श्रीगंगानगर: 50,000 रुपये घूस लेते पटवार हल्का 68 एलएनपी का पटवारी गिरफ्तार, जेल भेजा गया

श्रीगंगानगर: राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति के तहत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है । ब्यूरो की बीकानेर एसयू टीम ने कार्रवाई करते हुए श्रीगंगानगर जिले की पदमपुर तहसील के अंतर्गत कस्बा रिड़मलसर (पटवार हल्का 68 एल.एन.पी.) में तैनात राजस्व पटवारी अंकुश कुमार को 50,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है । आरोपी पटवारी ने परिवादी से उसके मकान के बैंक लोन के लिए कृषि भूमि का खाता विभाजन और शुद्धिकरण करने के एवज में कुल 1 लाख रुपये की घूस मांगी थी

क्या था पूरा मामला?

शिकायतकर्ता सुखदेव सिंह (पुत्र जीत सिंह, निवासी चक 68 एल.एन.पी. मण्डी रिडमलसर) ने एसीबी चौकी बीकानेर पर उपस्थित होकर एक लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई थी । सुखदेव सिंह को अपने रहवासी मकान पर घरेलू आवश्यकता के लिए होम लोन लेना था । जब प्राइवेट बैंक के अधिकारियों ने जीपीएस (GPS) लोकेशन चेक की, तो जमाबंदी और मौके की लोकेशन के किला नंबर में विरोधाभास पाया गया । बैंक ने सुखदेव से कहा कि वे पटवारी से मिलकर इस रिकॉर्ड को सही करवाएं

जब सुखदेव सिंह ने अपने हल्का पटवारी अंकुश कुमार से संपर्क किया, तो भ्रष्ट पटवारी ने काम को कम खर्चे में ‘सुलझाने’ के नाम पर 1 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की । परिवादी रिश्वत नहीं देना चाहता था, इसलिए उसने एसीबी को मामले की जानकारी दी

डमी नोटों और वॉयस रिकॉर्डर से बुना गया जाल

एसीबी के पुलिस निरीक्षक इन्द्र कुमार के नेतृत्व में मामले का गोपनीय सत्यापन शुरू किया गया । 7 मई 2026 को डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर के जरिए पटवारी द्वारा रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि की गई । चूंकि परिवादी के पास पूरे 50,000 रुपये नकद उपलब्ध नहीं थे, इसलिए उसने बाजार से 10,000 रुपये के असली भारतीय नोट और 40,000 रुपये के डमी नोट (जिन पर ‘भारतीय मनोरंजन बैंक’ और ‘FULL ON MASTI’ लिखा था) का इंतजाम किया

एसीबी की टीम ने सूरतगढ़ शहर में इन सभी नोटों पर फिनोलफ्थलीन पाउडर लगवाया और परिवादी की जेब में रखवाकर उसे पटवारी के पास भेजा

उपतहसील कार्यालय में ऐसे दबोचा गया आरोपी

2 जून 2026 को पटवारी अंकुश कुमार ने परिवादी को पैसे लेकर रिड़मलसर उपतहसील कार्यालय बुलाया । सुखदेव सिंह ने जैसे ही आरोपी पटवारी को पैसे दिए, पटवारी ने राशि को अपनी पैंट की जेब में रखा और फिर अंदर के कमरे में जाकर अपने निजी पिट्ठू बैग में छुपा दिया । परिवादी द्वारा मिस्ड कॉल के जरिए इशारा मिलते ही एसीबी की ट्रैप टीम ने कमरे में प्रवेश किया

जब रासायनिक प्रक्रिया के तहत आरोपी पटवारी के दोनों हाथों की उंगलियों और उसकी पैंट की जेबों को सोडियम कार्बोनेट के घोल में धुलवाया गया, तो पारदर्शी घोल का रंग बदलकर हल्का गुलाबी और मटमैला हो गया, जिससे घूस लेने की वैज्ञानिक पुष्टि हो गई । स्वतंत्र गवाहों (बीरबलराम, अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी और निर्मल स्वामी, कनिष्ठ सहायक) के सामने पिट्ठू बैग से रबर बैंड से बंधी 50,000 रुपये की वह गड्डी बरामद कर ली गई।

पढ़े पूरी FIR…

वर्तमान स्थिति और कानूनी कार्रवाई

आरोपी पटवारी अंकुश कुमार (पुत्र मनसुखराम मेघवाल, निवासी 8 ईईए, पदमपुर) को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत गिरफ्तार किया गया है । कोर्ट में पेश किए जाने के बाद आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा (जेल) में भेज दिया गया है

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के पुलिस अधीक्षक सुनील सिहाग के आदेशानुसार जयपुर मुख्यालय में यह नियमित एफआईआर (नंबर 0146/2026) दर्ज की गई है । इस पूरे मामले का आगामी अनुसंधान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो श्रीगंगानगर द्वितीय के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेश शर्मा को सौंपा गया है

Share This Article
Leave a Comment