पीएचईडी ठेकेदारों से वादाखिलाफी: 1800 करोड़ के भुगतान का दावा फेल, अब जलभवन में घुसने पर लगा दिया राइडर !

-क्या हड़ताल तुड़वाने के लिए रची गई थी ‘लॉलीपॉप’ की साजिश? 22 अप्रैल के समझौते के बाद मंत्री के वादे निकले हवा-हवाई

-कुछ ठेकेदारों ने अपने फायदे के लिए योजनाबद्ध तरीके से हड़ताल को कराया फेल, वर्ना निर्णायक होता फैसला

‘Expose Now’ की विशेष रिपोर्ट

जयपुर। राजस्थान के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के ठेकेदारों के साथ राज्य सरकार की वादाखिलाफी अब खुलकर सामने आ गई है। 22 अप्रैल को मंत्री कन्हैयालाल चौधरी के साथ हुई समझौता वार्ता में दिए गए आश्वासन पूरी तरह से फेल साबित हुए हैं। ठेकेदारों को भुगतान तो दूर की बात, अब उनके जलभवन (Jal Bhawan) में प्रवेश करने पर भी कड़े राइडर (प्रतिबंध) लगा दिए गए हैं।

मंत्री जी के अधूरे वादे, तारीख और दावे:-

समझौता वार्ता में मंत्री महोदय ने मुख्य अभियंताओं की उपस्थिति में हड़ताल समाप्त कराने के लिए निम्नलिखित वादे किए थे:

-24 अप्रैल 2026: 300 करोड़ रुपये का भुगतान (14 दिन बाद भी पूरा नहीं हुआ)।

-05 मई 2026: 1500 करोड़ रुपये का भुगतान (आज की तारीख तक बजट नदारद)।

-15 मई 2026: समस्त बकाया 2500 करोड़ रुपये का पूर्ण भुगतान और मांगों का निस्तारण।

Expose Now की पड़ताल:-

समझौता वार्ता के दिन ही हमने यह अंदेशा जताया था कि ठेकेदारों को मीठा लॉलीपॉप देकर हड़ताल समाप्त करवाई गई है। राज्य सरकार के पास जेजेएम (Jal Jeevan Mission) के बकाया भुगतान के लिए बजट का कोई प्रावधान नहीं है और निकट भविष्य में बजट की कोई स्पष्ट रूपरेखा भी नहीं दिख रही है। सरकार पूरी तरह से केंद्र सरकार के बजट पर निर्भर है या फिर हुडको (HUDCO) जैसी संस्थाओं से लोन लेने की योजना बना रही है।

कहीं हड़ताल समाप्त कराने की साजिश तो नहीं?

जलभवन पर चल रहे उग्र आंदोलन को शांत करने के लिए जिस तेजी से समझौता वार्ता की गई और बड़े-बड़े आर्थिक वादे किए गए, वे अब गंभीर संदेह के घेरे में हैं। ठेकेदारों का आरोप है कि उन्हें केवल आश्वासन का झुनझुना थमाया गया ताकि समय रहते आंदोलन को तोड़ा जा सके। इस पूरे खेल में कुछ प्रभावशाली और मंत्री के करीबी ठेकेदारों को आगे किया गया। एक तरफ सरकार ने ठेकेदारों से आंदोलन खत्म करवाकर वाहवाही लूटी, वहीं दूसरी तरफ कुछ खास ठेकेदारों ने मंत्री जी से अपनी निकटता दिखाकर भविष्य के फायदे के रास्ते खोल लिए।

जलभवन में प्रवेश पर राइडर, विरोध-प्रदर्शन पर भी रोक:-

वादा पूरा करने के बजाय, प्रशासन ने अब नया फरमान जारी कर दिया है। ठेकेदारों के जलदाय भवन में घुसने पर राइडर लगा दिया गया है। इसके तहत बिना पूर्व अनुमति के ठेकेदार जलदाय भवन में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। जलभवन के बाहर किसी भी प्रकार के धरना-प्रदर्शन और विरोध पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। ऐसे में अब जेजेएम के अटके हुए बजट और नई पाबंदियों के बीच ठेकेदारों में गहरा आक्रोश पनप रहा है।

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