जलदाय विभाग का तुगलकी फरमान: जल भवन को बनाया गया ‘किला’, भ्रष्टाचार और कारगुजारियां छिपाने की तैयारी?

जयपुर। भीषण गर्मी में पानी की किल्लत से जूझ रही आम जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) ने एक नया ‘तुगलकी फरमान’ जारी किया है. 4 मई 2026 को मुख्य अभियंता (प्रशासन) मुकेश कुमार बंसल द्वारा जल भवन मुख्यालय की सुरक्षा के नाम पर यह सख्त आदेश जारी किया गया है। यह आदेश अधिकारियों और इंजीनियरों की छोटी मानसिकता और आम जनता से दूरी बनाने की उनकी मंशा को उजागर करता है।

क्या हैं नए प्रतिबंध और नियम?

-प्रवेश पर सख्त पहरा: परिसर में आने वाले बाहरी आगंतुकों को नाम, पता, मोबाइल नंबर, आगमन का उद्देश्य और संबंधित अधिकारी का विवरण प्रवेश रजिस्टर में दर्ज करना होगा। बिना प्रविष्टि के किसी को भी प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

-वाहनों की जांच: बाहरी वाहनों की जांच कर उनका विवरण रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा, और अधिकारियों/कर्मचारियों के वाहनों के लिए स्टीकर अनिवार्य कर दिया गया है।

-प्रदर्शन और धरने पर प्रतिबंध: परिसर में किसी भी प्रकार का धरना, प्रदर्शन, सभा या नारेबाजी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी. इसके लिए पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है।

-होर्डिंग/बैनर पर रोक: बिना लिखित अनुमति के कोई भी होर्डिंग, पोस्टर या बैनर लगाना वर्जित है।

-समय सीमा और अवकाश के नियम: कार्यालय समय के पश्चात या राजकीय अवकाश के दिन भी बिना अनुमति किसी भी व्यक्ति का परिसर में रुकना या प्रवेश करना प्रतिबंधित किया गया है।

आम जनता की पीड़ा दबाने और भ्रष्टाचार छिपाने की साजिश?

यह आदेश विभाग के अधिकारियों की संवेदनहीनता को दर्शाता है। PHED एक ऐसा विभाग है जिसका आम जनता से सीधा जुड़ाव है। जनता भीषण गर्मी में अपनी पानी की समस्याओं को लेकर परेशान होकर मुख्यालय आती है, लेकिन इस आदेश से स्पष्ट है कि:

-जनता की सुनवाई पर लगाम: मुख्यालय में उच्च अधिकारियों तक आम आदमी की पहुंच को रोकने का एक नापाक तरीका अपनाया गया है। पीड़ित जनता अब आसानी से अपनी पीड़ा बड़े अधिकारियों तक नहीं पहुंचा पाएगी।

-मीडिया और जनता से दूरी: यह कदम विभाग के इंजीनियरों के घटिया कार्यों और भ्रष्टाचार को छिपाने की एक सोची-समझी तैयारी लग रहा है, ताकि कोई भी बाहरी व्यक्ति या संस्था विभाग की कमियों का पर्दाफाश न कर सके।

-ठेकेदारों पर दबाव: इस आदेश को सख्ती से लागू करने की जिम्मेदारी निजी एजेंसी (मैसर्स एक्टिव सिक्योरिटीज सर्विसेज) को सौंपी गई है, जिससे ठेकेदारों पर दबाव बनाने का एक नया खेल शुरू हो गया है।

कुल मिलाकर, जलदाय विभाग का यह आदेश जनहित के विपरीत अधिकारियों को बचाने और अपनी विफलता को छिपाने का एक हथकंडा प्रतीत होता है।

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