चित्तौड़गढ़/उदयपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की उदयपुर स्पेशल यूनिट (SU) ने चित्तौड़गढ़ में केंद्र सरकार के अधीन आने वाले विभाग में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई को अंजाम दिया है । एसीबी की टीम ने चंदेरिया स्थित कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC – श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार) के शाखा कार्यालय में दबिश देकर महिला मैनेजर (शाखा प्रबंधक) श्रीमती संदीपा वोहरा को परिवादी से ₹10,000 की नगद रिश्वत राशि लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है ।
शातिर महिला अधिकारी ने रिश्वत के पैसे लेकर अपने लेडीज हैंडबैग के अंदर चैन वाली सीक्रेट जेब में छिपा दिए थे, जिसे स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में बरामद किया गया ।
लकवाग्रस्त श्रमिक के मेडिकल बिल और छुट्टियों के पैसों पर अटकी थी घूस
यह मामला एक गरीब श्रमिक की बेबसी और विभाग की संवेदनहीनता से जुड़ा है । महाराज का मंडपिया निवासी परिवादी सत्यनारायण गाडरी के 24 वर्षीय भतीजे दिनेश कुमार गाडरी हिंदुस्तान जिंक चंदेरिया में लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड (L&T) कंपनी के तहत हेल्पर के पद पर कार्यरत थे । 23 अगस्त 2025 को ड्यूटी के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पैरालिसिस (लकवा) मार गया, जिसके बाद भीलवाड़ा के रामस्नेही अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है ।
दिनेश कुमार का नियमित रूप से ईएसआईसी (ESIC) बिमा कवर कटता था । उनके 9 महीने से पेंडिंग पड़े मेडिकल बिलों के भुगतान, क्लेम पास करने और मेडिकल छुट्टियों (लीव) के पैसे जारी करने की एवज में एलएंडटी कंपनी के एचआर मैनेजर मनोज सुखवाल और सत्यनारायण गाडरी से ईएसआईसी की शाखा प्रबंधक श्रीमती संदीपा वोहरा द्वारा लगातार ₹40,000 की रिश्वत मांग कर परेशान किया जा रहा था ।
एसीबी अधिकारियों की ‘सूत्र सूचना’ और जाल
उदयपुर एसीबी (S.U.) के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजीव जोशी को इस गंभीर भ्रष्टाचार की खुफिया ‘सूत्र सूचना’ (इंटेलिजेंस) मिली थी । इसके बाद एसीबी टीम ने पीड़ित सत्यनारायण और कंपनी के एचआर मैनेजर मनोज सुखवाल से संपर्क साधा । 26 मई 2026 को शिकायत का पहला लिखित परिवाद पुलिस उप निरीक्षक मोहम्मद जाबीर के समक्ष प्रस्तुत किया गया ।
ईद की छुट्टी और टालमटोल के बाद 29 मई को हुआ सत्यापन
जब 26 मई को एसीबी टीम चंदेरिया पहुंची, तो पता चला कि संदीपा वोहरा दो दिन के अवकाश पर हैं और 28 मई को ईद का सरकारी अवकाश होने के कारण वह कार्यालय में नहीं मिलेंगी । इसके बाद, 29 मई 2026 को रीको तिराहा के पास परिवादी को डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर देकर ईएसआईसी कार्यालय भेजा गया । वहाँ संदीपा वोहरा ने क्लेम पास करने की एवज में रिश्वत की राशि को घटाकर ₹10,000 फाइनल किया और अगले ही दिन 30 मई को पैसे लेकर कार्यालय बुलाया, जो रिकॉर्डर में दर्ज हो गया ।
कपासन पुलिया पर लाउडस्पीकर फोन कॉल और ट्रैप की व्यूहरचना
30 मई 2026 की सुबह उदयपुर जिला परिषद के दो स्वतंत्र गवाहों (कनिष्ठ सहायक पुष्कर जोशी और सहायक विकास अधिकारी आशीष कुमार वैष्णव) की मौजूदगी में केमिकल पाउडर लगे ₹10,000 तैयार किए गए । चित्तौड़गढ़ कलेक्ट्री के पास परिवादी ने जब संदीपा वोहरा को कॉल किया, तो उन्होंने खुद को बाहर होना बताते हुए 1 घंटे बाद बुलाया ।
दोपहर में जब दोबारा परिवादी दफ्तर गया तो वह सीट पर नहीं मिलीं। इसके बाद पूरी एसीबी टीम एकांत स्थान ‘कपासन पुलिया’ के पास गाड़ियों को रोककर महिला अधिकारी के आने का इंतजार करने लगी। दोपहर करीब 3:27 बजे संदीपा वोहरा का वापस कॉल आया और उन्होंने परिवादी को तुरंत दफ्तर बुलाया।
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लेडीज पर्स से बरामद हुए नोट, धुलवाए हाथ तो रंग हुआ ‘गुलाबी’
दोपहर करीब 03:55 बजे परिवादी ₹10,000 लेकर संदीपा वोहरा के चेंबर में पहुंचा। पैसे लेते ही परिवादी ने सिर पर हाथ फेरकर और मिस-कॉल देकर एसीबी को पूर्व निर्धारित इशारा कर दिया। पुलिस निरीक्षक लक्ष्मण लाल डांगी के नेतृत्व में जब टीम ने चेंबर में दबिश दी, तो महिला मैनेजर गेट के पास खड़ी मिल । महिला कांस्टेबल आशा कुमारी ने तुरंत उनका बांया हाथ कलाई से पकड़ लिया ताकि वह सबूत नष्ट न कर सकें।
कड़ाई से पूछने पर आरोपी संदीपा वोहरा ने कोई जवाब नहीं दिया और बकवास करने लगी कि— “मैने पैसे मांगे नहीं, इन्होंने खुद ऑफर किए थे, वीडियो रिकॉर्डिंग बंद करो, मुझे गलत फंसाया जा रहा है।” हालांकि, तलाशी लेने पर उनके काले रंग के लेडीज हैंडबैग की अंदरूनी चेन वाली जेब से ₹500-500 के कुल 20 नोट (₹10,000) सही-सलामत बरामद हो गए, जिनका मिलान गवाह आशीष कुमार ने किया।
इसके बाद जब सोडियम कार्बोनेट के पारदर्शी घोल में आरोपी महिला अधिकारी के दोनों हाथों की उंगलियों को डुबोकर धुलवाया गया, तो घोल का रंग तुरंत हल्का गुलाबी झाईदार हो गया। इसके बाद उनके लेडीज बैग की खाली जेब को भी जब केमिकल घोल में डुबोया गया, तो पूरा घोल गहरा गुलाबी हो गया, जो घूसखोरी का सबसे बड़ा वैज्ञानिक प्रमाण बना।
सिस्टम ऑन करवाकर एसीबी ने लिया क्लेम का प्रिंट, आरोपी जेल में बंद
गिरफ्तारी के बाद एसीबी ने संदीपा वोहरा से पीड़ित दिनेश गाडरी की मूल फाइल के बारे में पूछा। उन्होंने काले रंग के शोल्डर बैग से फाइल निकाल कर दी और कहा कि— “पेमेंट बना हुआ है, ऑनलाइन चेक कर लो।” इंटरनेट कनेक्टिविटी सुचारू करवाने के बाद, एसीबी ने उनके दफ्तर के सरकारी कंप्यूटर पर उनकी ही आधिकारिक आईडी (Login ID) से लॉगिन करवाकर ईएसआईसी (ESIC) वेबपोर्टल पर पेंडिंग पड़े क्लेम अपडेशन का स्टेटस चेक किया और साक्ष्य के रूप में उसका बकायदा प्रिंटआउट निकाल कर रिकॉर्ड में शामिल किया।
एसीबी के पुलिस अधीक्षक सुनील सिहाग के आदेशानुसार आरोपी संदीपा वोहरा (उम्र 56 वर्ष, मूल निवासी तिलक नगर, जयपुर हाल शाखा प्रबंधक चित्तौड़गढ़) के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत एफआईआर संख्या 143/2026 दर्ज की गई है। अदालत में पेश किए जाने के बाद आरोपी महिला अधिकारी को न्यायिक अभिरक्षा (JC) के आदेश पर केंद्रीय कारागृह (सेंट्रल जेल) उदयपुर भेज दिया गया है। इस बड़े मामले की आगामी विस्तृत जांच प्रतापगढ़ एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम सिंह परमार को सौंपी गई है ।