Expose Now स्पेशल इन्वेस्टिगेशन: गरीबों के निवाले पर सरकारी सिस्टम का ‘डाका’, राजस्थान में 636 राशन डीलरों ने डकारा हजारों क्विंटल गेहूं, 615 से अब तक नहीं हुई वसूली!

-POS मशीन में रिकॉर्ड ‘ओके’, गोदाम से गायब मिला 100-100 क्विंटल से ज्यादा गेहूं, राशन माफिया और अफसरों की मिलीभगत उजागर
-636 में से 244 पर सिर्फ कागजी FIR, 5 साल पुराने वसूली कानून (PDR Act) के बावजूद महज 21 डीलरों से हो पाई रिकवरी
-बारां, फलोदी, बांसवाड़ा और दौसा बने गबन के सबसे बड़े गढ़, निलंबन और निरस्तीकरण की फाइलों में दबा अरबों का खाद्यान्न घोटाला

जयपुर। राजस्थान में गरीबों की थाली तक पहुंचने वाला निवाला किस तरह राशन माफिया और लापरवाह सिस्टम की भेंट चढ़ रहा है, इसका सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सच सामने आया है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के सरकारी तंत्र में बैठे जिम्मेदारों की नाक के नीचे 636 राशन डीलरों ने हजारों क्विंटल गेहूं का गबन कर लिया। चौंकाने वाली बात यह है कि इन सभी उचित मूल्य दुकानदारों की पीओएस (POS) मशीन के रिकॉर्ड और भौतिक स्टॉक (Physical Stock) में 100-100 क्विंटल से अधिक गेहूं की भारी कमी (शॉर्टेज) पकड़ी गई है। लेकिन सिस्टम की संवेदनहीनता देखिए—इतने बड़े पैमाने पर गरीबों के राशन की डकैती होने के बावजूद भ्रष्ट डीलरों के खिलाफ सख्त वसूली की जगह पूरा मामला फाइलों में दबाया जा रहा है।

कागजी कार्रवाई तक सीमित सिस्टम, 636 में से सिर्फ 21 से वसूली:-

सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, खाद्यान्न वितरण में भारी अनियमितता और गबन उजागर होने के बाद विभाग ने कागजों पर 501 राशन डीलरों को निलंबित और 394 के प्राधिकार पत्र (लाइसेंस) निरस्त किए हैं। आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और राजस्थान खाद्यान्न विनियमन आदेश, 1976 के तहत कार्रवाई का दम भरने वाला विभाग वसूली के मोर्चे पर पूरी तरह पस्त नजर आ रहा है। वर्ष 2021 में बकायदा आदेश जारी कर ‘राजस्थान पब्लिक डिमांड्स रिकवरी (PDR) एक्ट, 1952’ के तहत गबन की राशि वसूलने के कड़े निर्देश दिए गए थे। मगर हकीकत यह है कि:

-कुल 636 दागी राशन डीलरों में से अब तक केवल 21 डीलरों से ही वसूली की जा सकी है।

-यानी 615 से अधिक राशन डीलर सरकारी गेहूं डकार कर खुलेआम घूम रहे हैं और विभाग उनसे एक धेला तक नहीं वसूल पाया है।

-विभाग ने मात्र 244 डीलरों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करवाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली।

गबन के सबसे बड़े ‘हॉटस्पॉट’, कहां कितना घोटाला:-

संपत्ति कुर्क करने की हिम्मत क्यों नहीं जुटा पा रहा प्रशासन:-

नियमों के तहत गबन करने वाले उचित मूल्य दुकानदारों की संपत्ति कुर्क करने और कड़े कानूनी प्रावधान लागू करने की व्यवस्था है। इसके बावजूद सवाल उठता है कि जब सैकड़ों क्विंटल अनाज का गबन खुले तौर पर साबित हो चुका है, तो राशन माफिया की संपत्तियां कुर्क कर जनता के पैसे की भरपाई क्यों नहीं की जा रही? हनुमानगढ़ जैसे जिलों में 32 दोषी दुकानों में से सिर्फ 1 पर कार्रवाई होना यह साफ दर्शाता है कि स्थानीय स्तर पर आपूर्ति निरीक्षकों और राशन माफिया के बीच कैसा गहरा गठजोड़ है। जब तक इस मिलीभगत की जड़ पर प्रहार नहीं होगा, तब तक गरीबों का निवाला कालाबाजारी के गोदामों में यूं ही बिकता रहेगा।

राशन डीलरों के साथ अफसरों की भी जवाबदेही हो तय:-

सरकारी फाइलों में बंद ये आंकड़े सिर्फ गेहूं की बोरियों की हेराफेरी भर नहीं हैं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था का पर्दाफाश करते हैं जो भ्रष्टाचारियों के आगे लाचार नजर आती है। जब 636 डीलरों का गबन पकड़ा जा चुका है, तो 615 डीलरों को खुली छूट और महज 21 से वसूली सीधे तौर पर प्रशासन की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करती है। अब केवल निलंबन या नोटिस जारी करने की खानापूर्ति से काम नहीं चलेगा। सरकार को चाहिए कि:

-दोषी पाए गए सभी डीलरों के खिलाफ बिना किसी रियायत के तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।

-‘राजस्थान पब्लिक डिमांड्स रिकवरी एक्ट (PDR Act)’ को सख्ती से जमीन पर लागू कर आरोपियों की निजी संपत्तियों की कुर्की शुरू हो।

-उन लापरवाह और मिलीभगत में शामिल विभागीय अधिकारियों पर भी सीधी गाज गिरे, जिनकी नाक के नीचे सालों से यह काला खेल बेरोकटोक जारी रहा।

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now


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