जयपुर: राजस्थान में पिछले 8 साल से तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण पर रोक लगी हुई है, जिसे शिक्षक वर्ग न केवल अन्यायपूर्ण बल्कि अमानवीय मान रहा है। इसी मांग को लेकर गत 5 और 6 अगस्त को प्रदेशभर के तृतीय श्रेणी शिक्षकों ने जयपुर के शहीद स्मारक पर भारी संख्या में जुटकर धरना दिया था। शिक्षकों की मुख्य मांग थी कि कई वर्षों से अपने परिवार और घरों से दूर सेवाएं दे रहे इन शिक्षकों को उनके गृह जिलों में पोस्टिंग दी जाए। Expose Now ने इन शिक्षकों की इस गंभीर आवाज को सरकार तक पूरी मजबूती से पहुंचाया और लगातार दो दिनों तक शहीद स्मारक पर डटकर कवरेज किया।

शिक्षा मंत्री के साथ हुई वार्ता और बनी थी यह सहमति
धरने के दौरान तृतीय श्रेणी शिक्षक संघर्ष समिति की शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के साथ दो दौर की लंबी वार्ता हुई थी। मंत्री के साथ बनी सहमति के बाद आंदोलन को 1 जनवरी तक के लिए स्थगित किया गया था, जिसके प्रमुख बिंदु निम्नलिखित थे:

9 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में डीपीसी (DPC) की सुनवाई में मजबूत पैरवी कर डीपीसी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
1 जनवरी से पहले स्थानांतरण पॉलिसी लागू कर दी जाएगी।
नए सत्र से पूर्व सभी तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण कर दिए जाएंगे।
किसी भी शिक्षक की प्रतिनियुक्ति (Deputation) नहीं की जाएगी और पूर्व की सभी प्रतिनियुक्तियां निरस्त कर दी जाएंगी।

कथनी और करनी में अंतर: सामने आए प्रतिनियुक्ति के दस्तावेज

तृतीय श्रेणी शिक्षक संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक सुनील महला का कहना है कि सरकार अन्य श्रेणियों (1st और 2nd ग्रेड) के तबादले तो कर रही है, लेकिन सिर्फ तृतीय श्रेणी शिक्षकों की लगातार अनदेखी की जा रही है। शिक्षा मंत्री का वह आश्वासन मात्र 14 दिनों में ही दम तोड़ता नजर आया, जब शिक्षकों को यह पता चला कि एक तरफ जहां मंत्रियों द्वारा किसी भी शिक्षक को प्रतिनियुक्ति पर न भेजने का दावा किया गया था, वहीं Expose Now के हाथ ऐसे कई दस्तावेज लग गए हैं जिनसे यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि शिक्षा विभाग में प्रतिनियुक्तियां अब भी बदस्तूर जारी हैं।

1 जनवरी को फिर होगा बड़ा आंदोलन
सरकार के इस दोहरे रवैये और भेदभावपूर्ण नीति को देखकर आम तृतीय श्रेणी संवर्ग का कर्मचारी अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। शिक्षक वर्ग में भारी मायूसी, उदासी और आक्रोश व्याप्त है। इसे देखते हुए प्रदेश संयोजक सुनील महला ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो 1 जनवरी को जयपुर के शहीद स्मारक पर फिर से एक बहुत बड़ा आंदोलन किया जाएगा।