जयपुर में ACB का बड़ा एक्शन: पासपोर्ट वैरिफिकेशन के नाम पर रिश्वत लेते रामगंज थाने का कांस्टेबल रंगे हाथों गिरफ्तार

जयपुर। राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) जयपुर नगर चतुर्थ की टीम ने आम जनता से जुड़े बेहद संवेदनशील मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस कमिश्नरेट जयपुर के रामगंज थाने में तैनात एक सिपाही को रंगे हाथों दबोचा है । एसीबी की टीम ने पुलिस थाना रामगंज परिसर के भीतर जाल बिछाकर कांस्टेबल सीताराम मीणा को परिवादी से ₹7,500 की शेष रिश्वत राशि लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है । यह घूस परिवादी, उसकी पत्नी और बच्चे के पासपोर्ट वैरिफिकेशन (सत्यापन) रिपोर्ट को सही तरीके से भेजने की एवज में वसूली जा रही थी

पूरे परिवार का पासपोर्ट निरस्त करने की धमकी देकर मांगी थी घूस

मामले के अनुसार, रामगंज बाजार निवासी परिवादी फरहान अहमद ने स्वयं का, अपनी पत्नी साइमा परवीन और बेटे मोहम्मद उस्मान के पासपोर्ट के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। ये तीनों आवेदन पुलिस वेरिफिकेशन के लिए रामगंज थाने पहुंचे, जहां इसकी जांच कांस्टेबल नंबर 10716 सीताराम मीणा को सौंपी गई थी।

आरोपी कांस्टेबल ने परिवादी को थाने बुलाकर दस्तावेज जांचे और धमकी दी कि यदि वेरिफिकेशन रिपोर्ट सही करवानी है तो ₹30,000 की रिश्वत देनी होगी, अन्यथा वह तीनों पासपोर्ट को कैंसिल (निरस्त) कर देगा।

एसीबी के वॉयस रिकॉर्डर में कैद हुआ घूसखोरी का खेल

परिवादी रिश्वत नहीं देना चाहता था, इसलिए उसने 15 मई 2026 को एसीबी कार्यालय में उपस्थित होकर एक लिखित शिकायत दर्ज कराई । एसीबी के पुलिस निरीक्षक रामजीलाल के निर्देशन में सहायक उप निरीक्षक आलोक कुमार की टीम ने घूस की मांग का गोपनीय सत्यापन शुरू किया।

24 मई 2026 को सत्यापन के दौरान, शातिर कांस्टेबल ने ₹30,000 की मांग को कम करते हुए अंतिम सौदा ₹9,000 में तय किया । आरोपी ने परिवादी की मजबूरी का फायदा उठाकर रामगंज सर्किल के पास बने पुलिस आवास पर उसी समय ₹1,500 की अग्रिम रिश्वत ले ली और शेष ₹7,500 काम होने पर लेकर आने को कहा । परिवादी ने चालाकी से उन ₹1500 के नोटों की फोटो भी अपने मोबाइल में खींच ली थी

थाने के चौक में नीम के पेड़ के पास ली ₹7500 की रिश्वत

25 मई 2026 को एसीबी ने स्वतंत्र गवाहों (सहायक प्रशासनिक अधिकारी महेश शर्मा और भगवान सिंह राठौड़) की मौजूदगी में केमिकल पाउडर लगे ₹7,500 देकर परिवादी को थाने भेजा । शाम करीब 6:48 बजे आरोपी कांस्टेबल सीताराम ने थाने के आधिकारिक फोन से परिवादी को कॉल कर पैसे लेकर बुलाया

परिवादी जैसे ही थाने में दाखिल हुआ, वर्दी में तैनात कांस्टेबल सीताराम मीणा उसे थाने के चौक में नीम के पेड़ के पास ले गया और फिर वहां से दक्षिण-पूर्व कोने की सीढ़ियों के पास ले जाकर दाहिने हाथ से नोटों की गड्डी थाम ली । आरोपी ने पैसे लेकर अपनी पैन्ट की दाहिनी जेब में रख लिए

हाथ धुलवाते ही लाल घोल हुआ ‘हल्का गुलाबी’

जैसे ही परिवादी ने रिश्वत देकर तय इशारा किया, बाहर मुस्तैद एसीबी टीम ने तुरंत थाना परिसर में प्रवेश कर आवाक-जावक कक्ष में मौजूद कांस्टेबल सीताराम को हमराही जाप्ते की मदद से दबोच लिया । तलाशी के दौरान स्वतंत्र गवाह भगवान सिंह ने आरोपी की पैन्ट की दाहिनी जेब से हूबहू नंबरों के मिलान के साथ पूरे ₹7,500 के नम्बरी नोट बरामद कर लिए

इसके बाद जब सोडियम कार्बोनेट के पारदर्शी घोल में आरोपी के दाहिने हाथ की उंगलियों को डुबोया गया, तो घोल का रंग तुरंत हल्का गुलाबी हो गया । इसके बाद आरोपी की वर्दी की पैन्ट उतरवाकर जब उसकी दाहिनी जेब को केमिकल घोल में धोया गया, तो धौवन का रंग भी गहरा गुलाबी हो गया, जो रिश्वत ग्रहण करने का सबसे बड़ा वैज्ञानिक प्रमाण बना

आवाज का सैंपल देने से मुकरा आरोपी

कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर आरोपी की सरकारी पिस्टल (बट नंबर 35) मय 5 कारतूस को थाने के मालखाने में जमा करवाया गया । जब एसीबी ने डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर में रिकॉर्ड ऑडियो क्लिप का मिलान करने के लिए आरोपी का वॉयस सैंपल (आवाज का नमूना) लेना चाहा, तो आरोपी सीताराम मीणा ने लिखित में सैंपल देने से साफ इनकार कर दिया

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, जयपुर के पुलिस अधीक्षक गोरधन लाल सौंकरिया के आदेशानुसार आरोपी कांस्टेबल सीताराम मीणा (पुत्र जगदीश मीणा, निवासी ग्राम अणी, चंदवाजी, आमेर) के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है । इस पूरे भ्रष्टाचार मामले की आगामी विस्तृत जांच जयपुर नगर तृतीय के उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) श्री सुरेश कुमार स्वामी को सौंपी गई है

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