एक ‘मुखियाजी’ का अपने महकमे से मोहभंग हो रहा है। ठेकेदारों वाले इस महकमे में ‘मुखियाजी’ ने जमकर हाथ साफ किया। जो भी मौका मिला मुखियाजी ने उसे खाली नहीं जाने दिया। यूं कहिए कि अगस्त, 2024 से दिसम्बर, 2025 तक 17 महीने ‘मुखियाजी’ का स्वर्णिम काल रहा, लेकिन 2026 के शुरू से ही ‘मुखियाजी’ के लिए सूखा चल रहा है और महकमे में ये सूखा खत्म होने का नाम भी नहीं ले रहा। अब करें भी तो क्या! महकमे के हालात भी ठीक नहीं चल रहे। लंबे समय से महकमा बजट की कमीं से जूझ रहा है। कभी ठेकेदार रहे ‘मुखियाजी’ ने पद मिलने के बाद महकमे में उन सारे रास्तों का खुलकर फायदा उठाया, जहां से ठेकेदार महकमे की योजना में गुजरते हैं। कुल मिलाकर अपने कार्यकाल में ‘मुखियाजी’ ने महकमे की सारी हरियाली का जमकर फायदा उठाया और अब 5 महीनों से चल रहा सूखा ‘मुखियाजी’ को रास नहीं आ रहा… और इसी वजह से ‘मुखियाजी’ का मोहभंग हो गया है।
वैसे, महकमे के ‘पुराने मुखियाजी’ भी ऐसे ही मैदान में उतरे थे। ‘मुखियाजी’ ने महकमा मिलते ही अपनी टीम के साथ मिलकर 20 महीनों में वो गदर मचाई थी कि महकमा बदनामी के शिखर पर पहुंच गया। वक्त बदला और ‘मुखियाजी’ से एक-एककर सबकुछ छिनता चला गया… और आज बेचारे किस हाल में हैं, किसी से नहीं छुपा है।
EXPOSE बाबू