राजस्थान में नशाखोरी पर लगाम: गृह राज्य मंत्री ने पेश किए आंकड़े

जयपुर, राजस्थान सरकार प्रदेश को नशा मुक्त बनाने के लिए हुक्काबार और अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। गुरुवार को विधानसभा में गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार अवैध नशाखोरी को जड़ से खत्म करने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के माध्यम से निरंतर सख्त कार्रवाई कर रही है।

नशाखोरी के मामलों में आई कमी

गृह राज्य मंत्री ने सदन में पिछले कुछ वर्षों के तुलनात्मक आंकड़े पेश करते हुए बताया कि प्रभावी पुलिसिंग के कारण प्रदेश में अवैध हुक्काबार गतिविधियों में显著 कमी आई है:

  • वर्ष 2022: 55,326 मामले सामने आए थे।
  • वर्ष 2023: 25,885 मामले दर्ज किए गए।
  • वर्तमान कार्यकाल (2024-25): पुलिस की मुस्तैदी के कारण यह आंकड़ा घटकर 12,598 रह गया है।

मंत्री बेढ़म ने कहा कि पिछली सरकार के समय ये गतिविधियां चरम पर थीं, लेकिन वर्तमान सरकार ने कोटपा (COTPA) एक्ट के तहत अपराधियों और संचालकों को निरुद्ध कर इस पर लगाम कसी है।


मकान मालिकों पर भी गिरेगी गाज

मंत्री ने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि कार्रवाई केवल हुक्काबार चलाने वालों तक सीमित नहीं रहेगी।

  • संपत्ति मालिकों पर एक्शन: जिस मकान या व्यावसायिक स्थान में हुक्काबार संचालित पाया जाएगा, उसके मालिक के विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
  • कोटपा एक्ट: तंबाकू उत्पादों के अवैध उपयोग और विज्ञापन के खिलाफ कोटपा एक्ट की धाराओं के तहत कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

टोंक जिले की रिपोर्ट: 284 चालान और गिरफ्तारियां

विधायक राम सहाय वर्मा द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में मंत्री ने टोंक जिले का विवरण प्रस्तुत किया:

  • 1 जनवरी 2023 से 3 दिसंबर 2025 तक टोंक में 5 बड़ी कार्रवाइयां की गईं, जिनमें 4 प्रकरणों में स्थान के मालिकों को भी आरोपी बनाया गया।
  • इस अवधि के दौरान कुल 284 व्यक्तियों के विरुद्ध चालान काटकर जुर्माना वसूला गया है और 8 व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।

मंत्री बेढ़म ने स्पष्ट किया कि पुलिस प्रशासन न केवल अपराधियों को पकड़ रहा है, बल्कि जनजागरूकता के माध्यम से युवाओं को नशे के जाल से बाहर निकालने का प्रयास भी कर रहा है।

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