करौली समेत प्रदेशभर के डॉक्टरों में भारी असंतोष: ई-प्रिस्क्रिप्शन योजना को बताया ‘बोझिल’, बोले—बिना इंटरनेट और स्टाफ के कैसे होगी लागू?

जयपुर: राजस्थान सरकार के चिकित्सा विभाग ने प्रदेश के चिकित्सा ढांचे को हाईटेक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर डेस्क मॉड्यूल और ई-प्रिस्क्रिप्शन अनिवार्य कर दिया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) राजस्थान के मिशन निदेशक डॉ. जोगाराम के निर्देशानुसार आगामी 31 जुलाई के बाद किसी भी जिला अस्पताल, उप जिला अस्पताल, सैटेलाइट अस्पताल या पीएचसी-सीएचसी पर डॉक्टर हाथ से पर्ची नहीं बना सकेंगे। हालांकि, इस नए बदलाव को लेकर जमीनी हकीकत और डॉक्टरों के विरोध के चलते विवाद भी खड़ा हो गया है।

क्या है नई हाईटेक व्यवस्था और इसके फायदे?

सरकार की इस नई पहल के तहत डॉक्टर अब टैबलेट या कंप्यूटर पर ऑनलाइन ई-प्रिस्क्रिप्शन लिखेंगे, जो सीधे संबंधित निःशुल्क दवा वितरण केंद्र और लैब के सिस्टम पर पहुंच जाएगा

  • आभा कार्ड से लिंक: ई-प्रिस्क्रिप्शन सीधे मरीज के आभा पहचान पत्र से जुड़ेगा, जिससे स्थाई इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (EHR) तैयार होगा।
  • समय की बचत: पर्ची गुम होने या फटने का डर खत्म होगा और दवा व जांच काउंटर पर मरीजों का समय बचेगा।
  • पारदर्शिता: ऑनलाइन रिकॉर्ड से अस्पतालों में दवाओं की खपत और उपलब्धता की सटीक जानकारी मिलती रहेगी।

डॉक्टर्स वेलफेयर फेडरेशन (DWF) और डॉक्टरों का कड़ा विरोध

भले ही सरकार इसे डिजिटलीकरण और पारदर्शिता की बड़ी कदम बता रही हो, लेकिन डॉक्टर्स वेलफेयर फेडरेशन (DWF) और विभिन्न चिकित्सकों ने इस जल्दबाजी में थोपी गई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

डब्लूएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. ईश्वर पंवार और जनरल सेक्रेटरी डॉ. वंदना चौधरी ने मुख्यमंत्री, चिकित्सा मंत्री और एनएचएम निदेशक को ज्ञापन सौंपकर कहा कि सैंक्शन पोस्ट के हिसाब से अभी तक एम्स जैसे संस्थानों में भी पूर्णतया यह सुविधा लागू नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि—

  • संसाधनों का अभाव: प्रदेश के कई पीएचसी (PHC) और सीएचसी (CHC) आज भी चिकित्सक विहीन हैं या एक ही डॉक्टर को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। कई जगहों पर कंप्यूटर, प्रिंटर, निर्बाध इंटरनेट या वाई-फाई और डेटा एंट्री स्टाफ का भारी अभाव है।
  • ट्रेनिंग और संवाद का अभाव: सरकार ने इस हाईटेक नियम को लागू करने से पहले न तो डॉक्टरों से कोई राय ली और न ही किसी प्रकार की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी गई है।
  • मरीजों की बढ़ेगी परेशानी: करौली सहित कई जिलों के डॉक्टरों का कहना है कि बुनियादी ढांचे के बिना इस व्यवस्था से अस्पतालों में इंटरनेट और सर्वर की दिक्कत के कारण मरीजों की लाइनें और अधिक लंबी होंगी तथा उनका काम आसान होने के बजाय और ज्यादा कठिन हो जाएगा।

संगठन ने मांग की है कि जब तक सभी संस्थानों में पर्याप्त मानव संसाधन, डिजिटल उपकरण और निर्बाध इंटरनेट सुनिश्चित नहीं हो जाते, तब तक इस अनिवार्यता की समय-सीमा पर पुनर्विचार किया जाए और चिकित्सक संगठनों से संवाद कर व्यावहारिक कार्ययोजना बनाई जाए


👇 हमारी मुहिम से जुड़ें:

🛑 भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करें!

क्या आपके पास किसी घोटाले की पुख्ता जानकारी है? हमारे 'Secure Drop' पर भेजें। आप नाम बताएँ या पहचान छुपाएँ, यह आपकी मर्जी है। सच को दुनिया के सामने लाना हमारी जिम्मेदारी है।

🔗 सुरक्षित रूप से रिपोर्ट करें

Share This Article
Leave a Comment