जयपुर। राजस्थान हाई कोर्ट ने प्रदेश के न्यायिक अधिकारियों के लिए खुशियों का पिटारा खोल दिया है। कोर्ट ने प्रदेश के 72 दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों को ‘हिल एरिया’ और ‘कठिन स्थान’ घोषित करते हुए वहां तैनात अधिकारियों के लिए 5,000 मासिक विशेष भत्ता लागू करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है।
10 साल का मिलेगा मोटा ‘एरियर’:-
इस फैसले की सबसे बड़ी बात यह है कि यह लाभ 1 जनवरी 2016 से प्रभावी माना जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि इन क्षेत्रों में सेवाएं दे चुके या दे रहे अधिकारियों को पिछले 10 सालों का बकाया (Arrear) एक साथ मिलेगा। यह निर्णय द्वितीय राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग (SNJPC) की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है।
कौन-कौन से इलाके हुए शामिल?
हाईकोर्ट द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रदेश के अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों को वर्गीकृत किया गया है:-
-पर्वतीय क्षेत्र (Hill Area): माउंट आबू, कुंभलगढ़ और गोगुंदा।
-कठिन क्षेत्र (Hard Stations): इसके अंतर्गत 29 न्यायिक जिलों के 69 क्षेत्रों को रखा गया है। इसमें बाड़मेर, जैसलमेर, बांसवाड़ा, करौली, उदयपुर और टोंक जैसे जिले शामिल हैं।
-प्रमुख स्थान: सीमावर्ती रेगिस्तानी क्षेत्र जैसे पोकरण, शिव, चौहटन, खाजूवाला और आदिवासी बहुल क्षेत्र जैसे कुशलगढ़, घाटोल, बागीदौरा और शाहबाद को भी इस सूची में प्राथमिकता दी गई है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि जो अधिकारी विषम परिस्थितियों, दुर्गम पहाड़ों और दूर-दराज के आदिवासी इलाकों में ड्यूटी कर रहे हैं, उन्हें अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलना चाहिए। रजिस्ट्रार जनरल चंचल मिश्रा द्वारा जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट और राज्य सरकार के आदेशों के अनुपालन में लिया गया है। भविष्य में जरूरत के अनुसार इस सूची में अन्य क्षेत्रों को जोड़ा या हटाया भी जा सकेगा।
क्या होगा असर?
इस विशेष भत्ते के लागू होने से अब न्यायिक अधिकारियों में कठिन और दूरदराज के क्षेत्रों में पोस्टिंग को लेकर सकारात्मक रुझान बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही, आयोग ने यह भी साफ किया है कि यदि राज्य सरकार के अन्य अधिकारियों को इससे अधिक लाभ मिल रहा है, तो न्यायिक अधिकारियों को भी वही उच्च लाभ दिया जाएगा।
Expose Now ब्यूरो
