960 करोड़ रुपए के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में गिरफ्तार 10 आरोपियों के खिलाफ कुल 16000 पेज की चार्जशीट पेश की गई। एसीबी के 4 अधिकारी जयपुर के झालाना स्थित मुख्यालय से 2 टेंपो ट्रेवलर में लाल रंग के 54 बंडलों में चार्जशीट लेकर एसीबी कोर्ट पहुंचे। सुबोध अग्रवाल के खिलाफ अभी चार्जशीट पेश नहीं हुई है।
अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत
चार्जशीट में इस बात का उल्लेख किया गया कि फर्म मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी के प्रोपराइटर महेश मित्तल और फर्म मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी के प्रोपराइटर पदमचंद जैन ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के फर्जी प्रमाण पत्र तैयार किए और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के उच्च स्तर के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर 960 करोड़ रुपए के टेंडर हासिल किए। इस दौरान करोड़ों रुपयों का भ्रष्टाचार हुआ।
सुबोध अग्रवाल को दो दिन की रिमांड पर भेजा
उधर, रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल को पुलिस रिमांड खत्म होने पर सोमवार को एक बार फिर एसीबी कोर्ट में पेश किया गया, जहां से फिर 2 दिन की रिमांड पर भेज दिया। वहीं सुबोध अग्रवाल के वकील की ओर से उनकी सास के निधन होने पर तेरहवीं तक अंतरिम जमानत मांगी गई थी, जिसे एसीबी कोर्ट ने खारिज कर दिया। मामले में सुबोध अग्रवाल समेत 11 आरोपियों ने गिरफ्तारी के खिलाफ हाईकोर्ट में 11 याचिकाएं लगाई हैं। इन पर 21 अप्रैल को सुनवाई होगी। सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद भी मुख्य 3 आरोपी जितेंद्र शर्मा (एक्जीक्यूटिव इंजीनियर), मुकेश गोयल (सुपरिटेंडेट इंजीनियर) और संजीव गुप्ता (प्राइवेट व्यक्ति) फरार है। कोर्ट इनकी संपत्ति कुर्क करने के आदेश जारी कर चुकी है।
इन आरोपियों के खिलाफ पेश की चार्जशीट:
- केडी गुप्ता, तत्कालीन चीफ इंजीनियर जयपुर शहर
- दिनेश गोयल, तत्कालीन मुख्य अभियंता पीएचईडी परियोजना जयपुर
- डीके गौड, रिटायर्ड तकनीकी चीफ इंजीनियर जयपुर
- निरिल कुमार, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता
- सुशील शर्मा, तत्कालीन वित्तीय सलाहकार
- शुभांशु दीक्षित, अतिरिक्त मुख्य अभियंता
- अरुण श्रीवास्तव, रिटायर्ड अतिरिक्त मुख्य अभियंता
- महेंद्र प्रकाश सोनी, रिटायर्ड अधीक्षण अभियंता
- विशाल सक्सेना, तत्कालीन अधिशाषी अभियंता
- मुकेश पाठक, छत्तीसगढ़ से गिरफ्तार









एसीबी की कार्रवाई और टेंडर फर्जीवाड़ा
एसीबी ने जेजेएम घोटाले को लेकर 17 फरवरी को बड़ी कार्रवाई की थी। इस दौरान जयपुर, बाड़मेर, जालोर, सीकर, बिहार, झारखंड और दिल्ली सहित कुल 15 जगहों पर छापेमारी की गई थी। इसी दिन रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल के घर पर भी छापेमारी की गई थी। मामले में फरार चल रहे पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल को 9 अप्रैल को दिल्ली से गिरफ्तार किया था।
जेजेएम घोटाला केंद्र सरकार की हर घर नल पहुंचाने वाली ‘जल जीवन मिशन योजना’ से जुड़ा है। साल 2021 में श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी और मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी के ठेकेदार पदमचंद जैन और महेश मित्तल ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र दिखाकर जलदाय विभाग (PHED) से करोड़ों रुपए के 4 टेंडर हासिल किए थे। श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी ने फर्जी कार्य प्रमाण पत्रों से पीएचईडी की 68 निविदाओं में भाग लिया था। उनमें से 31 टेंडर में एल-1 के रूप में 859.2 करोड़ के टेंडर हासिल किए थे। वहीं, श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी ने 169 निविदाओं में भाग लिया और 73 निविदाओं में एल-1 के रूप में भाग लेकर 120.25 करोड़ के टेंडर हासिल किए थे।
15 लाख में बने फर्जी सर्टिफिकेट और 4% कमीशन
घोटाले का खुलासा होने पर एसीबी ने जांच शुरू की और कई भ्रष्ट अधिकारियों को दबोचा। फिर ईडी ने केस दर्ज कर पूर्व मंत्री महेश जोशी और उनके सहयोगी संजय बड़ाया सहित अन्य के ठिकानों पर दबिश दी थी। इसके बाद सीबीआई ने 3 मई 2024 को केस दर्ज किया। ईडी ने अपनी जांच पूरी कर 4 मई को सबूत और दस्तावेज एसीबी को सौंप दिए थे।
एसीबी की टीम को पहली लीड मुकेश पाठक से मिली थी। पूछताछ में सामने आया कि 15 लाख रुपए में इरकॉन इंटरनेशनल कम्पनी के नाम से फर्जी सर्टिफिकेट बनाए गए थे। मुकेश पाठक ने ही PHED के सभी ऑफिस से सत्यापन के ईमेल का जवाब भी दिया था। इसके अलावा, एसीबी और ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि पूर्व मंत्री महेश जोशी, उनके सहयोगी संजय बड़ाया और पीएचईडी के अधिकारियों को टेंडर राशि का 4 प्रतिशत तक एडवांस भुगतान (कमीशन) हुआ था। इसी आधार पर एसीबी ने महेश जोशी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
