करौली: 32 हजार जमा करने के बाद थमाया इतने का ही नया बिल, मण्डरायल में बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही

करौली/मण्डरायल: राजस्थान के करौली जिले के मण्डरायल कस्बे में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और तानाशाही रवैये से आम जनता और उपभोक्ता बेहद परेशान हैं। विभाग की लापरवाही का एक ऐसा ही ताजा और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक गरीब महिला द्वारा 32 हजार रुपये का बिजली बिल जमा कराने के बावजूद उसे दोबारा से 32 हजार रुपये का ही भारी-भरकम बिल थमा दिया गया है। बिल ठीक करवाने के लिए जब पीड़िता स्थानीय कार्यालय पहुंची, तो अधिकारियों ने उसकी समस्या सुनने के बजाय उसे जिला मुख्यालय के चक्कर काटने के लिए मजबूर कर दिया।

दोबारा बिल आने से गरीब परिवार सदमे में

पीड़ित महिला ऊगन्ती माली ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि उसने आर्थिक तंगी के बावजूद किसी तरह व्यवस्था कर अपना 32,000 रुपये का पिछला बिजली बिल विभाग में जमा कराया था। उसे उम्मीद थी कि बिल जमा होने के बाद उसका खाता अपडेट हो जाएगा और उसे राहत मिलेगी। लेकिन कुछ ही दिनों बाद विभाग ने उसे फिर से 32,000 रुपये का नया बिल थमा दिया।

जब पीड़िता इस भारी-भरकम और फर्जी प्रतीत होने वाले बिल में संशोधन की गुहार लेकर मण्डरायल स्थित सहायक अभियंता (AEN) कार्यालय पहुँची, तो आरोप है कि वहां मौजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने उसकी एक नहीं सुनी। पीड़िता का आरोप है कि उसे बिना कोई राहत दिए कार्यालय से बैरंग वापस लौटा दिया गया।

35 किलोमीटर दूर करौली जाने का दिया जा रहा फरमान

स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि मण्डरायल क्षेत्र के आम नागरिकों को छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऊगन्ती माली को जब स्थानीय कार्यालय में राहत नहीं मिली, तो अधिकारियों ने उसे अधिशासी अभियंता (XEN) कार्यालय करौली जाने की बात कहकर टाल दिया। गौरतलब है कि मण्डरायल से जिला मुख्यालय करौली की दूरी करीब 35 किलोमीटर है। एक गरीब महिला के लिए बार-बार 35 किलोमीटर दूर जाकर अधिकारियों के चक्कर काटना आर्थिक और शारीरिक रूप से बेहद कठिन साबित हो रहा है।

उपभोक्ताओं में रोष: मीटर लगे ग्राहकों पर थोपा जा रहा है चोरी का भार

यह अकेली ऊगन्ती माली की समस्या नहीं है, बल्कि मण्डरायल कस्बे के कई अन्य उपभोक्ताओं ने भी बिजली विभाग के खिलाफ जमकर आक्रोश जताया है। लोगों का आरोप है कि विभाग लंबे समय से उपभोक्ताओं को अनाप-शनाप और बढ़े हुए बिजली बिल भेज रहा है।

ग्रामीणों और कस्बेवासियों का यह भी आरोप है कि क्षेत्र में हो रही वास्तविक बिजली चोरी पर नकेल कसने के बजाय, विभाग नियमित रूप से बिल भरने वाले ईमानदार और गरीब उपभोक्ताओं को अपना निशाना बना रहा है। मीटर लगे घरों में जबरन भारी-भरकम बिल थोपे जा रहे हैं, जबकि विभागीय अधिकारी शिकायतों के बावजूद इस और कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।

मीडिया के फोन उठाने से कतरा रहे जिम्मेदार अधिकारी

इस पूरे मामले पर बिजली निगम के जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष जानने के लिए जब मीडियाकर्मियों द्वारा संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो अधिकारियों ने फोन उठाने तक से किनारा कर लिया। इससे विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली और संवेदनहीनता पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा होता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किस तकनीकी या मानवीय त्रुटि के आधार पर 32 हजार रुपये जमा होने के बाद दोबारा से उतना ही बिल जारी कर दिया गया? क्या बिजली विभाग के उच्च अधिकारी इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर पीड़िता का बिल संशोधित करेंगे, या फिर एक गरीब उपभोक्ता को न्याय के लिए यूं ही अधिकारियों के दर-दर भटकना पड़ेगा?


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