जयपुर | राजस्थान में महिला एवं बाल विकास विभाग और महिला अधिकारिता विभाग से जुड़ी करीब 1.40 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और ग्राम साथिनों के सामने घर चलाने का गहरा संकट खड़ा हो गया है। पिछले तीन महीनों— फरवरी, मार्च और अप्रैल— का मानदेय अब तक लंबित है। मई का महीना शुरू होने के बावजूद कार्मिकों के बैंक खातों में अब तक राशि नहीं पहुंची है, जिससे प्रदेशभर के कार्मिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
अगले हफ्ते से कार्य बहिष्कार की चेतावनी
मानदेय मिलने में हो रही अत्यधिक देरी और लगातार बढ़ते कार्यभार के विरोध में कार्मिकों ने सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है:
- कार्मिकों ने अगले सप्ताह से प्रदेशभर में कार्य बहिष्कार और विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है।
- ‘उड़ान योजना’ से संबंधित सभी प्रकार के ऑनलाइन कार्यों को करने से भी साफ इनकार कर दिया गया है।
अतिरिक्त काम का बोझ, पर जेब खाली
अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ के संस्थापक संरक्षक छोटिलाल बुनकर ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बताया कि:
- कार्मिकों से नियमित विभागीय कार्यों के साथ-साथ सर्वे, मतदाता सूची पुनरीक्षण और मतदान जैसे महत्वपूर्ण सरकारी कार्य भी कराए गए।
- इतनी मेहनत और अतिरिक्त जिम्मेदारियों के बावजूद उन्हें कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं किया गया है।
दोहरा दबाव और मानसिक तनाव
कार्मिकों के अनुसार, वे वर्तमान में ‘दोहरी मार’ झेल रहे हैं:
- बजट का संकट: मानदेय न मिलने से घर का राशन तक खरीदना मुश्किल हो गया है, जिससे घर का बजट पूरी तरह बिगड़ चुका है।
- कार्य का दबाव: एक ओर आर्थिक तंगी है, तो दूसरी ओर विभाग योजनाओं के ऑनलाइन काम और अन्य सर्वे के लिए लगातार दबाव बना रहा है, जिससे कार्मिक मानसिक तनाव में हैं।
राजधानी जयपुर में जमीनी असर (आंकड़े)
अकेले जयपुर जिले में भी इस संकट का व्यापक असर देखने को मिल रहा है:
- 3300 कार्यकर्ता मानदेय न मिलने से प्रभावित हैं।
- 3300 सहायिका आर्थिक तंगी झेल रही हैं।
- 550 ग्राम साथिन भी भुगतान के इंतजार में हैं।
