करौली: राजस्थान के करौली जिले में राजकार्य में लापरवाही और उदासीनता बरतने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अक्षय गोदारा ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। जिला प्रशासन की ओर से कुल चार अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम 17 (17 CCA) के तहत वार्षिक वेतनवृद्धि रोकने के दंडादेश जारी किए गए हैं।
किन-किन कार्मिकों पर हुई कार्रवाई और क्या मिला दंड?
जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेशों के अनुसार निम्नलिखित कार्मिकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है:
डॉ. जयंतीलाल मीणा (तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, करौली): पं. दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय संबल पखवाड़े के दौरान विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र (UDID कार्ड) बनाने के कार्य में न्यूनतम प्रगति और उच्चाधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना करने के मामले में इनकी एक (01) वार्षिक वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकने के आदेश दिए गए हैं।
प्रेमकिशन (सिस्टम एनालिस्ट / संयुक्त निदेशक, DOIT): आधार ऑपरेटर चयन प्रक्रिया वर्ष 2025 के दौरान प्रभावी पर्यवेक्षण के अभाव और प्रक्रिया में पारदर्शिता व दस्तावेजों के संधारण की कमी के कारण पूरी चयन प्रक्रिया निरस्त होने और आमजन को विलंब होने के मामले में इनकी दो (02) वार्षिक वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकने की कार्रवाई की गई है।
दीपक कुमार गर्ग (प्रयोगशाला सहायक, सामान्य चिकित्सालय): महिला कार्मिकों द्वारा लगाए गए प्रताड़ना और दुराचरण के मामलों में जांच समितियों की रिपोर्ट के आधार पर राजस्थान आचरण नियम, 1971 के नियम 25 AA के विपरीत कार्य करने और विभाग की छवि धूमिल करने के दोषी पाए जाने पर इनकी दो (02) वार्षिक वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकने का दंड दिया गया है।
गौरव गोयल (सहायक प्रोग्रामर / आधार प्रभारी, DOIT): आधार ऑपरेटर चयन प्रक्रिया में दस्तावेजों के संधारण के अभाव और शीर्ष लिपिकीय दायित्वों के निर्वहन में सतर्कता न बरतने के कारण इनकी एक (01) वार्षिक वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकने के आदेश जारी किए गए हैं।
डॉ. ओपी मीणा की चार्जशीट ड्रॉप, दिए गए निर्देश
दूसरी ओर, एक महिला ANM/प्रसाविका द्वारा लगाए गए प्रताड़ना के आरोपों से घिरे डॉ. ओ.पी. मीणा (उपनिदेशक, सामान्य चिकित्सालय) के प्रकरण में जिला कलेक्टर द्वारा उनके लिखित जवाब और पत्रावली का गहन अवलोकन किया गया। चूंकि शिकायतकर्ता प्रसाविका द्वारा पूर्व में प्रस्तुत शपथ पत्र में आपसी रजामंदी और आगे कोई कार्रवाई नहीं चाहने का उल्लेख किया गया था, इसलिए डॉ. ओपी मीणा का जवाब संतोषजनक मानते हुए उनकी चार्जशीट को ड्रॉप (निस्तारित) कर दिया गया है। हालांकि, उन्हें भविष्य में विभागीय योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन और राजकार्य के प्रति पूरी सावधानी बरतने की मौखिक चेतावनी दी गई है।
इस दौरान डॉ. मीणा ने तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. दिनेश चंद मीणा, तत्कालीन पीएमओ डॉ. दिनेश चंद्र गुप्ता, बाबू इमरान खान और डॉ. अनिता गुप्ता पर षड्यंत्र कर उन्हें फंसाने का आरोप लगाया है। दरअसल तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. दिनेश चंद मीणा और बाबू इमरान खान एक महिला चिकित्सक से जुड़े रिश्वत एवं प्रताड़ना के मामले में दोषी पाए गए हैं, और चिकित्सा निदेशालय की जायसवाल कमेटी भी इस प्रकरण में दो कार्मिकों को दोषी ठहरा चुकी है।
जिला प्रशासन की इस कठोर कार्रवाई से संपूर्ण चिकित्सा और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है, और यह स्पष्ट संदेश गया है कि सरकारी दायित्वों के निर्वहन में कोताही बरतने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
