जयपुर, राजस्थान सरकार ट्रांसजेंडर समुदाय के सर्वांगीण विकास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। मंगलवार को शासन सचिवालय में आयोजित राजस्थान ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड की बैठक में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता इस समुदाय को शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के समान अवसर प्रदान करना है।
मानव गरिमा और समानता पर जोर
बैठक को संबोधित करते हुए गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार इसे केवल एक वर्ग विशेष का मुद्दा नहीं, बल्कि मानव गरिमा और सामाजिक न्याय का विषय मानती है। उन्होंने कहा, “ट्रांसजेंडर समुदाय हमारे समाज का अभिन्न हिस्सा है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तीसरे लिंग के रूप में मान्यता देना हमारे लोकतंत्र की बड़ी उपलब्धि है।”
बैठक के मुख्य बिंदु और निर्णय
- अधिकारों का संरक्षण: राज्य सरकार ‘द ट्रांसजेंडर पर्सन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) एक्ट 2019’ और ‘रूल्स 2020’ के प्रावधानों को कड़ाई से लागू करने की दिशा में कार्य कर रही है।
- पहचान प्रमाण पत्र: अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के पहचान पत्र बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए ताकि वे सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकें।
- विभागीय समन्वय: ट्रांसजेंडर समुदाय को अन्य सरकारी विभागों की योजनाओं से जोड़ने और उनकी समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए नीतिगत परामर्श साझा किए गए।
- कल्याणकारी योजनाएं: कौशल विकास (RSLDC) और शिक्षा विभाग के माध्यम से उनके लिए विशेष रोजगारोन्मुखी कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे।
वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव अपर्णा अरोड़ा ने विभागवार समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस अवसर पर निदेशक आशीष मोदी, ट्रांसजेंडर प्रतिनिधि पुष्पा माई सहित वित्त, चिकित्सा, शिक्षा, श्रम और पंचायतीराज जैसे विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
