बिजली संकट अतीत की बात! ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर बोले- अपनी बिजली से रोशन है राजस्थान, एनर्जी एक्सचेंज पर घटी निर्भरता

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान तेजी से ‘एनर्जी सरप्लस’ (ऊर्जा अधिशेष) राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य में पिछले दो सालों से बिजली की कोई लोड शेडिंग (कटौती) नहीं की गई है। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने गुरुवार को विद्युत भवन में मीडिया से बातचीत करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्वयं के स्रोतों से उत्पादन बढ़ने के कारण अब प्रदेश की एनर्जी एक्सचेंज पर निर्भरता काफी कम हो गई है।

एनर्जी एक्सचेंज पर घटी निर्भरता, अब बेच रहे बिजली

ऊर्जा मंत्री ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले इस साल बाहर से बिजली खरीदने में भारी कमी आई है।

  • पिछले वर्ष (2025): अप्रैल में 2883 लाख यूनिट और मई में 8273 लाख यूनिट बिजली खरीदी गई थी।
  • इस वर्ष (2026): अप्रैल में मात्र 214 लाख यूनिट और मई में केवल 2804 लाख यूनिट बिजली खरीदी गई।
  • कुल मिलाकर इस वर्ष इन दो महीनों में 8138 लाख यूनिट बिजली कम खरीदी गई

अब राजस्थान अपनी अतिरिक्त बिजली एनर्जी एक्सचेंज को करीब 10 रुपए प्रति यूनिट की दर से बेच भी रहा है (अप्रैल में 1140 लाख यूनिट और मई में 417 लाख यूनिट)।

पीक डिमांड के लिए बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS)

स्वच्छ ऊर्जा के माध्यम से शाम के समय की ‘पीक डिमांड’ को पूरा करने के लिए सरकार कुसुम-2.0 योजना के तहत 6 हजार मेगावाट सोलर पावर क्षमता के साथ बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) लगा रही है।

  • पूगल (बीकानेर) के निर्माणाधीन सोलर पार्क में 2450 मेगावाट सोलर के साथ 6 हजार मेगावाट ऑवर की बैटरी स्टोरेज की निविदा प्रक्रिया जारी है।
  • उत्पादन निगम द्वारा कुल 6 हजार मेगावाट ऑवर की स्टोरेज परियोजनाएं सितंबर 2027 तक पूरी की जाएंगी।
  • 33 केवी सब स्टेशनों और वितरण ट्रांसफार्मरों पर भी स्टैंडअलोन बैटरी सिस्टम पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लगाए जाएंगे ताकि दिन की सौर ऊर्जा को रात में उपयोग किया जा सके।

थर्मल इकाइयों का ऐतिहासिक उत्पादन

प्रदेश की 23 कोयला आधारित थर्मल इकाइयों ने शानदार प्रदर्शन किया है। 2 जून को इन प्लांटों ने अपनी क्षमता का 94.60 प्रतिशत (7171 मेगावाट) विद्युत उत्पादन हासिल किया, जो अब तक का सर्वाधिक है। बेहतर रखरखाव के कारण अप्रैल और मई में बिजली उपलब्धता 84.34 प्रतिशत रही है, जो पिछले साल से 6.50 प्रतिशत अधिक है।

किसानों के लिए 2 ब्लॉक सप्लाई का रोडमैप

वर्तमान में 26 जिलों के किसानों को दिन के समय दो ब्लॉक में बिजली दी जा रही है। बचे हुए 15 जिलों को भी इस व्यवस्था से जोड़ने का रोडमैप तैयार कर लिया गया है। ग्रिड के तंत्र को मजबूत करने के लिए पिछले ढाई साल में 400KV, 220KV और 132KV के 60 नए ग्रिड सब स्टेशन बनाए गए हैं।

रिकॉर्ड मांग बिना कटौती के हुई पूरी

इस साल गर्मियों में अब तक की सर्वाधिक मांग 27 मई की रात 10:30 बजे (17,333 मेगावाट) दर्ज की गई। उस समय प्रदेश में उपलब्धता 17,353 मेगावाट थी, जिससे इस रिकॉर्ड मांग को बिना किसी कटौती के सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए 1129 FRT (फॉल्ट रेक्टिफिकेशन टीम) टीमें तैनात हैं, जिनकी GPS से ट्रैकिंग की जा रही है।

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