Expose Now Special रिपोर्ट: 36 महीनों में 1383 की मौत, फसलों की रक्षा करते-करते खुद खत्म हो रहे हैं अन्नदाता, ज़हरीले पेस्टीसाइड्स का खौफनाक सच!

-राजस्थान में पेस्टीसाइड बना साइलेंट किलर, हर दिन औसतन एक किसान गंवा रहा जान, बीकानेर, हनुमानगढ़ व चूरू में खौफनाक आंकड़े

-प्रतिबंधित व गैर-अनुशंसित ‘ऑफ-लेबल’ कीटनाशकों का अंधाधुंध इस्तेमाल, इंसानी सेहत, मिट्टी की उर्वरा शक्ति और खाद्य निर्यात पर लगा गहरा बट्टा

-सरकारी दावों की निकली हवा, लाखों बायो-किट्स बांटने के बावजूद 2025 में फिर बढ़ा मौतों का ग्राफ, बिक्री की राशनिंग व्यवस्था लागू करने से इनकार

जयपुर। राजस्थान के हरे-भरे खेतों से इस वक्त की सबसे खौफनाक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आ रही है। फसलों को कीटों के हमले से बचाने के नाम पर उड़े जा रहे ज़हरीले रसायनों ने प्रदेश की माटी को अन्नदाताओं के लहू से लाल कर दिया है। ‘Expose Now’ की विशेष खोजी पड़ताल में पुलिस मुख्यालय और कृषि विभाग के वे गोपनीय आंकड़े हाथ लगे हैं, जिन्हें देखकर शासन-प्रशासन के होश उड़ जाएंगे। पिछले महज 36 महीनों के भीतर राज्य में 1,383 किसान पेस्टीसाइड के खतरनाक साइड-इफेक्ट्स और छिड़काव के दौरान ज़हर फैलने की वजह से अकाल मौत के आगोश में समा चुके हैं। यानी औसतन हर दिन एक अन्नदाता की जान यह ‘कातिल रसायन’ लील रहा है। खेतों में सुरक्षा साधनों के बिना बेचे जा रहे प्रतिबंधित ‘ऑफ-लेबल’ कीटनाशकों का यह जानलेवा खेल अब सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारी-आपकी थाली में परोसे जा रहे अनाज के जरिए समूची आबादी के स्वास्थ्य पर मंडराता हुआ सबसे बड़ा जैविक खतरा बन चुका है।

बिना सुरक्षा किट और जागरूकता का अभाव बना काल:-

खेतों में फसलों को कीटों से बचाने के लिए उपयोग किए जा रहे जहरीले रसायनों का छिड़काव करते समय किसान खुद मौत के आगोश में समा रहे हैं। छिड़काव के दौरान मास्क, दस्ताने और पीपीई किट जैसे आवश्यक सुरक्षा मानकों को न अपनाने तथा रसायनों के अविवेकपूर्ण उपयोग के कारण सांस और त्वचा के जरिए ज़हर शरीर में फैल जाता है। पुलिस विभाग द्वारा जुटाए गए आंकड़े बताते हैं कि 2023 से 2025 के बीच 1383 किसानों ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ा है।

खाद्य सामग्री में घुल रहा ज़हर, ऑफ-लेबल रसायनों का धड़ल्ले से इस्तेमाल:-

जांच में सामने आया है कि खुदरा दुकानों, कृषि मंडियों और फार्म गेट से लिए गए खाद्य नमूनों की जांच में निर्धारित मानकों (FSSAI) से कहीं अधिक पेस्टीसाइड अवशेष पाए गए हैं। इससे भी चिंताजनक बात यह है कि जिन फसलों के लिए जो रसायन अनुमोदित ही नहीं हैं, व्यापारी अधिक मुनाफे के चक्कर में उन “ऑफ-लेबल” कीटनाशकों को किसानों को धड़ल्ले से बेच रहे हैं।

पश्चिम राजस्थान बना ‘डेथ ज़ोन’ — बीकानेर, हनुमानगढ़ व चूरू शीर्ष पर:-

मौतों के आंकड़ों का ज़िलेवार विश्लेषण करने पर एक डरावना सच सामने आता है। नहरी बेल्ट और अत्यधिक खेती वाले जिलों में कीटनाशकों का तांडव सबसे ज्यादा है। अकेले बीकानेर जिले में 3 सालों में 227 किसानों की जान गई। इसी प्रकार हनुमानगढ़ में 192, चूरू में 122 और अजमेर में 79 किसानों की मौत दर्ज की गई है।

बायो-पेस्टीसाइड योजनाएं नाकाफी, ज़हरीली खेती का कारोबार हावी:-

यद्यपि दावों के मुताबिक बीते 3 वर्षों में 3.35 लाख किसानों को 90% अनुदान पर बायो-पेस्टीसाइड किट बांटी गई हैं, लेकिन हकीकत यह है कि घातक केमिकल पेस्टीसाइड का कारोबार फल-फूल रहा है। 2023 में 467 मौतों से शुरू हुआ यह आंकड़ा 2024 में 439 हुआ, लेकिन 2025 में बढ़कर रिकॉर्ड 477 तक पहुंच गया — जो योजनाओं की जमीनी नाकामी को दर्शाता है। रसायनों के इस भयावह इस्तेमाल पर नकेल कसने के लिए जब रसायनों की सीमित बिक्री (राशनिंग) की बात उठी, तो प्रशासनिक ढर्रे ने इसे खारिज कर दिया। प्रशासन का तर्क है कि कीटनाशकों का उपयोग केवल “आर्थिक दहलीज स्तर” (ETL) के आधार पर करने की सलाह दी जाती है, इसलिए बिक्री पर राशनिंग की जरूरत नहीं है। सवाल यह उठता है कि जब धरातल पर किसान रोज़ मर रहे हैं, तो केवल कागजी सलाह के भरोसे मौतों को कैसे रोका जा सकता है?

ज़िलेवार पेस्टीसाइड हादसों एवं मौतों की पूरी कुंडली:-

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब मौतों का यह डरावना आंकड़ा 1,383 तक पहुंच चुका है और वर्ष 2025 में मौतों की संख्या घटने के बजाय रिकॉर्ड 477 हो गई है, तब भी शासन-प्रशासन सिर्फ ‘जागरूकता कार्यक्रमों’ और ‘सलाह’ की आड़ में क्यों छिप रहा है? गैर-अनुशंसित और घातक कीटनाशक बेचने वाले मुनाफाखोरों के सिंडिकेट पर नकेल कसने तथा पेस्टीसाइड की अंधाधुंध बिक्री पर कड़े नियम या राशनिंग लागू करने में आखिरकार किसकी मिलीभगत आड़े आ रही है? अगर वक्त रहते इस ‘सफेद ज़हर’ के बेलगाम कारोबार पर सख्त कानूनी हथौड़ा नहीं चलाया गया, तो आने वाले दिनों में राजस्थान का खेत-खलिहान केवल फसलों की पैदावार का नहीं, बल्कि हर घर की थाली में जहर परोसने से होने वाली कैंसर सहित अन्य गंभीर बीमारियों के साथ ही बेकसूर अन्नदाताओं की जलती चिताओं का गवाह बनता रहेगा।

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now


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