जयपुर। राजस्थान विधानसभा का सत्र शुरू होने के पहले ही दिन जयपुर की सड़कों पर सियासत का पारा चढ़ गया। शिक्षा विभाग के हालिया आदेशों और स्कूलों की जमीनी हकीकत को लेकर कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं के नेतृत्व में विधायकों ने सड़क पर उतरकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। इस प्रदर्शन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट और हरीश चौधरी भी शामिल हुए, जिससे सियासी सरगर्मी और बढ़ गई।
आनंद पोद्दार मूक-बधिर स्कूल से शुरू हुआ मार्च
प्रदर्शन की शुरुआत करते हुए कांग्रेस विधायकों ने पहले आनंद पोद्दार मूक-बधिर स्कूल का दौरा किया और वहां के हालातों का जायजा लिया। इसके बाद विधायक हाथों में तख्तियां लेकर और नारेबाजी करते हुए विधानसभा की ओर बढ़े। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सरकार स्कूलों की बदहाली और जमीनी सच्चाइयों को छुपाने के लिए तानाशाही रवैया अपना रही है।
बैरिकेट्स पर चढ़े विधायक, पुलिस से तीखी नोकझोंक
जब कांग्रेस विधायकों और कार्यकर्ताओं का हुजूम विधानसभा की तरफ बढ़ रहा था, तब पुलिस ने हाई कोर्ट सर्किल और विद्युत भवन के पास सुरक्षा घेरा बनाते हुए उन्हें रोकने का प्रयास किया। इस दौरान स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई और कई विधायक पुलिस के लगाए गए बैरिकेट्स पर चढ़कर उन्हें पार करने की कोशिश करने लगे। प्रदर्शनकारी विधायक हाड़ोती द्वार का बड़ा गेट खोलने की मांग पर अड़ गए और विधानसभा के पश्चिमी गेट के बाहर ही धरने पर बैठ गए।
क्या है पूरा विवाद?
कांग्रेस विधायकों (अमिन कागजी, रफीक खान, अमित चाचाण, डूंगर राम गेदर आदि) का कहना है कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव है। सरकार इन कमियों को छिपाने के लिए स्कूलों में फोटो-वीडियो बनाने और बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा रही है। विपक्ष का आरोप है कि यदि कोई इन व्यवस्थाओं को उजागर करता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी जा रही है। पहले दिन के इस उग्र प्रदर्शन ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में विधानसभा के भीतर और बाहर का माहौल बेहद गर्म रहने वाला है।