जयपुर/कोटा। राजस्थान के जल संसाधन विभाग में करीब 1,414 करोड़ की लागत वाले दो बड़े सिंचाई प्रोजेक्ट्स की टेंडर प्रक्रिया गंभीर विवादों में घिर गई है। टेंडर की ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करने के बावजूद एक बोलीदाता कंपनी के मूल दस्तावेज (हार्ड कॉपी) स्वीकार नहीं करने के आरोप लगे हैं। इससे विभाग की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं और किसी खास कंपनी को फायदा पहुंचाने की आशंका जताई जा रही है।
मामले के मुख्य बिंदु:
छोटी कालीसिंध मध्यम परियोजना: कार्य का आधिकारिक नाम— Construction of Chhoti Kalisindh Medium Irrigation Project Based on Sprinkler with Solar System at Chhoti Kalisindh and Chachurni River Tehsil Gangdhar and District Jhalawar (Rajasthan) (E.P.C. Single Responsibility Turnkey Basis)। इसकी अनुमानित लागत 611.73 करोड़ रुपये है।
मनोहरथाना मेजर इरिगेशन प्रोजेक्ट: कार्य का आधिकारिक नाम— Construction of Dam and Development of Pressurized Irrigation Network to Irrigate the Command Area under Manoharthana Major Irrigation Project, including Survey, Design, Construction, Testing, Commissioning, Operation & Maintenance of Dam and Pressurized Piped Irrigation System in Tehsil Manoharthana, District Jhalawar (Rajasthan) on EPC Turnkey Basis। इसकी अनुमानित लागत 802.54 करोड़ रुपये है।
कुल लागत: इन दोनों प्रोजेक्ट्स की कुल लागत 1,414.27 करोड़ रुपये है।
डेडलाइन का पेच: टेंडर की शर्तों के मुताबिक, 3 सितंबर 2026 को दोपहर 2:00 बजे तक कार्यालय मुख्य अभियंता, जल संसाधन संभाग, कोटा में ऑफलाइन मूल दस्तावेज जमा कराने थे।
फर्म का आरोप: बोलीदाता कंपनी का कहना है कि उसने ऑनलाइन पोर्टल पर तय समय सीमा में अपनी बिड सफलतापूर्वक सबमिट कर दी थी। इसके बावजूद कोटा स्थित मुख्य अभियंता कार्यालय में अधिकारियों ने निर्धारित समय से पहले पहुंचे प्रतिनिधियों से हार्ड कॉपी लेने में टालमटोल की और दस्तावेज स्वीकार नहीं किए।
तकनीकी बिड की टाइमिंग: नियमानुसार 3 सितंबर 2026 को शाम 5:00 बजे इन टेंडरों की तकनीकी बिड (Technical Bid) खोली जानी है। ऐसे में हार्ड कॉपी जमा न होने से पात्र कंपनी को प्रक्रिया से बाहर करने की साजिश का अंदेशा जताया जा रहा है।
अधिकारियों की भूमिका पर निगाहें
मामले में जल संसाधन विभाग के कोटा संभाग के मुख्य अभियंता की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल उठ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि इतने भारी-भरकम बजट के टेंडर में यदि ऑनलाइन बिड के बाद हार्ड कॉपी जमा करने से रोका जाता है, तो यह सीधा-सीधा फेयर कॉम्पिटिशन को खत्म करने की कोशिश है।
शाम 5 बजे तकनीकी बिड खुलने से ठीक पहले उपजे इस गतिरोध से अब यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर किस रसूखदार फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रखकर दूसरी कंपनियों को रेस से बाहर किया जा रहा है। विभाग की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।