित्य मित्तल ने घोषणा की कि उन्होंने मनोज बडाले और अदार पूनावाला के साथ साझेदारी में राजस्थान रॉयल्स को खरीदने के लिए एक पक्का समझौता कर लिया है।

“यह नतीजा हैरान करने वाला और निराशाजनक दोनों है, लेकिन हम इस अनुभव को एक बड़ी यात्रा का हिस्सा मानते हैं।” – काल सोमानी कंसोर्टियम का बयान

काल सोमानी ग्रुप के दावे और आरोप

सोमानी ग्रुप (जिसमें वॉलमार्ट और फोर्ड ग्रुप के निवेशक भी शामिल हैं) ने मंगलवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपनी गहरी निराशा व्यक्त की है। ग्रुप द्वारा उठाए गए मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • पूरी फंडिंग थी मौजूद: मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि सोमानी ग्रुप को फंडिंग की दिक्कत का सामना करना पड़ा। इस पर कंसोर्टियम ने स्पष्ट किया कि उनके पास हमेशा पर्याप्त फंडिंग थी और वे डील क्लोज करने के लिए पूरी तरह तैयार थे।
  • बिड वापस नहीं ली: कंसोर्टियम का कहना है कि उन्होंने अपनी बिड कभी वापस नहीं ली और वे पिछले छह महीनों से इस रेस में सबसे आगे थे।
  • पारदर्शिता की कमी: ग्रुप का आरोप है कि उन्हें आखिरी समय पर दरकिनार कर दिया गया, जिससे नीलामी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
  • समान अवसर नहीं मिला: सोमानी ग्रुप ने कहा है कि उनकी बिड की ताकत और डील को पूरा करने की उनकी तैयारी को आखिरी फैसले के साथ मिलाना मुश्किल है और उन्हें प्रक्रिया के दौरान उचित मौका नहीं मिला।

नई डील और स्वामित्व का ढांचा

नए समझौते के अनुसार, राजस्थान रॉयल्स की 93% हिस्सेदारी करीब 1.65 बिलियन डॉलर (लगभग 15,600 करोड़ रुपये) में तय हुई है। स्वामित्व का नया ढांचा इस प्रकार रहेगा:

  • मित्तल परिवार: लगभग 75% हिस्सेदारी
  • अदार पूनावाला: लगभग 18% हिस्सेदारी
  • मौजूदा निवेशक (मनोज बडाले और अन्य): 7% हिस्सेदारी

इस बड़े बदलाव के बाद, राजस्थान रॉयल्स आईपीएल की सबसे महंगी टीमों की सूची में शामिल हो गई है। टीम के नए बोर्ड में लक्ष्मी मित्तल, आदित्य मित्तल, वनीषा मित्तल-भाटिया, अदार पूनावाला और मनोज बडाले शामिल होंगे।

भविष्य की योजनाएं

कंसोर्टियम के सदस्यों— काल सोमानी, रॉब, जॉर्डन वॉल्टन और माइकल हैम्प ने कहा है कि वे इस परिणाम से निराश जरूर हैं, लेकिन वे खेल के वैश्विक विकास में अपना भरोसा बनाए रखेंगे। उन्होंने कहा कि वे अपनी पूंजी और विशेषज्ञता का उपयोग भविष्य के अन्य मौकों में करेंगे।

Share This Article
Leave a Comment