Expose Now स्पेशल: खान विभाग की मिलीभगत से बजरी माफिया का बड़ा ‘खेल’, 60 किमी की आड़ में 1400 किमी का परमिट बांटकर लुटाया जा रहा राजकोष

-कागजों में 5 टन की ट्रैक्टर-ट्रॉली, मौके पर 22 चक्के के भारी ट्राले, ऑनलाइन मॉनिटरिंग को ठेंगा दिखा दर्जनों बार एक ही ‘रवन्ना’ पर बजरी ढो रहा माफिया सिंडिकेट!

-पचपदरा रिफाइनरी के नाम पर महाघोटाला, कनाना से महज 50 किमी की दूरी, लेकिन माइन्स विभाग ने थमाया 940 किलोमीटर का ‘स्पेशल रवन्ना’!

-कैमरे के सामने नंबर प्लेट बदलकर राजस्व चोरी का खुला खेल, CEC के सख्त नियमों की धज्जियां उड़ रहीं, फिर भी जयपुर तक बैठे आला अफसर मौन!

जयपुर/बालोतरा। राज्य में अवैध खनन और परिवहन पर नकेल कसने के लिए खान विभाग द्वारा ऑनलाइन निगरानी, तुलाई कांटों को डिजिटल सिस्टम से जोड़ने और जियो-टैगिंग के जो दावे किए जा रहे थे, उनकी हवा निकल चुकी है। ‘Expose Now’ की विशेष पड़ताल में सामने आया है कि खान विभाग का यह हाई-टेक सिस्टम बजरी माफियाओं के आगे नतमस्तक है। विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की कथित साठगांठ से राज्यभर में फर्जी ट्रांजिट पास (रवन्ना) के जरिए करोड़ों रुपये के राजस्व की संगठित चोरी का खेल बेधड़क जारी है।

खेल 1: दूरी 50 किमी, परमिट मिला 1400 किलोमीटर का:-

नियमों के मुताबिक रवन्ना (ट्रांजिट पास) खनन स्थल से गंतव्य तक की वास्तविक दूरी के हिसाब से जारी होता है। लेकिन हकीकत यह है कि 50 से 60 किलोमीटर की दूरी के लिए माफियाओं को 940 से 1400 किलोमीटर तक का ट्रांजिट पास जारी किया जा रहा है।

-केस स्टडी (पचपदरा): बालोतरा जिले के कनाना से पचपदरा रिफाइनरी की वास्तविक दूरी करीब 50 किलोमीटर है। लेकिन इस रूट के लिए विभाग ने 940 किलोमीटर का रवन्ना जारी कर दिया, जो 5 से 8 जुलाई तक वैध रखा गया।

-असर: इस लंबी अवधि और असीमित दूरी वाले पास की आड़ में एक ही ट्रक से कई चक्कर लगाकर अवैध बजरी की ढुलाई की गई और सरकार को भारी चूना लगाया गया।

खेल 2: बजरी माफिया 5 टन के पास पर दौड़ा रहे 40 टन बजरी से भरे ट्रेलर्स:-

तुलाई कांटों (Weighbridges) पर दर्ज रिकॉर्ड और धरातल की तस्वीरों में जमीन-आसमान का अंतर है। ऑनलाइन रिकॉर्ड में कई वाहनों का वजन महज 5 से 8 टन दर्शाया जा रहा है, जो छोटे वाहनों या ट्रैक्टर-ट्रॉली के लिए निर्धारित है। जबकि असल में तुलाई कांटों के ऑनलाइन फोटो में 18 से 22 चक्के वाले विशाल ट्रक बजरी से लदे दिख रहे हैं, जिनमें 50 से 60 टन बजरी भरी होती है। रिकॉर्ड में वजन कम दिखाकर और धरातल पर हैवी ट्रेलर्स से माल उठवाकर पेनल्टी और रॉयल्टी की भारी चोरी की जा रही है।

खेल 3: कांटों पर बदल रही नंबर प्लेट, सुप्रीम कोर्ट के आदेश हवा:-

ऑनलाइन कैमरों की आंख में धूल झोंकने के लिए तुलाई कांटों पर वाहन चालक सरेआम ट्रकों की नंबर प्लेट बदलते कैमरे में कैद हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) ने 2020 की अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा था कि किसी भी वाहन को उसकी आरटीओ निर्धारित क्षमता से कम का रवन्ना जारी नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद स्थानीय अधिकारियों से लेकर जयपुर स्थित मुख्यालय तक फैले सिंडिकेट के कारण अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

अब सवाल उठता है कि जब पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है और लाइव फोटो में फर्जीवाड़ा साफ दिख रहा है, तब भी खान विभाग के वरिष्ठ अधिकारी खामोश क्यों हैं? क्या यह फर्जी रवन्ना घोटाला निचले स्तर की सांठगांठ है या इसमें जयपुर तक का सिंडिकेट शामिल है? क्या मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेकर प्रकरण में लिप्त खान विभाग के अधिकारियों और बजरी माफियाओं के खिलाफ कोई बड़ा एक्शन लेंगे? या फिर राजस्थान में बजरी माफियाओं के आगे सरकारी सिस्टम इसी तरह नतमस्तक होता रहेगा?

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now


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