‘लेडी डॉन’ का खौफनाक अंत! बचपन से प्रताड़ित बेटे और खौफ में जी रहे पति ने मिलकर घोंटा मिंटू चौधरी का गला

मुहाना इलाके के 15 माह पुराने ब्लाइंड मर्डर केस का सनसनीखेज खुलासा; पति और बेटे ने ही की थी मिंटू चौधरी की हत्या

​घरेलू प्रताड़ना, खौफ और अवैध संबंधों के शक में वारदात को अंजाम; कंबल में लपेटकर कुएं में फेंका था शव, गुमराह करने दर्ज कराई थी झूठी गुमशुदगी

​जयपुर। राजधानी जयपुर के मुहाना थाना क्षेत्र में पिछले डेढ़ साल (15 माह) से उलझे मिंटू चौधरी हत्याकांड (ब्लाइंड मर्डर केस) का जयपुर साउथ (दक्षिण) जिला पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। जिस महिला की गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस थाने में दर्ज थी और परिजन जिसकी तलाश का नाटक कर रहे थे, उसकी हत्या किसी बाहरी अपराधी ने नहीं, बल्कि उसके अपने ही सगे पति और बेटे ने मिलकर की थी। पुलिस ने तत्परता और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपी पति लालाराम चौधरी (42) और बेटे हरिओम चौधरी (20) को गिरफ्तार कर लिया है।

​जयपुर दक्षिण के पुलिस उपायुक्त (DCP) राजर्षि राज (IPS) ने प्रेस वार्ता के दौरान इस सनसनीखेज वारदात का ब्योरा साझा किया। पुलिस जांच में सामने आया कि घरेलू हिंसा, प्रताड़ना, खौफ, आपसी विवाद और चरित्र पर संदेह के चलते बाप-बेटे ने मिलकर इस हत्याकांड को अंजाम दिया था। हत्या के बाद शव को एक सूखे कुएं में फेंक दिया गया था और पुलिस को गुमराह करने के लिए दो महीने बाद स्वयं आरोपी बेटे ने ही थाने पहुंचकर झूठी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

​बलखण्डी बालाजी चौराहे के पास कुएं से बरामद हुआ था कंकाल/शव

​घटनाक्रम के अनुसार, बुधवार को मुहाना थाना क्षेत्र स्थित बलखण्डी बालाजी चौराहे के पास (अचरावाला गांव के पास) एक गहरे और सुनसान सूखे कुएं में महिला का सड़-गल चुका शव बरामद हुआ था। शव लंबे समय से कुएं में पड़े रहने के कारण पूरी तरह से डीकंपोज (विघटित) हो चुका था। ​घटना की सूचना मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया और स्थानीय ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों का जमावड़ा लग गया। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए। शव पर मौजूद कपड़ों और अन्य अवशेषों के आधार पर परिजनों ने उसकी पहचान मिंटू चौधरी उर्फ सीमा चौधरी के रूप में की। इसके बाद पुलिस ने धारा 109(1), 238ए बीएनएस (BNS) के तहत मामला पंजीकृत कर गहन तफ्तीश शुरू की।

​विशेष पुलिस टीम का गठन और ब्लाइंड मर्डर का सुराग

​मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त जयपुर दक्षिण ललित कुमार शर्मा के निर्देशन एवं सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) मानसरोवर हेमेन्द्र शर्मा के सुपरविजन में एक विशेष टीम का गठन किया गया। इस टीम में मुहाना थानाधिकारी मुकेश खारेड़िया, DST प्रभारी विश्वांबर पूनिया, हेड कांस्टेबल गंगाराम, देवेंद्र कुमार और साइबर सेल के विशेषज्ञों को शामिल किया गया। ​जांच के दौरान DST टीम के कांस्टेबल देवेंद्र (10057) और हेड कांस्टेबल गंगाराम को मुखबिर तंत्र व तकनीकी अनुसंधान के माध्यम से अहम सुराग मिले। जब संदिग्धों से गहन पूछताछ की गई, तो पति लालाराम और बेटे हरिओम के बयानों में भारी विरोधाभास नजर आया। पुलिस ने जब तकनीकी साक्ष्यों के साथ सख्ती से पूछताछ की, तो दोनों टूट गए और अपना जुर्म कबूल कर लिया।

​हत्या की वजह, बचपन से प्रताड़ना, बेल्ट से पिटाई और गैंग का डर

​पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने जो खुलासे किए, वे बेहद हैरान करने वाले हैं। आरोपी बेटे हरिओम और पति लालाराम के दिल में मिंटू चौधरी के प्रति बेहद घृणा और खौफ भरा हुआ था। आरोपी हरिओम ने बताया कि उसकी माँ मिंटू चौधरी उसे बचपन से ही बेल्टों से पीटती थी और प्रताड़ित करती थी। यहाँ तक कि वह कई बार उसे जबरन शराब भी पिलाया करती थी। मृतक महिला अपने पति लालाराम के साथ भी बेल्टों से मारपीट करती थी। पति लालाराम अपनी पत्नी से बेहद डरता था। उसे हर वक्त यह खौफ सताता रहता था कि मिंटू चौधरी अपने किसी गैंग या साथियों के साथ मिलकर कभी भी उसकी हत्या करवा सकती है। इसके अलावा, लालाराम को अपनी पत्नी के आचरण और अवैध संबंधों पर भी गहरा संदेह था। इन्हीं सब कारणों से तंग आकर दोनों बाप-बेटे ने उसे रास्ते से हटाने की साजिश रची।

​शराब के नशे में धुत्त थी मिंटू, बाप ने पैर पकड़े और बेटे ने घोंटा गला

​हत्या की रात के खौफनाक मंजर का खुलासा करते हुए पुलिस ने बताया कि घटना से ठीक पहले मिंटू चौधरी ने अत्यधिक शराब पी रखी थी और वह नशे में पूरी तरह धुत्त थी। बाप-बेटे ने इसी स्थिति का फायदा उठाने का फैसला किया।नशे में बेसुध पड़ी मिंटू चौधरी पर दोनों ने हमला कर दिया। पति लालाराम ने पत्नी के दोनों पैर कसकर पकड़ लिए ताकि वह छटपटा न सके, वहीं बेटे हरिओम ने अपने हाथों से माँ का गला घोंट दिया। हत्या के बाद साक्ष्य छुपाने के उद्देश्य से दोनों ने शव को एक कंबल में लपेटा और देर रात अंधेरे का फायदा उठाकर ऑटो रिक्शा में लादकर ले गए। उन्होंने गांव अचरावाला के बाहर स्थित एक गहरे सूखे कुएं में शव को फेंक दिया।

​तिहाड़ जेल की झूठी कहानी और गुमशुदगी का नाटक

​हत्या के बाद परिजनों और रिश्तेदारों से बचने के लिए आरोपियों ने एक झूठी कहानी गढ़ी। जब भी कोई मिंटू के बारे में पूछता, तो आरोपी कहते कि वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है या भरतपुर जेल में है।

​हालांकि, जब मिंटू की बहन ने दिल्ली और भरतपुर जेल प्रशासन से संपर्क किया, तो पता चला कि मिंटू नाम की कोई महिला वहां बंद नहीं है। जब आरोपियों का झूठ पकड़ा जाने लगा और रिश्तेदारों का दबाव बढ़ने लगा, तो पकड़े जाने के डर से आरोपी बेटे हरिओम ने थाने पहुंचकर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी, ताकि पुलिस और समाज की नजरों में वे बेकसूर साबित हो सकें।

​हत्या के बाद रचा ली थी दूसरी शादी

​जांच में यह बात भी सामने आई कि मिंटू चौधरी की हत्या करने के बाद दोनों आरोपी अपनी-अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गए थे। वारदात के लगभग 12 से 13 महीने बाद (लगभग 3 महीने पहले) पति लालाराम ने दूसरी शादी कर ली थी। इतना ही नहीं, बेटे हरिओम ने भी शादी कर ली थी। वे मान चुके थे कि उनका राज़ कभी सामने नहीं आएगा, लेकिन पुलिस की तकनीकी जांच और मुस्तैदी ने इस ब्लाइंड मर्डर का पर्दाफाश कर दिया।

​गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण:

​लालाराम चौधरी (उम्र 42 वर्ष), पुत्र स्वर्गीय धूथा राम, निवासी किशोरपुरा, पुलिस थाना मुहाना, जयपुर।
​हरिओम चौधरी (उम्र 20 वर्ष), पुत्र लालाराम चौधरी, निवासी किशोरपुरा, पुलिस थाना मुहाना, जयपुर।

लेडी डॉन’ बनने का खौफनाक सपना और मिंटू चौधरी का आपराधिक साम्राज्य

​ मुहाना मर्डर केस की मृतका मिंटू चौधरी केवल घरेलू विवाद की शिकार नहीं थी, बल्कि उसका एक बेहद खौफनाक और आपराधिक चेहरा भी था। पुलिस तफ्तीश में सामने आया कि मिंटू चौधरी की पहचान इलाके में एक बेखौफ और शातिर ‘लेडी डॉन’ के रूप में थी। उसके खिलाफ मारपीट, हथियार तस्करी (आर्म्स एक्ट) और अवैध शराब तस्करी सहित दर्जनों गंभीर आपराधिक मामले विभिन्न थानों में दर्ज थे।

गैंगस्टर लाइफस्टाइल, लड़कों जैसी हेयरस्टाइल और हथियार तस्करी से इलाके में मचा रखा था तहलका

मिंटू चौधरी खुद की एक अलग गैंग चलाती थी और इलाके में अपना खौफ पैदा करने के लिए माफिया और अपराधियों के संपर्क में रहती थी। उसका रहन-सहन और पहनावा आम महिलाओं जैसा नहीं था। डॉन बनने की सनक के चलते वह लड़कों जैसी हेयरस्टाइल रखती थी, पुरुषों जैसे कपड़े पहनती थी और हथियार लेकर घूमना उसकी आदत में शुमार था। मिंटू की आपराधिक गतिविधियों का असर उसके परिवार पर भी पड़ा। बेटा हरिओम बचपन से ही अपनी माँ की गुंडागर्दी और आपराधिक कारनामों को देखते हुए बड़ा हुआ।

​खौफ के साये में जी रहा था परिवार

​मिंटू चौधरी का डर इतना गहरा था कि उसका पति लालाराम और बेटा दोनों हर वक्त सहमे रहते थे। पुलिस के अनुसार, वह अपनी ही गैंग के साथ मिलकर पति को जान से मारने की धमकियां देती थी। ऐसा कोई अपराध नहीं था जिसमें उसका नाम न आया हो। इसी दहशत, लगातार प्रताड़ना और आपराधिक गतिविधियों से तंग आकर आखिरकार बाप-बेटे ने उसे रास्ते से हटाने का खौफनाक कदम उठा लिया।

​पुलिस टीम की भूमिका

​इस पेचीदा और अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझाने में DST जयपुर दक्षिण के हेड कांस्टेबल राजेश कुमार, रामसिंह, लोकेश कुमार, अजयपाल, राजवीर सिंह, देवेंद्र कुमार तथा मुहाना थाने के कान सिंह, भंवर लाल व साइबर सेल के जवानों ने विशेष भूमिका निभाई।

​डीसीपी राजर्षि राज ने बताया कि दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया जाएगा, ताकि वारदात में इस्तेमाल किए गए ऑटो और अन्य साक्ष्यों को बरामद किया जा सके।


👇 हमारी मुहिम से जुड़ें:

🛑 भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करें!

क्या आपके पास किसी घोटाले की पुख्ता जानकारी है? हमारे 'Secure Drop' पर भेजें। आप नाम बताएँ या पहचान छुपाएँ, यह आपकी मर्जी है। सच को दुनिया के सामने लाना हमारी जिम्मेदारी है।

🔗 सुरक्षित रूप से रिपोर्ट करें

Share This Article
Leave a Comment