भारत में ओज़ेम्पिक (Ozempic) जैसी GLP-1 दवाओं का चलन वजन घटाने और मोटापे के इलाज के लिए तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि ये दवाएं ब्लड शुगर और वजन को नियंत्रित करने में प्रभावी साबित हो रही हैं, लेकिन विशेषज्ञों ने अब इनके आंखों की सेहत पर पड़ने वाले संभावित प्रतिकूल प्रभावों को लेकर चेतावनी जारी की है। डॉक्टरों का मानना है कि इन दवाओं के सेवन से कुछ मरीजों में डायबिटिक रेटिनोपैथी और मैकुलर एडिमा (आंखों में सूजन) जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। जब ये दवाएं ब्लड शुगर को बहुत तेजी से कम करती हैं, तो शरीर के अनुकूलन की प्रक्रिया के दौरान आंखों की रोशनी पर अस्थायी असर पड़ सकता है, जिससे मरीजों को धुंधला दिखाई देने की शिकायत हो सकती है।
विशेषज्ञों ने एक दुर्लभ लेकिन गंभीर स्थिति ‘नॉन-आर्टरिटिक एंटीरियर इस्केमिक ऑप्टिक न्यूरोपैथी’ (NAION) के प्रति भी सतर्क किया है। अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार, इस स्थिति में आंख की मुख्य नस (optic nerve) में रक्त का प्रवाह बाधित हो जाता है, जिससे अचानक और स्थाई रूप से दृष्टि जाने का जोखिम रहता है। विशेषकर उन लोगों को अधिक खतरा है जिन्हें पहले से डायबिटीज या रक्त वाहिकाओं (blood vessels) से जुड़ी बीमारियां हैं। इसी जोखिम को देखते हुए, अब डॉक्टरों ने वेट लॉस ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले मरीजों की ‘बेसलाइन आई चेकअप’ और इलाज के दौरान नियमित निगरानी को अनिवार्य बनाने पर जोर दिया है। यदि किसी मरीज को इलाज के दौरान अचानक काले धब्बे, रोशनी की चमक (flashes) या नजर में तेजी से कमजोरी महसूस हो, तो उसे तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
