जयपुर। राजस्थान सरकार बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच बेहतरीन प्रबंधन कर रही है। प्रदेश में अब मांग के अनुरूप पर्याप्त बिजली उपलब्ध है और स्वयं के स्रोतों से उत्पादन बढ़ने के कारण एनर्जी एक्सचेंज पर निर्भरता काफी कम हो गई है। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने गुरुवार को विद्युत भवन में मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा करते हुए यह दावा किया कि पिछले दो साल से प्रदेश में बिजली की कोई लोड शेडिंग नहीं हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान तेजी से ‘एनर्जी सरप्लस स्टेट’ बनने की ओर अग्रसर है।
एनर्जी एक्सचेंज पर निर्भरता घटी, अब बिजली बेच भी रहा राजस्थान
ऊर्जा मंत्री ने आंकड़ों के जरिए बताया कि स्वयं के स्रोतों से बिजली की उपलब्धता बढ़ने से बाहरी खरीद में भारी कमी आई है। इस वर्ष अप्रैल और मई में कुल 8,138 लाख यूनिट बिजली कम खरीदी गई। इसके विपरीत, राज्य ने इस वर्ष अप्रैल में 1,140 लाख यूनिट और मई में 417 लाख यूनिट बिजली लगभग 10 रुपए प्रति यूनिट की दर से एनर्जी एक्सचेंज को बेची है।
एनर्जी एक्सचेंज से बिजली खरीद का तुलनात्मक विवरण:
| माह | गत वर्ष की खरीद (लाख यूनिट) | इस वर्ष की खरीद (लाख यूनिट) |
| अप्रैल | 2,883 | 214 |
| मई | 8,273 | 2,804 |
थर्मल इकाइयों से अब तक का सर्वाधिक विद्युत उत्पादन
प्रदेश के थर्मल पावर प्लांट बेहतर रखरखाव के कारण शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं।
- 2 जून को प्रदेश की कोयला आधारित 23 इकाइयों ने अपनी क्षमता का 94.60% (7,171 मेगावाट) विद्युत उत्पादन हासिल किया, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।
- आम दिनों में भी ये प्लांट 78 से 82 प्रतिशत क्षमता के साथ उत्पादन कर रहे हैं।
- इस वर्ष अप्रैल-मई में इन इकाइयों से विद्युत उपलब्धता 84.34% रही, जो पिछले साल (77.90%) के मुकाबले 6.50% अधिक है।
पीक डिमांड के लिए तैयार हो रहा ‘बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली’ (BESS)
रात के समय बिजली की पीक डिमांड को पूरा करने के लिए सरकार अभिनव कदम उठा रही है।
- कुसुम-2.0 योजना: भारत सरकार ने राजस्थान को 6,000 मेगावाट सोलर पावर क्षमता आवंटित करने का आश्वासन दिया है, जिसके साथ बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम लगाया जाएगा।
- पूगल सोलर पार्क: यहाँ 2,450 मेगावाट सोलर के साथ 6,000 मेगावाट ऑवर की बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने की निविदा प्रक्रिया जारी है। इसे सितंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
- स्टैंडअलोन सिस्टम: रात्रि में बिजली उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 33 केवी सब-स्टेशनों और वितरण ट्रांसफार्मरों पर स्टैंडअलोन बैटरी सिस्टम विकसित किया जा रहा है। दिन की अतिरिक्त सौर ऊर्जा को इसमें स्टोर कर रात में उपयोग किया जाएगा, जिससे वोल्टेज लेवल में भी सुधार होगा। इसे जल्द ही पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जाएगा।
किसानों को दिन में बिजली: शेष 15 जिलों का रोडमैप तैयार
वर्तमान में प्रदेश के 26 जिलों में किसानों को दिन के दो ब्लॉक में बिजली आपूर्ति की जा रही है। ऊर्जा मंत्री ने बताया कि शेष 15 जिलों को भी इस व्यवस्था से जोड़ने के लिए रोडमैप तैयार कर लिया गया है।
- ग्रिड को मजबूत करने के लिए डिस्कॉम और प्रसारण से जुड़ी 1,109 बाधाओं को चिन्हित कर दूर किया जा रहा है।
- मात्र ढाई साल में 400 केवी, 220 केवी और 132 केवी के 60 नए ग्रिड सब-स्टेशन बनाए गए हैं।
ग्रीष्मकालीन पीक डिमांड का बेहतर प्रबंधन
इस साल गर्मियों में अब तक की सर्वाधिक मांग 17,333 मेगावाट (27 मई को रात 10:30 बजे) दर्ज की गई, जबकि उस समय प्रदेश के पास 17,353 मेगावाट बिजली उपलब्ध थी। यानी सर्वोच्च मांग को भी बिना किसी कटौती के सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
‘नो करंट’ शिकायतों में आई भारी गिरावट
वितरण निगमों द्वारा त्वरित समाधान प्रणाली लागू करने से ‘नो करंट’ की शिकायतों में बड़ी कमी आई है:
- जयपुर डिस्कॉम के आंकड़े: पिछले साल 1 अप्रैल से 2 जून के बीच 2,33,775 शिकायतें दर्ज हुई थीं, जो इस साल इसी अवधि में घटकर 1,68,914 रह गई हैं।
- त्वरित समाधान: 24 घंटे केंद्रीकृत कॉल सेंटर कार्यरत हैं। 1129 एफआरटी (FRT) टीमों को जीपीएस से ट्रैक कर तुरंत मौके पर भेजा जा रहा है।
- इलेक्ट्रिक व्हीकल इंफ्रास्ट्रक्चर: इसके अलावा, प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए 350 स्थानों पर कुल 805 नए ईवी चार्जिंग स्टेशन लगाए जा रहे हैं।
