RGHS ‘वेंटिलेटर’ पर,सरकार और अस्पतालों की जंग में 15 लाख कर्मचारियों की सांसें अटकीं !

-अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) ने दी सरकार को आर-पार की चेतावनी

राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) वर्तमान में सरकार, निजी अस्पतालों और केमिस्टों के बीच की खींचतान का शिकार होकर रह गई है। इस विवाद की सबसे भारी कीमत प्रदेश के 15 लाख सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स चुका रहे हैं, जिन्हें न तो अस्पतालों में इलाज मिल रहा है और न ही केमिस्टों से दवाइयां। इस संकट को देखते हुए अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है और सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो पूरा प्रदेश व्यापक आंदोलन की आग में झुलसेगा।

संकट के घेरे में कर्मचारी हित:-

निजी अस्पतालों और केमिस्टों के बकाया भुगतान न होने के कारण उन्होंने योजना के तहत सेवाएं देना बंद कर दिया है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों का दबाव दोगुना हो गया है, जिससे वहां की व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। दिल की बीमारी और कैंसर जैसे गंभीर रोगों के ऑपरेशन टलने से मरीजों की जान पर खतरा मंडरा रहा है। राजस्थान का कर्मचारी वर्ग आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। सरकार को चाहिए कि वह निजी संस्थानों के साथ बैठकर तत्काल इस गतिरोध को तोड़े। यह एक अत्यंत गंभीर विषय है, क्योंकि 15 लाख परिवारों का स्वास्थ्य इस विवाद के कारण दांव पर लगा है।

निजीकरण की ‘साजिश’ का आरोप:-

बैठक में कर्मचारी नेताओं ने एक गंभीर आशंका जताई है। महासंघ का मानना है कि सरकार जानबूझकर भुगतान में देरी कर रही है ताकि योजना को विफल साबित किया जा सके। आरोप लगाया गया है कि यह आरजीएचएस को निजी बीमा कंपनियों के हाथों में सौंपने की एक बड़ी साजिश हो सकती है, जिससे कर्मचारियों के लाभ कम हो जाएंगे। महासंघ के अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ की अनुपस्थिति में आयोजित आपातकालीन बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जल्द ही प्रदेश महासमिति की बैठक बुलाई जाएगी। यदि 48 घंटों में स्थिति स्पष्ट नहीं हुई, तो चरणबद्ध तरीके से सड़कों पर विरोध प्रदर्शन शुरू होगा। इस आपात बैठक में देवेन्द्र सिंह नरूका के साथ शेर सिंह यादव, अजयवीर सिंह बगतपुरा, बहादुर सिंह राठौड़, प्रकाश यादव, ओम प्रकाश चौधरी, राहुल यादव, शशि शर्मा और पप्पू शर्मा जैसे वरिष्ठ नेताओं ने शिरकत की और एकजुटता का परिचय दिया।

“कर्मचारी हर महीने अपनी सैलरी से आरजीएचएस के लिए कटौती करवाता है। यह कोई खैरात नहीं, बल्कि हमारा हक है। इसके बावजूद हमें इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है, जो बर्दाश्त से बाहर है।”
— देवेन्द्र सिंह नरूका, प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष

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