-राजस्थान में भगवान की लगभग 15,000 बीघा देव भूमि पर भू-माफियाओं और रसूखदारों का डेरा, कई जगह पुजारियों ने अवैध तरीके से बेच दी ‘देव भूमि’ की जमीनें
-जयपुर, कोटा, अजमेर, उदयपुर से लेकर भीलवाड़ा तक फैली हैं कब्जेदारों की जड़ें, देवस्थान विभाग के दस्तावेज से खुली पोल
-पुजारियों से लेकर दबंगों तक का कब्जा, राजस्थान के अलावा यूपी और उत्तराखंड में भी अतिक्रमित हैं देवस्थान संपत्तियां
-बेदखली के नोटिस और धारा-91 की कार्रवाई कागजों में सुस्त, हाईकोर्ट और राजस्व मंडल में उलझे सैकड़ों मामले
जयपुर। राजस्थान में आस्था के केंद्र और भगवान के घर भी भू-माफियाओं की नियत से सुरक्षित नहीं हैं। प्रदेश भर के प्रमुख मंदिरों और धार्मिक स्थलों के अधीन आने वाली अरबों-खरबों रुपये की कीमती कृषि व अचल संपत्तियों पर भू-माफियाओं, रसूखदारों और वंशानुगत पुजारियों ने अवैध कब्जे जमा रखे हैं। देवस्थान विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से चौंकाने वाला सच सामने आया है। विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में 3,740 हेक्टेयर से अधिक (लगभग15,000 बीघा) देव भूमि पर अवैध अतिक्रमण और कब्जे बने हुए हैं। यह जमीन प्रदेश भर के प्रमुख संभागीय वृत्तों में फैली हुई है, जहां सरकारी तंत्र बेदखली के नाम पर केवल नोटिसबाजी में उलझा हुआ है।
कुल कब्जे का आंकड़ा, किस संभाग में कितनी जमीन पर माफियाओं का कब्जा?
देवस्थान विभाग के जिलेवार व वृत्तवार आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में मंदिर जमीनों पर अतिक्रमण की स्थिति निम्नलिखित है:-
- अजमेर संभाग (भीलवाड़ा, अजमेर, टोंक): कुल 1,703.99 हेक्टेयर
-यह संभाग देव भूमियों पर कब्जे का सबसे बड़ा गढ़ बना हुआ है, जहां दर्ज 1,900.07 हेक्टेयर में से 1,703.99 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा है।
-टोंक के मंदिर श्री भूतेश्वर जी की 619.13 हेक्टेयर और किशनगढ़ (अजमेर) के मंदिर श्री मदनमोहन जी की 1,070.10 हेक्टेयर भूमि पर अन्य अतिक्रमियों ने कब्जा जमा रखा है।
- उदयपुर एवं वागड़ अंचल: कुल 1,034.23 हेक्टेयर
-सहायक आयुक्त (उदयपुर): 845.3676 हेक्टेयर जमीन पर कब्जे और मुकदमों का जाल है। ठाकुर जी श्याम सुंदर जी (उदयपुर) की 202.52 हेक्टेयर, चारभुजा जी (गढ़बोर, राजसमंद) की 146.51 हेक्टेयर और विजयराघव जी (प्रतापगढ़) की 108.46 हेक्टेयर भूमि अतिक्रमित है।
-ऋषभदेव वृत्त (उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर): 188.87 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा दर्ज है।
- कोटा संभाग (बूंदी, कोटा, बारां, झालावाड़): कुल 795.25 हेक्टेयर
-बूंदी जिला: 324.21 हेक्टेयर भूमि अतिक्रमित है (मं. श्री गोविन्दनाथ जी, जावटी कला की 52.04 हेक्टेयर शामिल)।
-बारां जिला: 267.36 हेक्टेयर भूमि पर अवैध कब्जा।
-झालावाड़ जिला: 149.05 हेक्टेयर देव भूमि पर कब्जा।
-कोटा जिला: 54.63 हेक्टेयर जमीन अतिक्रमित है।
- जयपुर और भरतपुर संभाग: कुल 248.30 हेक्टेयर
-जयपुर-द्वितीय (झुंझुनूं/अलवर): 191.21 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा है, जिसमें खेतड़ी के रघुनाथ जी चूड़ावत मंदिर की 93.67 हेक्टेयर भूमि प्रमुख है।
-जयपुर-प्रथम (दौसा क्षेत्र): दौसा के श्री सीताराम जी (बालाहेड़ी) की 57.09 हेक्टेयर भूमि पर दर्जनों लोगों का कब्जा है।
-करौली-सवाई माधोपुर: नृसिंह जी (जीरोता) की 15.93 हेक्टेयर और रघुनाथ जी (गंगापुरसिटी) की 11.37 हेक्टेयर भूमि कब्जे में है।
- बीकानेर संभाग: कुल 171.61 हेक्टेयर
बीकानेर व चूरू में प्रत्यक्ष प्रभार के मंदिरों (करणी जी तारानगर, लालेश्वर महादेव बीकानेर) की 171.61 हेक्टेयर कृषि भूमि विभिन्न अदालती मुकदमों और कब्जों में फंसी है।
राज्य के बाहर भी भू-माफियाओं की गिद्ध दृष्टि, यूपी और उत्तराखंड में भी मुकदमे:-
राजस्थान सरकार के देवस्थान विभाग का अधिकार क्षेत्र राज्य के बाहर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मंदिरों व धर्मशालाओं तक फैला है, जहां भी कीमती जमीनों पर अवैध कब्जे की नीयत से केस चल रहे हैं:
-वृन्दावन व मथुरा (यूपी): राधामाधव जी तथा मोहन जी कुंज (मथुरा) की जमीनों पर कब्जे को लेकर सिविल जज मथुरा और आगरा कमिश्नरी में कई केस लंबित हैं।
-नैनीताल (उत्तराखंड): लल्ली स्मारक बाग (भुवाली) की रिक्त जमीनों पर बेदखली की कानूनी जंग जारी है।
कागजों में बेदखली का दावा, धरातल पर सुस्त प्रशासनिक कार्रवाई:-
दस्तावेजों के अनुसार, देवस्थान विभाग अचल संपत्तियों के लिए राजस्थान सार्वजनिक स्थान (अप्राधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम, 1964 और कृषि भूमियों के लिए राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम की धारा-91 के तहत तहसीलदारों को कार्रवाई के लिए लिखता है। जबकि, असलियत यह है कि अधिकांश मामलों में या तो सर्वे रिपोर्ट पेंडिंग पड़ी है, या फिर फाइलें राजस्व मंडल (अजमेर), राजस्थान हाईकोर्ट और एसडीएम कोर्ट में तारीखों के फेर में फंसी हुई हैं, जिसके चलते देव भूमि पर भू-माफियाओं का शिकंजा बरकरार है। देवस्थान विभाग के ये आंकड़े सिर्फ जमीन पर कब्जे की कहानी नहीं बयान करते, बल्कि प्रशासनिक नाकामी और लचर पैरवी की भी पोल खोलते हैं। जब भगवान की भूमि को बचाने के लिए बनाए गए कानून (धारा-91 और बेदखली अधिनियम 1964) केवल नोटिसों और फाइलों के ढर्रे पर सिमट कर रह जाएं, तो समझ आता है कि भू-माफियाओं के हौसले बुलंद क्यों हैं।
सवाल यह उठता है कि:
-आखिर सालों-साल से अदालती मुकदमों और सर्वे रिपोर्ट के नाम पर फाइलों को क्यों अटकाया जा रहा है?
-क्या स्थानीय राजस्व अधिकारियों और भू-माफियाओं के बीच कोई अंदरूनी सांठगांठ चल रही है, जिसके चलते बेदखली के आदेश केवल कागजों तक सीमित हैं?
-क्या प्रदेश की ‘देव भूमि’ को भू-माफियाओं के चंगुल से छुड़ाने के लिए कोई सख्त और विशेष अभियान चलाया जाएगा, या फिर आस्था के ये केंद्र ऐसे ही रसूखदारों के कब्जे में पिसते रहेंगे?
‘Expose Now’ इस पूरे महा-घोटाले और देव भूमियों पर चल रहे अवैध कब्जों की पल-पल की रिपोर्ट आप तक पहुंचाता रहेगा। देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इन आंकड़ों के उजागर होने के बाद जा गता है या फिर भू-माफियाओं का यह खेल यूं ही निर्बाध जारी रहेगा!
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now
