करौली: राजस्थान के करौली जिले के गुढ़ाचंद्रजी ब्लॉक में तैनात दंत चिकित्सक एवं BCMO जगराम मीना के खिलाफ गंभीर वित्तीय अनियमितताओं, आचार संहिता उल्लंघन और प्रशासनिक लापरवाही के मामलों में लगातार सवाल उठ रहे हैं। ऑडिट जांच में 33 लाख रुपए के कथित गबन की पुष्टि होने और तमाम सबूत मिलने के बावजूद आरोपी चिकित्सक पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना चिकित्सा विभाग की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर रहा है।
ऑडिट जांच में खुलासे और प्रशासनिक सुस्ती



33 लाख का वित्तीय गबन: नवंबर 2025 में चिकित्सा निदेशालय के निर्देश पर हुई गुढ़ाचंद्रजी BCMO कार्यालय की ऑडिट जांच में करीब 33 लाख रुपए की वित्तीय अनियमितता और गबन की पुष्टि हुई थी।
आचार संहिता उल्लंघन: जिला निर्वाचन विभाग द्वारा दंत चिकित्सक को आचार संहिता उल्लंघन के मामले में पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका है।
दबाए जाने के आरोप: आरोप है कि 8 अप्रैल को निदेशालय द्वारा जारी कार्रवाई का पत्र स्थानीय सीएमएचओ कार्यालय स्तर पर दबा लिया गया और आरोपी को काफी समय बाद (29 जून को) इसकी जानकारी दी गई।

कार्यवाहक सीएमएचओ डॉ. सतीश चंद्र मीना की भूमिका पर सवाल
मामले में कार्यवाहक सीएमएचओ डॉ. सतीश चंद्र मीना की कार्यशैली को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग के कार्मिकों और गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि जहां एक ओर कार्यवाहक सीएमएचओ द्वारा एक जूनियर चिकित्सक को अपने लेटरपैड पर अभिशंसा कर RCHO का दायित्व सौंपा जा सकता है, वहीं दूसरी ओर गंभीर आरोपों से घिरे दंत चिकित्सक के खिलाफ निदेशालय को कार्रवाई की कड़ी अनुशंसा भेजने से बचा जा रहा है।
चर्चा यह भी है कि डॉ. सतीश चंद मीणा वर्तमान में स्थायी सीएमएचओ के पद की दौड़ में शामिल हैं और इस खातिर रसूखदार नेताओं से संपर्क साधने में जुटे हैं। कार्मिकों का मानना है कि इसी राजनीतिक और प्रशासनिक संतुलन के चलते वे किसी भी अधिकारी के खिलाफ खुलकर सख्त कदम उठाने से कतरा रहे हैं।

महिला कार्मिकों के प्रताड़ना के आरोप और अन्य शिकायतें
वित्तीय गड़बड़ियों के अलावा, क्षेत्र में कार्यरत एक महिला कार्मिक द्वारा दंत चिकित्सक पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाते हुए निदेशक जन स्वास्थ्य डॉ. रविप्रकाश के समक्ष गुहार लगाने का मामला भी सामने आया था। इसके अलावा, एक सेवानिवृत्त कार्मिक ने भी पेंशन संबंधी प्रकरण में प्रताड़ना की शिकायत 181 संपर्क पोर्टल पर दर्ज कराई थी। पूर्व BCMO डॉ. राजेश मीना द्वारा इस पूरी भ्रष्टाचार सूची को आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप पर साझा किए जाने के बाद विभाग में खलबली मच गई है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि भजनलाल शर्मा सरकार और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर मामले में क्या निष्पक्ष और निर्णायक कदम उठाता है।
