9,300 से ज्यादा तस्कर गिरफ्तार, 224 ड्रग हॉटस्पॉट चिह्नित; पाकिस्तान सीमा से हेरोइन की ड्रोन सप्लाई, गुजरात-महाराष्ट्र से राजस्थान पहुंच रही एमडी
यादवेंद्र शर्मा,विशेष संवाददाता
जयपुर। राजस्थान में नशे का कारोबार अब पारंपरिक अफीम, डोडा-चूरा और गांजे तक सीमित नहीं रह गया है। प्रदेश में सिंथेटिक और महंगी ड्रग्स का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। राजस्थान पुलिस मुख्यालय और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025-26 के दौरान मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई में बड़ी संख्या में मामले दर्ज किए गए और 9,300 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। ANTF के चीफ विकास कुमार के मुताबिक ANTF के गठन के 10 महीने बाद करीब 700 करोड़ रुपए की ड्रग्स जब्त किया गया है।
नशे के इस बढ़ते नेटवर्क में सबसे ज्यादा चिंता सिंथेटिक ड्रग्स को लेकर है। जयपुर, जोधपुर, कोटा और उदयपुर जैसे बड़े शहरों तथा कोचिंग हब में एमडी, स्मैक और एलएसडी जैसी ड्रग्स की मांग बढ़ने की बात सामने आई है। दूसरी ओर सीमावर्ती जिलों में हेरोइन की तस्करी और मेवाड़-हाड़ौती क्षेत्र में अफीम व गांजे की तस्करी पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है

तीन रास्तों से राजस्थान में पहुंच रहा नशा
जांच एजेंसियों के मुताबिक राजस्थान में मादक पदार्थों की तस्करी के अलग-अलग रूट सक्रिय हैं। पाकिस्तान से सटे अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर के रास्ते ड्रोन के जरिए हेरोइन की खेप पहुंचाए जाने के मामले सामने आए हैं। श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ क्षेत्र इस नेटवर्क से विशेष रूप से प्रभावित बताए गए हैं। सीमा पार से ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थ गिराकर तस्करों तक पहुंचाने का तरीका सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती बन गया है।

दूसरा रूट मध्य प्रदेश और झारखंड की ओर से आने वाला बताया गया है। इस नेटवर्क के जरिए अफीम और गांजा मेवाड़ तथा हाड़ौती क्षेत्र तक पहुंचता है। चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, बारां और झालावाड़ जैसे इलाकों में पारंपरिक मादक पदार्थों की तस्करी पर पुलिस की नजर है।
तीसरा बड़ा नेटवर्क गुजरात और महाराष्ट्र से जुड़ा है। इन राज्यों की ओर से राजस्थान में सिंथेटिक ड्रग्स, खासकर एमडी की सप्लाई पहुंचने की बात सामने आई है। पुलिस और एंटी नारकोटिक्स एजेंसियां अब सप्लाई चेन के साथ-साथ ड्रग्स के स्रोत और पैसों के लेनदेन की कड़ियों को भी खंगाल रही हैं।

224 ड्रग हॉटस्पॉट, 200 एकड़ अवैध खेती नष्ट
नशे के नेटवर्क को तोड़ने के लिए पुलिस ने केवल तस्करों की गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। राज्य में 224 ड्रग हॉटस्पॉट चिह्नित किए गए हैं। इन इलाकों में निगरानी बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर सप्लायर और तस्करों के नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है।
एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की कार्रवाई में करीब 200 एकड़ में फैली अवैध मादक पदार्थों की खेती नष्ट किए जाने की जानकारी दी गई है। वहीं तस्करी से अर्जित संपत्ति पर भी कार्रवाई की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक 7.36 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध संपत्तियां कुर्क या ध्वस्त की गई हैं। इससे पुलिस का फोकस अब केवल ‘ड्रग्स पकड़ो और आरोपी गिरफ्तार करो’ से आगे बढ़कर तस्करी से बने आर्थिक साम्राज्य को खत्म करने पर भी है।
30 से ज्यादा अवैध एमडी फैक्ट्रियों का खुलासा
सिंथेटिक ड्रग्स के बढ़ते खतरे के बीच राजस्थान में एमडी की अवैध मैन्युफैक्चरिंग ने भी जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ाई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले कार्रवाई अभियान में 30 से ज्यादा अवैध एमडी फैक्ट्रियों का पर्दाफाश किया गया। इन मामलों ने संकेत दिया कि प्रदेश में केवल बाहर से ड्रग्स की सप्लाई ही नहीं हो रही, बल्कि नशीले पदार्थों के निर्माण और वितरण का स्थानीय नेटवर्क भी विकसित हो रहा है।
एमडी जैसी सिंथेटिक ड्रग्स का नेटवर्क विशेष रूप से युवाओं को निशाना बना रहा है। पुलिस के अनुसार नशे की चपेट में आने वालों में बड़ी संख्या 15 से 30 वर्ष की आयु वर्ग के युवाओं की है। कॉलेज विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को तस्कर आसान ग्राहक के रूप में निशाना बना रहे हैं।

पांच साल में लगातार बढ़ा नारकोटिक्स का ग्राफ
आंकड़ों पर नजर डालें तो राजस्थान में एनडीपीएस मामलों का ग्राफ लगातार ऊपर गया है। वर्ष 2021 में करीब 5,100 मामले दर्ज हुए और लगभग 6,200 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। वर्ष 2022 में मामले बढ़कर करीब 5,540 और गिरफ्तारियां करीब 6,900 तक पहुंचीं।
वर्ष 2023 में लगभग 5,900 मामले दर्ज हुए और करीब 7,400 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। वर्ष 2024 में मामलों की संख्या बढ़कर लगभग 6,410 और गिरफ्तारियां करीब 8,150 तक पहुंच गईं। वहीं वर्ष 2025-26 के उपलब्ध आंकड़ों में 7,195 से अधिक मामले और 9,300 से ज्यादा गिरफ्तारियां दर्ज होने की बात सामने आई है।
📊 वर्षवार आंकड़े
| अवधि | NDPS मामले | गिरफ्तारियां |
|---|---|---|
| 2021 | करीब 5,100 | करीब 6,200 |
| 2022 | करीब 5,540 | करीब 6,900 |
| 2023 | करीब 5,900 | करीब 7,400 |
| 2024 | करीब 6,410 | करीब 8,150 |
| 2025-26 | 7,195+ | 9,300+ |
इन आंकड़ों से साफ है कि नशे के खिलाफ कार्रवाई बढ़ने के साथ-साथ तस्करी के मामलों का दायरा भी लगातार सामने आ रहा है।
अब ‘ड्रग मनी’ और नार्को-टेरर पर नजर
नशे के कारोबार से जुड़े नेटवर्क को तोड़ने के लिए पुलिस और नारकोटिक्स एजेंसियां अब तस्करों के आर्थिक स्रोतों पर भी शिकंजा कस रही हैं। जांच का फोकस इस बात पर है कि ड्रग्स की खेप कहां से आती है, किस नेटवर्क के जरिए राजस्थान पहुंचती है, कौन-कौन लोग इसकी सप्लाई और बिक्री में शामिल हैं और इस अवैध कारोबार से अर्जित पैसा कहां लगाया जाता है।
सीमापार से ड्रग्स की संभावित सप्लाई के मामलों में ‘नार्को-टेरर’ एंगल से भी जांच की जा रही है। इसका उद्देश्य नशे की तस्करी के पीछे सक्रिय बड़े नेटवर्क और संभावित वित्तीय कड़ियों तक पहुंचना है।
शहरों में बदल रहा नशे का ट्रेंड
राजस्थान में नशे का भूगोल भी बदल रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में जहां हेरोइन की तस्करी बड़ी चुनौती है, वहीं बड़े शहरों में सिंथेटिक ड्रग्स की मांग चिंता का कारण बन रही है। जयपुर, जोधपुर, कोटा और उदयपुर में युवा वर्ग के बीच एमडी और अन्य महंगी सिंथेटिक ड्रग्स की मांग ने पुलिस की निगरानी बढ़ा दी है।
कोटा जैसे शिक्षा और कोचिंग केंद्रों में युवाओं को नशे के नेटवर्क से दूर रखना विशेष चुनौती है। तस्कर सोशल नेटवर्क, संपर्क सूत्रों और स्थानीय सप्लायरों के जरिए ग्राहक तैयार कर रहे हैं। ऐसे में पुलिस के सामने चुनौती केवल तस्करों को पकड़ने की नहीं, बल्कि ड्रग्स की मांग और सप्लाई दोनों को नियंत्रित करने की है।

राजस्थान में सामने आए आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि नशे का अपराध अब संगठित और बहुस्तरीय रूप ले रहा है। सीमा पार से आने वाली खेप से लेकर राज्यों के बीच सक्रिय सप्लाई नेटवर्क, स्थानीय तस्करों, सिंथेटिक ड्रग्स के निर्माण और युवाओं तक पहुंचने वाली बिक्री श्रृंखला तक पूरा तंत्र पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है। 700 करोड़ रुपए की ड्रग्स की जब्ती, 9,300 से अधिक गिरफ्तारियां, 224 हॉटस्पॉट और करोड़ों की अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई बताती है कि राजस्थान में नशे के खिलाफ लड़ाई अब सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि युवाओं की सुरक्षा और संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी जंग बन चुकी है।