-करोड़ों के ‘वे लीव चार्ज’ में भारी विसंगति, विभाग के पास खुद का कोई रिकॉर्ड या खाता ही मौजूद नहीं
-मनमाने टैक्स, पुराने सर्विस टैक्स और टाइम पीरियड के घालमेल को बिना वेरिफिकेशन के किया जा रहा था पास
-एग्जीक्यूटिव इंजीनियर्स को 15 दिन में ‘लेजर’ बनाने और मुख्य अभियंताओं को एक महीने में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश
जयपुर। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) में रेलवे को दिए जाने वाले करोड़ों रुपये के ‘वे लीव चार्ज’ (Way Leave Charges) के भुगतान में राज्य स्तर पर भारी लापरवाही और विसंगतियां सामने आई हैं। विभाग का शीर्ष प्रबंधन बिना किसी पुख्ता रिकॉर्ड, बिना क्रॉस-वेरिफिकेशन और बिना एकरूपता (Uniformity) के रेलवे को करीब 12 करोड़ 28 लाख रुपये का भुगतान करने की तैयारी में था। लेकिन Expose Now के खुलासे के बाद PHED फायनेंस कमेटी ने इस पूरे घालमेल को पकड़ लिया। कमेटी ने अजमेर, फतेहपुर, राजसमंद और उदयपुर से जुड़े चारों प्रस्तावों को मंजूरी देने से साफ इनकार करते हुए इन्हें स्थगित (Defer) कर दिया है।

यह पूरा मामला प्रदेश के अलग-अलग जिलों में रेलवे ट्रैक के नीचे से गुजरने वाली पानी की पाइपलाइनों के बदले रेलवे को दिए जाने वाले शुल्कों से जुड़ा है। रेलवे द्वारा भेजे गए डिमांड नोट को विभाग के अधिकारियों ने बिना किसी तालमेल या जांच के आंख मूंदकर सीधे भुगतान के लिए आगे बढ़ा दिया था।
Expose Now ने मनमाने टैक्स और टाइम पीरियड का खेल किया था ‘Expose’:-
रेलवे को ‘वे लीव चार्ज’ के भुगतान में PHED द्वारा बरती जा रही लापरवाही को लेकर Expose Now ने बड़ा खुलासा किया था। पिछले दिनों फायनेंस कमेटी की बैठक में जब चीफ इंजीनियर (U&NRW) द्वारा करोड़ों रुपये के भुगतान के अलग-अलग प्रस्ताव रखे गए, तो उनकी समीक्षा के दौरान फायनेंस कमेटी को गंभीर तकनीकी और वित्तीय खामियां नजर आई। कमेटी ने कड़ा ऐतराज जताते हुए नोट किया कि रेलवे को भुगतान के जितने भी प्रस्ताव आ रहे हैं, उनमें कोई यूनिफॉर्मिटी (एकरूपता) ही नहीं है। अलग-अलग क्षेत्रों के प्रस्तावों में समय की अवधि (Time Period) और लागू होने वाले टैक्स की दरों में भारी असमानता है। हद तो तब हो गई जब लक्ष्मणगढ़ (सीकर-चूरू सेक्शन) के फतेहपुर प्रस्ताव में साल 2013 से 2023 के ब्लॉक के लिए 14% की दर से पुराना ‘सर्विस टैक्स’ जोड़कर भुगतान मांगा गया था, जिसे PHED चुपचाप पास करने जा रहा था।राजसमंद और उदयपुर रीजन के प्रस्तावों में सालाना दर जमीन के बाजार मूल्य का 6% (न्यूनतम 10,000 रुपये) लगाई गई है, लेकिन विभाग के पास इस बात का कोई स्वतंत्र रिकॉर्ड नहीं था कि रेलवे ने जमीन का यह मूल्यांकन किस आधार पर किया है।
किस रीजन से कितना होना था आंख मूंदकर भुगतान?

रेलवे के अलग-अलग डिमांड नोट के आधार पर प्रदेश के चार बड़े हिस्सों से कुल 12,27,89,506.63 रुपये (करीब 12.28 करोड़) का भुगतान किया जाना प्रस्तावित था, जिसका पॉइंट-वाइज़ विवरण इस प्रकार है:
-अजमेर रीजन (सबसे बड़ा भुगतान): यहाँ बीसलपुर बांध और नागौर लिफ्ट प्रोजेक्ट की पाइपलाइनों के नाम पर सबसे भारी-भरकम राशि यानी 9,98,83,818.26 रुपये का भुगतान होना था। इसमें सिटी सर्किल अजमेर से 6.33 करोड़, भीलवाड़ा से 2.31 करोड़, डीडवाना-कुचामन से 75.13 लाख, जिला सर्किल अजमेर से 40.98 लाख और ब्यावर से 17.44 लाख रुपये शामिल थे।
-उदयपुर सर्किल: यहाँ सिटी डिवीजन और ग्रामीण डिवीजन-1 के तहत बिछी पाइपलाइनों के लिए रेलवे को 1,17,67,648.00 रुपये दिए जाने थे। इसमें अकेले सिटी डिवीजन उदयपुर का हिस्सा 1.15 करोड़ रुपये से अधिक था।
-राजसमंद सर्किल: इस सर्किल के तहत आमेट और नाथद्वारा डिवीजन में रेलवे ट्रैक क्रॉसिंग के बदले 1,08,27,314.00 रुपये की डिमांड को बिना जांचे पास किया जा रहा था, जिसमें आमेट डिवीजन का हिस्सा करीब 96 लाख रुपये था।
-लक्ष्मणगढ़ डिवीजन (फतेहपुर): सीकर-चूरू सेक्शन में मात्र 250 एमएम की पाइपलाइन क्रॉसिंग के बदले पुराने मामलों को खींचते हुए रेलवे ने 3,10,726.37 रुपये का डिमांड नोट थमा दिया था, जिसे विभाग ने बिना किसी आपत्ति के स्वीकार कर लिया।

रेलवे अधिकारियों के साथ बैठक कर ‘स्टैंडर्ड मोड’ तय करने के आदेश:
-डिमांड का आधार जांचेंगे चीफ इंजीनियर: फाइनेंस कमेटी ने इस ढर्रे पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी संबंधित मुख्य अभियंता (Chief Engineers) पहले खुद यह जांचें कि रेलवे द्वारा जनरेट की गई इस डिमांड का वास्तविक आधार क्या है, चार्जेस की सही अवधि क्या है, और इसमें जीएसटी व सुपरविजन चार्जेस का क्या नियम है।
-रेलवे के साथ होगी संयुक्त बैठक: इसके बाद पीएचईडी के आला अधिकारी रेलवे अथॉरिटीज के साथ एक विशेष बैठक आयोजित करेंगे। इस बैठक का मकसद डिमांड नोट और भुगतान की प्रक्रिया को ‘स्टैंडर्डाइज’ (मानकीकृत) करना है, ताकि रेलवे अपनी मर्जी से कोई भी टैक्स या चार्ज न वसूल सके।
-15 दिन में ‘लेजर’ मेंटेन करने के निर्देश: कमेटी ने निचले स्तर के अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए संबंधित अधिशासी अभियंताओं (XENs) को आदेश दिया है कि वे अगले 15 दिनों के भीतर एक विशेष ‘लेजर’ (खाता) तैयार करें।

FC के सामने एक महिने में रखनी होगी रिपोर्ट:-
रेलवे को ‘वे लीव चार्ज’ के भुगतान को लेकर लेजर में अब तक की समयावधि, लागू जीएसटी/सर्विस टैक्स, पूर्व में रेलवे को किए गए सभी भुगतान और वर्तमान बकाया का पूरा कच्चा-चिट्ठा दर्ज होना चाहिए। यह जानकारी संबंधित मुख्य अभियंता द्वारा संकलित कर एक महीने के भीतर वापस फाइनेंस कमेटी के सामने रखनी होगी। इस पूरी कार्रवाई की जिम्मेदारी चीफ इंजीनियर (U&NRW) को सौंपी गई है।
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now