राजस्थान में भ्रष्टाचार पर सीएम भजनलाल की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: 1 आईएएस सहित 103 अफसर निलंबित, 6 बर्खास्त और 11 की रोकी पेंशन

जयपुर। राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए सख्त कदम उठाए हैं। राज्य सरकार ने दागी और भ्रष्ट अधिकारियों व कर्मचारियों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए एक आईएएस (IAS) अधिकारी सहित 103 अफसरों को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही 6 अधिकारियों को सरकारी सेवा से बर्खास्त (Dismiss) कर दिया गया है और 11 अधिकारियों की आजीवन शत-प्रतिशत पेंशन रोक दी गई है। सरकार ने 108 मामलों में अभियोजन की स्वीकृति भी जारी कर दी है।

इन 6 अधिकारियों को किया गया सेवा से बर्खास्त

भ्रष्टाचार और कार्य में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप में सरकार ने निम्नलिखित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नौकरी से निकाल दिया है:

  • भरत प्रकाश मेघवाल: तत्कालीन विकास अधिकारी, पीडब्ल्यूडी (सुवाणा, भीलवाड़ा)
  • राजेश कुमार नैनावत: तत्कालीन कृषि उप निदेशक (झुंझुनूं)
  • महावीर सिंह आसीवाल: तत्कालीन सहायक आयुक्त, वित्त कर (भरतपुर)
  • डॉ. राम मोहन सिंह चौहान: चिकित्सा अधिकारी (सीएचसी बिछीवाड़ा, डूंगरपुर)
  • डॉ. मुरलीधर शर्मा: चिकित्सा अधिकारी (सीएचसी रामगढ़ पचवारा, दौसा)
  • डॉ. मनोहर लाल: चिकित्सा अधिकारी (सीएचसी रामगढ़, अलवर)

फर्जी रिपोर्ट और कोर्ट से सजा मिलने पर भी गिरी गाज

  • प्रदीप कुमार हजरती: पीएचईडी (PHED) की अलवर प्रयोगशाला के वरिष्ठ रसायनज्ञ प्रदीप कुमार हजरती ने पेयजल के नमूनों की गुणवत्ता जांच में फर्जी रिपोर्ट तैयार की थी। इस घोर लापरवाही पर मुख्यमंत्री ने उन्हें तत्काल सेवा से बाहर करने का निर्णय लिया।
  • हरिसिंह मीना: तत्कालीन एपीपी, एसीजेएम-4 (कोटा) को एसीबी कोर्ट द्वारा भ्रष्टाचार के मामले में सजा सुनाए जाने के बाद नौकरी से हटा दिया गया है।

इन 12 अधिकारियों की रोकी गई आजीवन शत-प्रतिशत पेंशन

रिटायरमेंट के बाद भी दागी अधिकारियों को राहत नहीं मिली है। सरकार ने भ्रष्टाचार के मामलों में लिप्त 12 अधिकारियों की शत-प्रतिशत पेंशन आजीवन रोकने का दंड दिया है:

नामपद और तैनाती (तत्कालीन)
बनवारी लाल मीणा (RAS)उप सचिव, नगर विकास न्यास (अलवर)
देवेन्द्र सिंह ढिल्लो (RAS)उप सचिव, नगर विकास न्यास (अलवर)
डॉ. शिवनारायण यादववरिष्ठ चिकित्साधिकारी, सीएचसी (नीमराणा, अलवर)
मनोहर लाल सिसोदियाविकास अधिकारी (कपासन)
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद कोठारीकनिष्ठ विशेषज्ञ, सीएचसी (मांडलगढ़, भीलवाड़ा)
डॉ. कल्पना श्रीवास्तवचिकित्साधिकारी (गंगरार, चित्तौड़गढ़)
नृसिंह रेबारीसहायक अभियंता, पीडब्ल्यूडी (प्रतापगढ़)
सुरेश माथुरअधिशाषी अभियंता, पीडब्ल्यूडी (जैसलमेर)
महेन्द्र सिंह (RPS)वृत्ताधिकारी (सवाई माधोपुर)
डॉ. लक्ष्मण दत्त शर्माचिकित्साधिकारी (निवाई, टोंक)
डॉ. अविनाश कुमार शर्मासहायक निदेशक, पशुधन विकास (बांसवाड़ा)
देशराज नूनियाअधिशाषी अभियंता, आईजीएनपी मोहनगढ़ (जैसलमेर)

अनिवार्य सेवानिवृत्ति और अभियोजन स्वीकृति

मुख्यमंत्री ने कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए डॉ. विलास राव गुल्हाने (तत्कालीन वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी, झालावाड़) को अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) दे दी है।

इसके अलावा विभिन्न विभागों के भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ जांच एजेंसियों को अभियोजन की स्वीकृति (Prosecution Sanction) दी गई है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • देवी सिंह: तत्कालीन एसडीएम (डीग)
  • डॉ. पवन कुमार जैन: तत्कालीन बीसीएमओ (लालसोट)
  • मायालाल सैनी: तत्कालीन एक्सईएन, पीएचईडी (अलवर)
  • राकेश चौहान: तत्कालीन एईएन, पीएचईडी (अलवर)
  • गोपाल लाल कुमावत: तत्कालीन लेखाधिकारी (राजस्थान जलप्रदाय एवं सीवरेज बोर्ड, जयपुर)
  • राकेश सिंह: तत्कालीन एईएन, पीएचईडी (नीमराणा)
  • प्रदीप कुमार: तत्कालीन जेईएन, पीएचईडी (नीमराणा)
  • विशाल सक्सेना: तत्कालीन एक्सईएन, पीएचईडी (शाहपुरा)
  • महेन्द्र प्रकाश सोनी: तत्कालीन एसीई, विशेष परियोजना (अजमेर)

राज्य सरकार की इस बड़ी कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के प्रति सरकार का रवैया सख्त रहेगा और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

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