‘मुखियाजी’ और ठेका कंपनी का मजबूत ‘गठबंधन’!

एक सरकारी महकमे में ‘मुखियाजी’ और एक ठेका कंपनी का जबरदस्त गठजोड़ चल रहा है। इस गठजोड़ का फायदा ‘मुखियाजी’, ठेका कंपनी के साथ-साथ ‘मुखियाजी’ के परममित्र और एक दलाल ठेकेदार को भी मिल रहा है। ठेका कंपनी पर ‘मुखियाजी’ की इस मेहरबानी के पीछे पुराने कामकाज का एहसान है जो आजकल दोनों के लिए फायदे का सौदा बन गया है। दरअसल, महकमे के ‘मुखियाजी’ किसी जमाने में ठेकेदार ही हुआ करते थे और छोटे-मोटे काम किया करते थे। तब इसी ठेका कंपनी से ठेकेदार रहे ‘मुखियाजी’ अपनी फर्म पर सबलैट में काम लेकर करते थे। समय बदला, ठेकेदार से नेताजी और फिर ‘मुखियाजी’ बनने के बाद इसी कंपनी के साथ यह गठजोड़ और ज्यादा मजबूत बन गया। ‘मुखियाजी’ अपने महकमे में मैनेजमेंट का खेल कर इस ठेका कंपनी को मोटे-मोटे काम दिलाते हैं और एक दलाल ठेकेदार अपनी फर्म को छोड़कर इस फर्म के काम को फील्ड में संभालता है। इस काम के बदले कंपनी को ठाले बैठे कमीशन मिल जाता है तो दूसरी ओर फील्ड में फर्जीवाड़ों सहित भुगतान के मामलों को ‘मुखियाजी’ संभालते हैं जिसके बदले उनको फायदे का 50 फीसदी मिल जाता है।
हालांकि, ‘मुखियाजी’ का ये खेल बहुत की गोपनीय तरीके से चल रहा है। महकमे में कंपनी के हर फर्जीवाड़े को ‘मुखियाजी’ दबाने से लेकर क्लीचिट दिलवाने तक जमीन-आसमान एक कर देते हैं। ‘मुखियाजी’ बनने के बाद से ठेका कंपनी पर ‘मुखियाजी’ की पूरी मेहरबानी चल रही है और पिछले एक साल से अपने संभाग मुख्यालय पर बैठे एक जाति बंधु अधिकारी के साथ मिलकर ठेका कंपनी को अपने क्षेत्र सहित संभाग में कई और काम दिलाने के लिए पूरजोर कोशिश कर रहे हैं। लेकिन लोकतंत्र के एक चौथे स्तम्भ ने ‘मुखियाजी’ के इस खेल को आखिरकार ‘एक्सपोज’ कर ही दिया। कुछ समय पहले फर्जीवाड़े के उस गंभीर मामले में इस कंपनी के खिलाफ ACB में मुकदमा भी दर्ज हो गया जिसमें ‘मुखियाजी’ ने न केवल कंपनी को ब्लैकलिस्ट की कार्रवाई से बचाया बल्कि राज्य सरकार को 40 करोड़ से ज्यादा का वित्तीय नुकसान भी पहुंचाया था।
इतना ही नहीं, अब कंपनी के एक और गंभीर फर्जीवाड़े के मामले में ब्लैकलिस्ट और करोड़ों की EMD जप्त की कार्रवाई की भूमिका तैयार हो गई है। हालांकि, ‘मुखियाजी’ और महकमे में उनकी पूरी टीम इस ठेका कंपनी को बचाने में जुटी है लेकिन ‘मुखियाजी’ का यह खेल उनके राजनीतिक करियर के लिए बड़ा नासूर साबित हो सकता है। तो दूसरी ओर, ‘मुखियाजी’ के परममित्र और वागड़ से आने वाले एक ठेकेदार को श्रीकृष्ण की जन्मस्थली के दर्शन करवा सकते हैं। ये समय है, जो कल, आज और कल पर चलता है, और ‘समय’ सबका बदलता है।

Expose बाबू

Share This Article
Leave a Comment