PHED में कमीशनखोरी का पर्दाफाश; फाइनल बिल पास करने के नाम पर ठेकेदार से लाखों की घूस मांग रहे थे एईएन और जेईएन, एसीबी ने दर्ज किया मुकदमा

नागौर: राजस्थान में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) में चल रही कमीशनखोरी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक बहुत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है । ब्यूरो की नागौर टीम ने नावां सिटी (जनपद डीडवाना-कुचामन) के पीएचईडी कार्यालय में तैनात सहायक अभियंता (AEN) और कनिष्ठ अभियंताओं (JEN) द्वारा लाखों रुपये की रिश्वत मांगे जाने के मामले में भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया है । आरोपियों को हालांकि एसीबी की ट्रैप कार्रवाई की भनक लग गई थी, जिसके कारण वे रंगे हाथों पैसे लेने से बच गए, लेकिन डिजिटल टेप रिकॉर्डर में रिकॉर्ड हुई उनकी बातचीत के पुख्ता प्रमाणों के आधार पर ब्यूरो ने यह मुकदमा दर्ज किया है

क्या था पूरा मामला?

शिकायतकर्ता बंशीलाल (पुत्र किशन शर्मा, निवासी भैंसलाना, जयपुर ग्रामीण), जो कि पीएचईडी विभाग में ‘AA Class’ ठेकेदार हैं, ने एसीबी नागौर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कल्पना सोलंकी को एक लिखित शिकायत सौंपी थी । बंशीलाल की फर्म “मैसर्स सुंदरिया कंस्ट्रक्शन” को नावां के अधीन ‘जलयोजना मोती बाबा की ढाणी’ (ग्राम लूणवा सीरसी) में एक सरकारी कार्य का ठेका मिला था

कार्य पूरा हुए करीब डेढ़ साल बीत चुके थे, लेकिन विभाग के अधिकारी उनका फाइनल बिल पास नहीं कर रहे थे । जब ठेकेदार ने अधिकारियों से मुलाकात की, तो कमीशन के रूप में मोटी घूस की मांग की गई

अधिकारियों ने बांटे थे घूस के ‘रेट’

एसीबी द्वारा कराए गए गोपनीय सत्यापन और रिकॉर्डिंग के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:

  • शांति देवी (सहायक अभियंता, उम्र 32 वर्ष): कुल बिल भुगतान राशि का दो प्रतिशत (अलग-अलग पदों के प्रभार के अनुसार 1.5% और 0.5%) के हिसाब से करीब 1,60,000 रुपये की रिश्वत मांग रही थीं ।
  • सतवीर उमरिया (कनिष्ठ अभियंता, उम्र 32 वर्ष): बिल क्लियर करने के एवज में करीब 1,25,000 रुपये की रिश्वत पर सहमति दी थी ।
  • आशीष मीणा (तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता, नावां हाल सहायक अभियंता, मकराना, उम्र 27 वर्ष): फाइनल बिलों पर अपने हस्ताक्षर शेष होने के कारण 5,00,000 रुपये की भारी-भरकम घूस मांग रहे थे । उन्होंने 3,00,000 रुपये जयपुर में ‘मोहन’ नामक किसी व्यक्ति को दिलवाने का सौदा तय किया था ।

भनक लगते ही मुकर गए अधिकारी, लेकिन रिकॉर्डर में कैद हुए सबूत

एसीबी ने 3 और 4 फरवरी 2026 को ट्रैप की योजना बनाई । परिवादी की जेब में फिनोफ्थलीन पाउडर लगे हुए 50,000 रुपये असली नोट और 50,000 रुपये ‘भारतीय मनोरंजन बैंक’ के डमी नोट रखवाकर लिफाफों में भेजे गए थे

लेकिन 4 फरवरी को जब परिवादी पीएचईडी कार्यालय नावां पहुंचा, तो आरोपियों ने पैसे लेने से साफ इनकार कर दिया । अधिकारियों ने शंका जाहिर करते हुए कहा, “अभी कुछ दिन रुको, हमें किसी ने बताया है कि तुम एसीबी को लेकर घूम रहे हो” । कार्यालय में यह अफवाह फैल चुकी थी कि ठेकेदार के पास अधिकारियों की कॉल रिकॉर्डिंग्स हैं

ट्रैप फेल होने के बाद, एसीबी ने स्वतंत्र गवाहों (विनोद कुमार और अजय सांखला) की मौजूदगी में डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर के मेमोरी कार्ड की जांच की । कंप्यूटर से शब्द-ब-शब्द ट्रांसक्रिप्ट तैयार की गई, जिसमें तीनों अभियंताओं द्वारा घूस मांगे जाने की बात पूरी तरह स्पष्ट और प्रमाणित पाई गई

कानूनी कार्रवाई और आगामी अनुसंधान

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, राजस्थान (जयपुर मुख्यालय) ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 और भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 61(2) के तहत नियमित एफआईआर नंबर 0147/2026 दर्ज कर ली है

एसीबी के पुलिस अधीक्षक सुनील सिहाग के आदेशानुसार, इस पूरे संवेदनशील मामले का अनुसंधान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, अजमेर के पुलिस निरीक्षक नरेंद्र सिंह राठौड़ को सौंपा गया है

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